इशिकावा आरेख - Ishikawa Diagrams

इशिकावा आरेख - Ishikawa Diagrams


इशिकावा आरेख, जिसे हेरींगबोनन आरेख (Herringbone diagram), फिशबोन आरेख (Fishbone diagram), कारण प्रभाव आरेख (Cause and effect diagram) तथा फिशिकावा नामों से भी जाना जाता है, मूलतः कारणत्व (causal) आरेख होते हैं जो किसी घटना / तथ्य विशेष के कारणों को प्रदर्शित करते हैं। इसे काओरो इशिकावा द्वारा 1990 में विकसित किया गया था। सामान्यतः इसका उपयोग उत्पाद प्रारूप (product design), समग्र प्रभाव उत्पन्न करने वाले संभावित कारकों की पहचान करने तथा non conformances के मुख्य कारणों का पता लगाने के लिए किया जाता है।


इशिकावा आरेख को सर्वप्रथम 1960 में काओरो इशिकावा द्वारा प्रस्तावित किया गया था, जिन्होंने कावासाकी शिपयार्ड में गुणवत्ता प्रबंधन प्रक्रिया का प्रारंभ किया था तथा इस प्रक्रिया के द्वारा उनका नाम आधुनिक प्रबंधन के प्रणेताओं में शामिल हो गए।

इशिकावा आरेख को हिस्टोग्राम (histogram), पैरीटो चार्ट (Pareto chart), चेक शीट (Check sheet), नियंत्रण चार्ट (Control chart), प्रवाह चार्ट (Flowchart) तथा स्कैटर आरेख (Scatter diagram) के साथ गुणवत्ता प्रबंधन (Quality management) के सात मौलिक उपकरणों (7 basic tools) में से एक माना जाता है।


इशिकावा आरेख में कारण, कुछ विशिष्ट कारणों के समूह पर आधारित होते हैं, जैसे- 6 एम (6 Ms)| यह कारण- प्रभाव आरेख, विभिन्न कारकों के बीच मुख्य संबंधों को उद्धृत कर सकते हैं, तथा संभावित कारण प्रक्रिया व्यवहार में अतिरिक्त ज्ञान अतवा अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकते हैं।


एक सामान्य इशिकावा आरेख में कारणों को विभिन्न समूहों के अंतर्गत विभाजित किया जाता है, जिनमें से कुछ मुख्य समूह इस प्रकार हैं: 4 पी 

6 एम (Ms)- व्यक्ति (Men), यंत्र (Machines), विधि (Methods), सामग्री (Materials), मापन (Measures), मुख्य स्वभाव (Mother nature )


4 पी (Ps) स्थान (Places), प्रक्रियाएं (Procedures ), लोग (People), राजनीति (Politics) 4 एस ( Ss)- परिवेश (Surroundings), आपूर्तिकर्ता (Suppliers ), प्रणाली / तंत्र ( System), कौशल (Skills)


कारणों की उत्पत्ति बुद्धिशीलता सत्र से प्राप्त होनी चाहिए। तत्पश्चात समानता समूह के आधार पर छांटना चाहिए जिससे एक जैसे विचारों को एक साथ रखा जा सके। तब इन समूहों को फिशबोन श्रेणियों के रूप में चिह्नित किया जाना चाहिए। विशेष रूप से वह उपरोक्त उल्लिखित परंपरागत श्रेणियों में से एक होंगी, किन्तु इस उपकरण के प्रयुक्त होने से वह कुछ अलग एवं अनोखी भी हो सकती है। कारणों को विशिष्ट, नियंत्रण योग्य एवं मापन योग्य होना चाहिए।