निवेश रूट की सीमाए - Investment Route Limits

निवेश रूट की सीमाए - Investment Route Limits


(क) प्राय: विकसित देश की बहुराष्ट्रीय कंपनिया विकासशील या अल्पविकसित देशों में अपनी सहायक कंपनियां स्थापित करती है, जिससे वहां की सस्ती श्रम लागत का लाभ उठाया जा सके। प्रारंभ में तो मेजबान देश की सरकार इन विदेशी कंपनियों को बहुत प्रोत्साहन देती है, क्योंकि इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों से मेजबान देश भी लाभान्वित होता है। परंतु जब देश की अपनी अर्थव्यवस्था विकसित होने लगती है, तो मेजबान देश की सरकार का इन विदेशी कंपनियों के प्रति दृष्टिकोण सख्त व नकारात्मक होने लगता है इन पर बहुत से प्रतिबंध लगा दिए जाते है मेजबान देश की सरकार इन्हें समय-समय पर विस्तृत सूचनाएं व जानकारी देने को कहती है। 


(ख) कई बार मेजबान देश की स्थानीय जनता व सामाजिक संगठन भी इन विदेशी कंपनियों के विरूद्ध आवाज उठाने लगते है।

इससे इनके व्यावसायिक कार्यों में बाधा उत्पन्न होने लगती है। इससे मेजबान देश में सहायक कंपनी की स्थिति बहुत खराब हो जाती है। 


(ग) सहायक कंपनी मेजबान देश में रोजगार सृजन करती है न कि मूल देश में इससे मेजबान देश में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है वहा उत्पादन कियाओं, रोजगार सृजन, निर्यात आदि को बढ़ावा मिलता है भुगतान शेष स्थिति में सुधार होता है। जबकि व्यापार रूट में उत्पादन कियाए मूल देश में होती है। रोजगार अवसर भी मूल देश में ही बढ़ते है निर्यात भी मूल देश के ही बढ़ते हैं।