पोजीशनिंग व्यूहरचना के प्रमुख बिंदु / चरण - Key Points/Steps of Positioning Strategy
पोजीशनिंग व्यूहरचना के प्रमुख बिंदु / चरण - Key Points/Steps of Positioning Strategy
उपरोक्त एस. टी. पी. के साथ विभिन्न विपणन व्यूहरचना के निर्माण तथा चयन में भी विपणन अनुसंधान का उपयोग किया जाता है। कुछ प्रमुख विपणन व्यूहरचनाएं निम्नलिखित है-
(i) बाजार नेता व्यूहरचना वर्तमान ग्लोबल विपणन एवं प्रतिस्पर्धा के युग में एक संगठन के लिए बाजार नेता बनना सरल कार्य नहीं है। ऐसा संगठन का संबंधित उत्पाद बाजार में सबसे अधिक बाजार भाग होता है तथा कीमत परिवर्तन के संबंध में इसकी प्रमुख भूमिका होती है।
ऐसा संगठन निम्न तीन प्यूहरचनाएं अपना सकती है-
क. समय बाजार माग
ख. बेहतर आक्रामक तथा सुरक्षात्मक कार्यवाही करना
ग बाजार मांग को बढ़ाना।
समग्र बाजार के विस्तार हेतु संगठन नये प्रयोक्ता, नये प्रयोगों तथ उत्पाद के अनेक उपयोगों को बतलाने की व्यूहरचना अपना सकता है।
सुरक्षात्मक व्यूहरचना के तहत संगठन बेहतर ब्राण्ड शक्ति का निर्माण तथा ब्राण्ड को अजेय बना सकता है, पार्श्व सुरक्षा का मार्ग अपना सकता है, या फिर प्रतिस्पर्धियों द्वारा आक्रमण करने से पूर्व ही सुरक्षात्मक कदम उठा सकता है।
बाजार नेता अपने बाजार भाग को बढ़ाने के द्वारा अपनी लाभदायकता में सुधार कर सकता है।
(ii) बाजार चैलेंजर व्यूहरचना ऐसे संगठन जो उद्योगों में दूसरे, तीसरे या बाद वाले स्थान पर रहता है, बाजार चैलेंजर कहा जाता है। ऐसे संगठन बाजार नेता तथा अन्य प्रतिस्पर्धियों पर आक्रमण कर सकता है तथा अपने बाजार भाग को बढाते हुए उद्योग में अपनी बेहतर स्थिति कर सकता है। ऐसे संगठन निम्न पाच आक्रमण व्यहरचनाओं को अपना सकता है-
(a) सामने से आक्रमण इस व्यूहरचना का उपयोग तब किया जाता है जब आक्रमण करने वाले सगठन का उत्पाद कीमत आदि 'बाजार नेता संगठन के समान होता है।
(b) पार्श्व आक्रमण - इसमें संगठन अपने लक्षित कमजोरियों को दूर करते हुए पार्श्व आक्रमण करती है। -
(c) घेराबंदी आक्रमण इस ब्यूहरचना का उपयोग केवल उन संगठनों के द्वारा किया जाता है जिसके पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन है। इसमें संगठन विभिन्न मुद्दों पर व्यापक आक्रमण करती है तथा प्रतिस्पर्धी का हराने का प्रयास करता है।
(d) सहायक आक्रमण प्रयास किया जाता है। इस प्यूहरचना में प्रतिस्पर्धियों पर अप्रत्यक्ष रूप से आक्रमण किया जाता है तथा उसके सरल बाजारों में स्थापित होने का
(e) गुरिल्ला आक्रमण - इसमें प्रतिस्पर्धियों के विभिन्न क्षेत्रों पर छोटे रूप में तथा एक-एक कर आक्रमण किया जाता है। कोटलर का मत है कि बाजार चैलेंजर को उपरोक्त पाची व्यूहरचनाओं से परे जाना चाहिए तथा निम्न विशिष्ट व्यूहरचनाएं विकसित करनी चाहिए-
• कीमत छूट
• निम्न कीमत माल
• प्रतिष्ठित माल
• उत्पाद प्रचुरोदभव
• उत्पाद नवाचार
• बेहतर सेवाएं
• वितरण नवाचार
• निर्माण लागत में कमी
• गहन विज्ञापन संवर्धन
(iii) बाजार अनुयायी व्यूहरचना अनेक संगठन बाजार नेता को चुनौती देने की बजाय उसको अनुसरण करने की व्यूहरचना अपनाता है ऐसे संगठन
इस बात को बेहतर रूप में जानते हैं कि वर्तमान ग्राहकों को किस प्रकार बनाए रखा जा सकता है तथा नये ग्राहकों का उचित भाग किस प्रकार जीता जा सकता है। ऐसे संगठन निम्न व्यूहरचनाएं अपना सकता है-
(a) सामना इसमें संगठन बाजार नेता के उत्पादों का डुप्लीकेट बनाती है तथा उसी रूप में पैकिंग कर उन्हें बेचता है।
(b) कलोनर इसमें संगठन बाजार नेता के उत्पाद, नाम, पैकिंग आदि में मामूली परिवर्तन करके अपने उत्पाद को बाजार में प्रस्तुत करता है।
(c) नकलची इसमें संगठन बाजार नेता के उत्पादों की नकल करता है. लेकिन पैकेजिंग, विज्ञापन, कीमत स्थान आदि में विभिन्नता बनाये रखते हैं।
बाजार नेता के इस कार्य को बुरा नहीं मानता है क्योंकि दीर्घकाल में ऐसे संगठन बाजार नेता पर आक्रमण नहीं कर सकते।
(d) बाजार निचर व्यूहरचना इसमें एक संगठन किसी बड़े बाजार का नेता बनने की बजाए उसके भाग या छोटे बाजार में अपने उत्पाद को प्रस्तुत करने की व्यूहरचना अपनाता है। ऐसे संगठन बाजार विशेषज्ञ के रूप में अपनी पहचान बनाने हेतु निर्दिष्ट चातुर्यो को निम्न रूप में विकसित करते हैं
(i) वाहिका विशेषज्ञ
(ii) सेवा विशेषज्ञ
(iii) उत्पाद लक्षण विशेषज्ञ
(iv) उत्पाद रेखा विशेषज्ञ
(v) भौगोलिक विशेषश, आदि।
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