दीर्घकालीन औसत लागत वक्र , स्वरूप - long run average cost curve
दीर्घकालीन औसत लागत वक्र , स्वरूप - long run average cost curve
(Long-run Average Cost Curve)- दीर्घकालीन कुल लागत में उत्पादित इकाईयों का भाग देने पर जो परिणाम प्राप्त होता है उसे ही दीर्घकालीन औसत लागत कहते हैं। जैसा कि हम परिभाषाओं का अध्ययन करते समय देख चुके हैं कि दीर्घकाल में उत्पादक फर्म अपने सभी उत्पादन साधनों में परिवर्तन कर सकती है, अतः फर्म का अल्पकालीन लागत वक्र भी परिवर्तित हो जाता है। इस प्रकार से प्रत्येक बार अलग तरह का लागत वक्र बनेगा।
दीर्घकालीन औसत लागत वक्र के अन्य स्वरूप
व्यवहार में दीर्घकालीन औसत लागत वक्र अधिक समतल एवं नियमित होते हैं लेकिन कभी-कभी इस वक्र के अन्य स्वरूप भी हो सकते हैं। यहाँ तीन अन्य स्वरूपों का वर्णन किया गया हैं, जो निम्न हैं
(a) क्षैतिज वक्र के रूप में
(b) बहुत कम उत्पादन पर अनुकूलतम स्तर वाला।
(c) बहुत अधिक उत्पादन करने पर अनुकुलतम बिन्दु प्राप्त होने वाला ।
(a) क्षैतिज वक्र के रूप में निम्न चित्र 3 में क्षैतिज वक्र वाली दीर्घकालीन औसत लागत वक्र रेखा दिखायी गई है। यहाँ यह एक सरल क्षैतिज रेखा है जो यह बताती है कि उत्पादन के पैमाने को बढ़ाने पर स्थिर पैमाने का प्रतिफल नियम लागू होगा।
(b) बहुत कम उत्पादन पर अनुकुलतम स्तर वाला औसत आगम वक्र- अग्र वित्र संख्या 4 में एक ऐसा दीर्घकालीन औसत लागत वक्र दिखाया गया है जो बहुत कम उत्पादन पर अनुकूलतम उत्पादन स्तर प्राप्त कर लेता है।
(c) बहुत अधिक उत्पादन करने पर अनुकूलतम बिन्दु प्राप्त करने वाला - चित्र संख्या 5 में एक ऐसा दीर्घकालीन औसत लागत वक्र है जिसका अनुकुलतम उत्पादन स्तर का बिन्दु बहुत अधिक उत्पादन करने पर प्राप्त होता है
वार्तालाप में शामिल हों