अंतरराष्ट्रीय संगठन - international organization

अंतरराष्ट्रीय संगठन - international organization


व्यापार को प्रोत्साहित तथा नियमित रखने के लिए विश्व व्यापार संगठन की 1995 में स्थापना की गई। इनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है 


(क) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष


भारत आई एम एफ का मौद्रिक सदस्य है जो अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक उद्योग में सहायक होता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संतुलित विकास प्रोत्साहित करता है भुगतान संतुलन के घाटे को ठीक करने में सहायक होता है तथा देश में विनिमय स्थिरता बनाने में लाभदायक सिद्ध होता है। 1981 में भारत ने आई.एम.एफ. से 5000 करोड़ का ऋण लिया, ताकि भुगतान असंतुलन की समस्या को दूर किया जा सके। वर्तमान समय में आई.एम.एफ ने भारत को कई प्रकार के आर्थिक नियंत्रण लगाने का सुझाव दिया है, ताकि भुगतान सन्तुलन के घाटे को ठीक किया जा सके। 


(ख) वर्ल्ड बैंक


यह संस्था आई.एम.एफ की सहयोगी है तथा संसार में उत्पादकीय ढंग से अंतरराष्ट्रीय निवेश करने के लिए सहायक होती है। यह युद्ध तथा अन्य प्राकृतिक संकटों से प्रभावित क्षेत्रों को पुनःस्थापित करने में सहायक होती है। यह संस्था निजी निवेशकर्ता को गारण्टी देकर, सदस्य देशों में निजी विदेशी निवेश को उत्साहित करती है। इस संस्था ने सदस्य देशों में से अति निर्धनता तथा गंदगी दूर करने के लिए कई प्रयत्न किए है। जून 1999 तक इस संस्था ने भारत को कुल 26 बिलियन डॉलर के ऋण दिए है। पर इस समय भारत को आई. एम.एफ से प्राप्त ऋणों की राशि शून्य है। 


(ग) अंतरराष्ट्रीय विकास संस्था


इसे 1960 में वर्ल्ड बैंक के सहयोगी के रूप में, दीर्घकालीन कम ब्याज दरों वाले ऋण देने के लिए स्थापित किया गया।

1999 में इसने सभी सदस्य देशों को 3060 करोड़ ऋण दिए, जिसमें भारत को 229 साख तथा 26 बिलियन डालर राशि प्राप्त हुई है। यह ऋण भारत को राष्ट्रीय सड़क निर्माण, ट्यूबवैल्ज, नालियों की स्थापना तथा ग्रामीण विद्युतीकरण आदि के विकास के लिए दिए गए।


(घ) अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग


इस संस्था को भी वर्ल्ड बैंक के सहयोगी के रूप में 1995 में स्थापित किया गया, ताकि निजी उद्यमों की सहायता से उत्पादकीय उद्यमों में निवेश किया जा सके। इसने भारत की 13 कंपनियों में 58 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। 


(ङ) एशियन विकास बैंक


इसकी एशियन तथा सदूर पूर्वी देशों में सार्वजनिक तथा निजी पूंजी द्वारा आर्थिक सहयोग उत्साहित करने के लिए स्थापना की गई। भारत इस संस्था का तीसरा बड़ा देश है जो सबसे अधिक चंदा 181 मिलियन डालर प्रदान करता है, पहले नंबर पर जापान तथा दूसरे पर चीन है। अभी हाल में इस संस्था ने भारत में सार्वजनिक निवेश के लिए ऋण प्रदान किए हैं।