अंतर्राष्ट्रीय संगठन / संस्थाएं - International Organizations/Institutions
अंतर्राष्ट्रीय संगठन / संस्थाएं - International Organizations/Institutions
वर्ष 1930 तक अंतरराष्ट्रीय भुगतानो में पक्ष किसी न किसी रूप में स्वर्णमान प्रचलित था। इस व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय व्यापार स्वर्ण मुद्रा या ऐसी मुदा जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से स्वर्ण में परिवर्तनशील हो, उसका प्रयोग किया जाता है। स्वर्णमान की कमियों के कारण इसे 1930 में अधिकतर देशों द्वारा बन्द कर दिया गया। स्वर्णमान के बन्द होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रिक्तता आ गई अधिकतर देशों ने यह अनुभव किया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भुगतान के लिए उन्हें ऐसी संस्था की आवश्यकता है जो विभिन्न देशों की मुद्रा में विनियम दर निर्धारित करे। ऐसे में 1944 में यह निर्णय लिया गया कि सभी देशों के आर्थिक विकास के लिए दो संस्थाएं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोप व विश्व बैंक की स्थापना की जाये। 1945 में IME तथा विश्व बैंक की स्थापना की गयी।
इसके कुछ वर्षों के बाद ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने में लिए 1947 में सीमा शुल्क और व्यापार पर सामान्य समझौते की शुरूआत की गई। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सीमा शुल्क कम करके स्वतंत्र बाजार को बढ़ावा देना था। 1995 में गैट (जनरल एग्रीमेंट ऑफ टैरिफ एण्ड ट्रेड) के स्थान पर विश्व व्यापार संगठन (आई. एम. एफ.) की स्थापना की गई। अल्पविकसित देशों में व्यापार और विकास को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 1964 में संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन की स्थापना की गई अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में निम्न मुख्य अंतरराष्ट्रीय संगठन कार्य कर रहे है।
(1) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोप की स्थापना 27 दिसम्बर, 1945 को हुई। IME की स्थापना USA में ब्रिटन वुड्स सम्मेलन में हुई। इसकी स्थापना विश्व व्यापार के सन्तुलित विकास अंतरराष्ट्रीय मौदिक सहयोग तथा सदस्य देशों के भुगतान शेप की अस्थायी असन्तुलन की समस्या को (2) साधारण सदस्य ।
ये सब देश जिनके प्रतिनिधियों ने ब्रिटन वुड्स सम्मेलन में भाग लिया था. कोप के मौलिक सदस्य कहलाते है जो सदस्य दिसम्बर 1945 के पश्चात बने है उन्हें साधारण सदस्य कहा जाता है। 1945 में फंड के 44 सदस्य थे अब इसके सदस्यों की संख्या बढ़ कर 188 हो गयी है।
(2) अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण तथा विकास बैंक / विश्व बैंक
अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण तथा विकास बैंक का उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के फलस्वरूप नष्ट होने वाली अर्थव्यवस्थाओं के पुनर्निर्माण तथा अल्पविकसित देशों के आर्थिक विकास के लिये पूंजी की व्यवस्था करना था। इस बैंक ने जून 1945 से अपना कार्य आरम्भ किया।
विश्व बैंक का उद्देश्य विभिन्न देशों को विकासत्मक कार्यों के लिए वित्त उपलब्ध करवाना तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि करना है। कोई भी देश जो मुद्रा कोप का सदस्य है वह विश्व बैंक का भी सदस्य स्वत ही बन जाता है। जिन देशों ने 31 दिसम्बर 1945 को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोप की सदस्यता स्वीकार कर ली थी ये सभी विश्व बैंक के मूल सदस्य मान जाते है। इस समय विश्व बैंक के 188 सदस्य देश है। कोई भी देश विश्व बैंक को सूचना देकर इसकी सदस्यता त्याग सकता है। यदि कोई देश विश्व बैंक के नियमों का पालन नहीं करता तो इसकी सदस्यता से हटाया जा सकता है।
(3) विश्व व्यापार संगठन
वर्ष 1947 में प्रशुल्क एवम् व्यापार संबंधी सामान्य करार शुरू किया गया। 1994 में ऊरूरये अधिवेशन में 124 गैट सदस्य देशों ने यह समझौता किया कि. विदेशी व्यापार को बढ़ावा देने के लिये टैरिफ में कमी की जाये तथा गैर टैरिफ बाधाओं को दूर किया जाये।
इस समझौते में तय किया गया कि गैट क स्थान पर एक नया संगठन बनाया जाये इस समझौते के परिणामस्वरूप गेट का स्थान विश्व व्यापार संगठन ने ले लिया । विश्व व्यापार संगठन ने 1 जनवरी 1995 से अपना कार्य शुरू किया। यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो बहुपक्षीय व्यापार को तथा स्वतन्त्र विश्व व्यापार को बढ़ावा देता है। इसके द्वारा टैरिफ बाधाओं में कमी व निर्यात प्रतिबंधों की समाप्ति पर जोर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य स्वतन्त्र विश्व व्यापार, निवेश को स्वतन्त्र प्रवाह, वस्तुओं व सेवाओं का सदस्य देशों के मध्य स्वतन्त्र व्यापार तथा बौद्धिक संपत्ति को पेटेन्ट द्वारा सुरक्षित करना है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोप IMP व विश्व बैंक के अलावा विश्व व्यापार संगठन WTO भी एक बहुत महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इस समय विश्व व्यापार संगठन के सदस्य 155 देश है।
4. संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (युंकटाड)
विकासशील देशों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए और विकास को तेज करने के लिए 1964 में युकटाड की स्थापना संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा की गई। अब तक युकटाड के 13 सम्मेलन हो चुके हैं। युकटाड के मुख्य उद्देश्य है.
(1) विकासशील देशों के आर्थिक विकास में वृद्धि,
(2) विकासशील देशों के निर्यात में बढ़ोत्तरी
(3) विकासशील देशों को विकास के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाना,
(4) अति अल्पविकसित देशों के विकास के लिए विशेष कार्यक्रम चलाना।
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