स्वीकृति के लिए कानूनी नियम - legal rules for acceptance
स्वीकृति के लिए कानूनी नियम - legal rules for acceptance
1. स्वीकृति पूर्ण तथा बिना शर्त होनी चाहिए स्वीकृति हमेशा किये गए प्रस्ताव के प्रति पूर्ण एवं बिना किसी शर्त के होना चाहिए। स्वीकृति प्रस्ताव में दिये गए सभी शर्तों को पूर्ण रूप से स्वीकार कर ही होना चाहिए। कोई भी स्वीकर्ता किसी प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए अगर कोई शर्त रखता है तो उसे वैध नहीं माना जायेगा।
ii. स्वीकृति सूचित किया जाना चाहिए प्रस्ताव की तरह स्वीकृति को भी सूचित किया जाना चाहिए। केवल मानसिक स्वीकृति, जो शब्दों अथवा आचरण द्वारा स्पष्ट न हो, कानून से, स्वीकृति नहीं कहलाता है। प्रस्ताव मिलने पर अगर प्रस्ताव प्राप्त करने वाला मौन रह जाता है तो उसे गर्भित स्वीकृति नहीं माना जा सकता है।
iii. स्वीकृति प्रस्ताव में निश्चित विधि के अनुरूप होना चाहिए यदि प्रस्ताव में प्रस्तावक ने उसकी स्वीकृति के लिए कोई विधि निश्चित की हो तो प्रस्ताव की स्वीकृति उसी विधि से होना चाहिए। ऐसा न होने पर स्वीकृत प्रस्ताव को वैध नहीं माना जायेगा।
iv. निश्चित विधि के आभाव में उचित विधि से स्वीकृति यदि प्रस्तावक के द्वारा प्रस्ताव की - स्वीकृति के लिए कोई विधि न राखी गई हो तो प्रस्ताव की स्वीकृति किसी भी उचित विधि द्वारा किया जा सकता है। यह उचित विधि परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
V. निर्धारित समय में स्वीकृति प्रस्ताव की स्वीकृति प्रस्तावक द्वारा दिये गए निश्चित समयाविधि में ही होना चाहिए ।
यदि निश्चित समय में स्वीकृति प्रदान नहीं की जाती है तो प्रस्ताव की समाप्ति हो जाती है। बाद में पुनः प्रस्ताव करने पर ही उसकी स्वीकृति दी जा सकती है।
vi. निर्धारित समय के आभाव में उचित समय में स्वीकृति प्रस्ताव की स्वीकृति के लिए यदि प्रस्तावक द्वारा अगर समय निर्धारित न किया गया हो तो उसकी स्वीकृति उचित समय में होना चाहिए। उचित समय एक सापेक्षिक शब्द है जो समय और परिस्थिति के अनुसार बदलता रहता है। उचित समय व्यतीत हो जाने पर दी गई स्वीकृति का कोई महत्व नहीं रहता है।
vii. स्वीकृति केवल उसी व्यक्ति द्वारा होनी चाहिए जिससे प्रस्ताव किया गया हो स्वीकृति केवल उसी व्यक्ति के द्वारा होना च्चिये जिसे प्रस्तावक ने प्रस्ताव दिया हो अर्थात् अन्य व्यक्ति स्वीकार नहीं कर सकता है।
viii. स्वीकारक को प्रस्ताव की जानकारी होनी चाहिए प्रस्तावक द्वारा किये गए प्रस्ताव की जानकारी स्वीकारक को होनी चाहिए, अन्यथा स्वीकृति का प्रश्न ही नहीं उठता। ऐसी स्थिति में बिना स्वीकृति के ठहराव नहीं हो सकता और बिना ठहराव के अनुबंध हो ही नहीं सकता।
ix स्वीकृति का संवहन प्रस्ताव की भांति स्वीकृति का भी संवहन आवश्यक है। बिना संवहन के स्वीकृति वैध नहीं होता । केवल मानसिक स्वीकृति, जो शब्दों अथवा आचरण द्वारा स्पष्ट न हो, कानून से स्वीकृति नहीं कहलाती है। स्वीकारक द्वारा दी गई स्वीकृति का प्रस्तावक को सूचित करना अनिवार्य है।
X. एक बार अस्वीकृत प्रस्ताव की स्वीकृति पुनः प्रस्ताव किये जाने पर ही संभव स्वीकारक द्वारा यदि किसी प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया जय तो वह अवैध हो जाता है। यदि स्वीकारक उस प्रस्ताव को पुनः स्वीकृत करना चाहता है तो यह तभी संभव है यदि प्रस्तावक द्वारा उसे पुनः प्रस्तावित किया जाय।
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