विज्ञापन का परिचय - Introduction to advertising

विज्ञापन का परिचय - Introduction to advertising


विज्ञापन दोहरा कार्य करता है


(i) विज्ञापन ही व्यक्तियों और वितरकों के मध्य संपर्क स्थापित करने के लिए प्रमुख साधन है, तथा व्यक्तियों को क्रय विक्रय के लिए प्रेरित करता है। 


(ii) विज्ञापन उपभोक्ताओं को माल या सेवा क्रय करने हेतु नौतिक रूप से आगे बढ़ने को बाध्य नहीं करता वरन क्रय करने के अनुरूप उनकी मानसिक स्थिति बनाता है।


(iii) निम्न स्थितियों में विज्ञापन उपभोक्ता की मानसिक स्थिति को माल कय करने हेतु प्रेरित करने में सहायक होता है।


(i) विज्ञापन द्वारा उपभोक्ता को माल के अस्तित्व की जानकारी मिलती है। 


(ii) विज्ञापन द्वारा उपभोक्ता की वस्तु या सेवा के लक्षण तथा उपयोगिता (गुण) समझ में आती हैं। अन्य शब्दों में इससे माता के गुण या उपयोगिता के प्रति उसमें विवेक जागृत होता है। फलस्वरुप वह वस्तु विशेष का क्रय करने के लिए आकर्षित होता है। 


(iii) परिवार या संस्थाओं में बाजार से संबंधित निर्णय लेने वाले व्यक्तियों को विज्ञापन इस तथ्य से परिचित कराता है कि माल के क्रय करने से उन्हें क्या वांछित परिणाम प्राप्त होगे।


विज्ञापन क्या कर सकता है और क्या नहीं कर सकता है इस तथ्य को 'दी डार्टनल विज्ञापन पुस्तिका में निम्न प्रकार से स्पष्ट किया गया है-