अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आर्थिक साधन - International Monetary Fund Financial Instruments

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आर्थिक साधन - International Monetary Fund Financial Instruments


(क) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की पूजी यह सदस्य देशों के लिए निश्चित किये गए अभ्यशों के कुल योग से बनाई जाती है। प्रत्येक देश के कोटा को कोष का सदस्य बनने से पहले निश्चित कर दिया जाता है आजकल यह कोटा एस.डी.आर. के रूप में निर्धारित होता है। प्रत्येक देश अपने कोटे की 25 प्रतिशत राशि फड द्वारा निर्धारित आरक्षित परिसंपति जैसे एस.डी.आर. या अन्य किसी प्रयोग करसी देता है। 75 प्रतिशत राशि अपने देश की करसी में देता है।


फंड के कोटा में हर पांच वर्ष बाद परिवर्तन किए जाते हैं। आरंभ में आई.एम.एफ. की कुल पूंजी 880 करोड़ डालर निर्धारित की गई थी। फंड ने सदस्य देशों के कोटे में समय-समय पर परिवर्तन किया है और सदस्य देशों के कोटा में वृद्धि की जाती रही है। कोष की कुल राशि में भारत का भाग 1.96 प्रतिशत है। सबसे अधिक कोटा अमेरिका का है।

आई.एम.एफ. के अग्रणी कोटाधारियों में भारत का वर्तमान में 13वां स्थान है। एक देश में कोटा की रकम के द्वारा ही फड़ के साथ उस देश के संबंध निर्धारित होते हैं। जैसे (i) सदस्य देश की वोट देने की शक्ति कोटा के रकम पर निर्भर करती है। (ii) एक देश फड से कितना ऋण ले सकता है। (iii) एक देश के फंड की पूंजी का कितना भाग होगा आदि सदस्य देश के कोटा की रकम पर निर्भर करता है।


(ख) विशेष प्राप्ति अधिकार- एक नई हिसाबी मुद्रा - अंतरराष्ट्रीय तरलता में वृद्धि करने के लिए 1 जनवरी 1970 से इस योजना को आरंभ किया गया। एस.डी.आर. एक अंतरराष्ट्रीय रिजर्व मुद्रा है, जिसका प्रयोग स्वर्ण अथवा विदेशी मुद्राओं के सहायता के बिना अंतरराष्ट्रीय भुगतानों को निपटाने के लिए किया जा सकता है।

एस.डी. आर. के बदले परिवर्तनीय मुद्राओं को प्राप्त किया जा सकता है। एस.डी. आर. अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक व्यवस्था में स्वर्ण की भांति कार्य करता है। इसलिए इसे कागजी स्वर्ण भी कहा जाता है।


1 जनवरी, 1981 से अपनाई गई पद्धति के अनुसार एस.डी. आर का मूल्य 5 बड़े निर्यातक देशों की मुद्राओं की पिटारी के आधार पर निर्धारित किया जाता है। ये मुद्राएं है- (i) अमेरिकी डॉलर, (ii) जर्मनी मार्क, (iii) जापानी येन (iv) ब्रिटिश पौण्ड (v) फ्रांसीसी फ्रँक ।


वर्तमान स्थिति - अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष अपने सदस्यों के एस.डी.आर के कोटे का पुर्नरीक्षण कर रहा है। नया सूत्र अप्रैल 2008 में सभी सदस्यों के द्वारा मंजूर किया गया है। इससे भारत को निम्न लाभ प्राप्त हुए हैं


(i) भारत के कोटे का अंश 192 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.34 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे भारत का 184 देशों में 11वां स्थान होगा।


(ii) कोष में भारत के मत का भाग 1.88 प्रतिशत कर दिया गया हैं।