मानव संसाधन नियोजन की सीमाएं - Limitations of Human Resource Planning
मानव संसाधन नियोजन की सीमाएं - Limitations of Human Resource Planning
मानव संसाधन नियोजन से कर्मचारी, संगठन, समाज और राष्ट्र को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं, किंतु ये लाभ पूरी तरह प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं, क्योंकि मानव संसाधन नियोजन के मार्ग में अनेक सीमाएं हैं। ये निम्नानुसार है -
1. उच्च प्रबंधन के सहयोग की कमी उच्च स्तर के प्रबंधन का पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने पर मानव संसाधन नियोजन विकसित करने में परेशानी आती है। कभी-कभी धैर्य की कमी से भी प्रक्रिया की गति मंद पड़ जाती है। कभी प्रतिस्पर्धा की होड़ में नीतियाँ जबरदस्ती लागू की जाती हैं।
2. कर्मचारी प्रतिरोध कर्मचारी एवं ट्रेड यूनियन सदैव मानव संसाधन नियोजन का विरोध करते हैं।
वे मानते हैं कि इससे उनका काम का बोझ बढ़ जाएगा। बेरोजगारी के कारण जैसे भी जहाँ भी जरुरी हो उसके अनुसार लोग काम हेतु मिल जाते हैं। वे मानव संसाधन नियोजन को ठीक से नहीं समझ पाते हैं, इसलिए इसका विरोध करते हैं।
3. अनिश्चितता - श्रमिकों की अनुपस्थिति काम छोड़ कर चले जाना, मौसमी रोजगार, प्रौद्योगिकी परिवर्तन तथा बाजार के उतार चढ़ाव अनिश्चित रहते हैं। ये मानव संसाधन नियोजन में बाधक बनते है। वातावरण में तेजी से होने वाले बदलाव के संदर्भ में मानव शक्ति को लेकर सामान्य अनुमान लगा लेना जोखिमपूर्ण है।
4 ज्यादा समय लेने वाली तथा खर्चीली - मानव शक्ति नियोजन ज्यादा समय भी लेती है एवं खर्चीली प्रक्रिया भी है। आवश्यक आंकड़े तथ्य आदि का संकलन करने में समय एव पैसा खर्च होता है।
5. यथार्थ से दूर यह प्रक्रिया मानव संसाधन की माँग एवं पूर्ति के संबंध में भविष्य कथन करती है और भविष्य कथन कभी 100 प्रतिशत सच नहीं हो पाते जितने ज्यादा समय की योजना होगी उसमें यथार्थता की उतनी ही कम संभावना हो जाएगी। यह उस समय और बढ़ जाती है जब भविष्य कथन उचित समीक्षा के बिना ही अंदाज के आधार पर किए गए हो।
यद्यपि उपयुक्त सीमाओं को दूर करने का प्रयास किया गया है, लेकिन अभी भी कुछ कमियाँ विद्यमान है, जो प्रभावी संसाधन नियोजन में बाधक है।
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