विपणन अनुसंधान की सीमाएं - Limitations of Marketing Research

विपणन अनुसंधान की सीमाएं - Limitations of Marketing Research


विपणन अनुसंधान विपणन प्रबंधक की सब समस्याओं के लिए कोई रामबाण औषधी नहीं है। इसका सही उपयोग विपणन प्रबंधक को सुदृढ़ निर्णय लेने में सहायता करता है किन्तु फिर भी यह तकनीकी बाधाओं या सीमाओं से मुक्त नहीं है विपणन अनुसंधान की प्रमुख सीमाएं निम्नलिखित


(i) समय की समस्या - विपणन अनुसंधान की प्रक्रिया में कम समय लगता है जबकि कई विपणन निर्णय इस प्रकार के होते है जिनमें शीघ्र निर्णय लिये जाने की आवश्यकता होती है और परिणामत अनुसंधान का प्रयोग सम्भव नही हो पाता है। अनुसंधान कई महीनों में पूरा होता है, जिससे एक धैर्यहीन प्रबंधक भी परेशान हो जाता है तथा वह अनुसंधानकर्ता से छोटा रास्ता अपनाने के लिए कहता है। इसके फलस्वरूप परिणाम और भी भ्रमात्मक तथा खतरनाक हो सकते हैं। 


(ii) योग्य अनुसंधानकर्ताओं की कमी - विपणन अनुसंधान के कार्य के लिए तथा कुशल अनुसंधानकर्ताओं की आवश्यकता होती है। दुर्भाग्यवश बहुत कम व्यक्ति इस महत्वपूर्ण काम को करने के लिए मिल पाते हैं, और परिणामतः कम्पनी के अयोग्य व्यक्ति ही इस काम के के लिए भर्ती करने पड़ते हैं, या फिर यह काम कार्यरत व्यक्तियों के जिम्मे सौंप दिया जाता है जो इस विषय में बहुत कम जानते हैं।


(iii) अधिक लागत - विपणन अनुसंधान के लिए उक्त प्रशिक्षित व्यक्ति तथा पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है। इसलिए इसे हाथ में लेने के लिए कंपनी को इसकी लागत के रूप में काफी राशि व्यय करनी होती है। यदि खर्च करने में जरा भी कजूसी की जाती है तो सम्पूर्ण विपणन अनुसंधान प्रयत्न बेकार हो जाता है।


(iv) पूर्ण शुद्धता की कमी - विपणन अनुसंधान की यह भी एक महत्वपूर्ण सीमा है कि विपणन अनुसंधानकर्ता पूर्ण शुद्धता के साथ परिणामों की घोषणा नही कर सकता है। बदलते हुए बाजारों में प्रचलित विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों में शुद्ध समक प्राप्त करना एक कठिन कार्य है। अतः एक विपणन प्रबंधक को अनुसंधान परिणामों के साथ-साथ कुछ अनुमानों पर निर्भर रहना पड़ता है।


(v) विपणन अनुसंधान संबंधी जानकारी की कमी - विपणन अनुसंधान संबंधी पर्याप्त ज्ञान की कमी भी इसकी एक महत्वपूर्ण सीमा है। इस संदर्भ में उल्लेखनीय तथ्य यह है

कि अमेरिका जैसे विकसित देशों में विपणन अनुसंधान का तेजी से विकास 1945 के बाद हुआ है। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि अन्य राष्ट्रो, विशेषतः विकासशील राष्ट्रों में विपणन अनुसंधान के बारे में ज्ञान या जानकारी की क्या स्थिति होगा। अन्य शब्दों में विपणन अनुसंधान संबंधी सीमित ज्ञान विकास के कारण इसका प्रयोग क्षेत्र भी बहुत ही सीमित रहा है। आज भी अनेक अधिशासी ऐसे हैं जो इसके महत्व की संदेह की दृष्टि से देखता है। उनकी इस धारणा को अनुसंधानकर्ता दूर नहीं कर पाये हैं।


(vi) जटिल मूल्यांकन - विपणन अनुसंधान से प्राप्त परिणामों का कितना आर्थिक लाभ हुआ, इसका मूल्यांकन करना भी अत्याधिक जटिल कार्य होता है।