योजना अवधि में भारत में औद्योगिक विकास की प्रमुख उपलब्धियां - Major achievements of industrial development in India during the plan period

योजना अवधि में भारत में औद्योगिक विकास की प्रमुख उपलब्धियां - Major achievements of industrial development in India during the plan period


नियोजन काल के दौरान भारत के औद्योगिक क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धिया निम्नलिखित है -


(i) सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार नियोजन काल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगो का विकास एवं विस्तार है। सन 1951 में केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र में केवल 5 उद्योग थे और इनमें 29 करोड़ रु. की पूजी विनियोजित थी, लेकिन आज इस प्रकार के उद्योगों की संख्या 242 है, जिनमें 4,21,089 करोड रू. की पूजी विनियोजित है।


(ii) संरचनात्मक आधार नियोजन काल में आधारभूत संरचना के निर्माण के लिए विशेष प्रयत्न किए गए हैं। इसमें जल-विद्युत, परिवहन एवं संचार सेवाओं का विस्तार किया गया है,

जिसमें औद्योगिक विकास में बाधा उत्पन्न न हो। जल एवं वायु परिवहन, डाक-तार सेवा, टेलीफोन सेवा आदि का काफी विस्तार किया गया है। खनिज तेल एवं कोयले के उत्पादन में काफी वृद्धि की गई है। वर्तमान समय में इस क्षेत्र का विकास सबसे तीव्र गति से हो रहा है।


(iii) संतुलित औद्योगिक विकास नियोजन से पूर्व उपभोक्ता उद्योगों की प्रधानता रहीं, जिनमें सूती वस्त्र, जूट, चीनी, कपड़ा आदि मुख्य थे, लेकिन नियोजन काल में आधारभूत उद्योगों की स्थापना को प्रधानता दी गई, जिसके अनुसार लोहा एवं इस्पात, सीमेंट, भारी मशीनें एवं औजार, विद्युत मशीनें, उर्वरक, पेट्रो रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, जलयान एवं वायुयान निर्माण, मोटर, स्कूटर आदि उद्योगों को स्थापित किया गया। इससे देश का औद्योगिक विकास संतुलित हो गया।


(iv) विदेशी सहायता से स्थापित इस काल की एक विशेषता यह रही है कि इसमें विदेशी सहायता से स्थापित उपक्रमों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। सन 1957 में भारत में 81 विदेशी उपक्रम थे, लेकिन आज इनकी संख्या 18,000 के लगभग है। राउरकेला, दुर्गापुर, भिलाई, बोकारो आदि इस्पात कारखानों की स्थापना विदेशी सहायता का ही परिणाम है।


(v) विदेशी तकनीकी सहयोग:- भारत के औद्योगिक विकास में विदेशी तकनीकी संस्थाओं का भारी योगदान रहा है। प्रस्तावित योजनाओं की जांच-पड़ताल, प्रतिवेदनों, संयन्त्रों एवं मशीनों की पूर्ति, भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों को प्रशिक्षण आदि कार्यों में इन विदेशी संस्थाओं ने भारी सहयोग किया है। 


(vi) औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि - नियोजन काल में औद्योगिक उत्पादन कई गुना बढ़ा है, जैसे गत 57 वर्षों में (1950-51 से 2007-08) उत्पादन तैयार इस्पात का 31 गुना, सीमेंट का 36 गुना, कागज का 25 गुना, साइकिलों का 110 गुना मशीनी औजारों को 4,838 गुना व नाइट्रोजन खाद का 1,113 गुना बढ़ा है।


(vii) औद्योगिक वस्तुओं के निर्यात में वृद्धि औद्योगिकरण होने से निर्यात व्यापार में वृद्धि हुई है। भारत ऐसी मशीनों एवं इजीनियरिंग सामान का निर्यात करने लगा है जो वह पहले कभी नहीं करता था। भारत सिलाई मशीनें, बिजली के पंखे, स्कूटर, साइकिलें, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण व विद्युत उपकरणों का निर्यात करने लगा है। उद्योगों का निर्यात में योगदान लगभग 45 प्रतिशत है ।


(viii) लघु तथा कुटीर उद्योगों का विकास - सन 1951 से योजनाकाल में लघु तथा कुटीर उद्योगों को काफी विकास हुआ है। उदाहरण के लिए, लघु औद्योगिक इकाइयों की संख्या जो 1951 में 42 लाख थी वह 2014-15 में 119 लाख हो गई। इन उद्योगों के उत्पादन का मूल्य सन् 2006-07 में 7,42,021 लाख करोड़ रु. था। इन उद्योगों ने 2013-14 में लगभग 210 लाख लोगों को रोजगार दिया ।


(ix) आयात का प्रतिस्थापन:- निर्यात से पूर्व भारत को अनेक प्रकार की मशीनरी व कई प्रकार की वस्तुओं का आयात करना पड़ता था, जिससे विदेशी मुद्रा कोष पर भारी दबाव बना रहता था। नियोजन काल में आयात प्रतिस्थापन की नीति अपनाने के कारण आयातों पर निर्भरता बहुत कम हो गई है या उन वस्तुओं के आयात समाप्त कर दिए गए हैं। भारत पहले साइकिलें आयात करता था, लेकिन अब इसका निर्यात करता है।

इसी प्रकार चीनी मिल व टैक्सटाइल मशीनरी, सोडा ऐश, एल्यूमीनियम, कॉस्टिक सोडा आदि का आयात नाममात्र का रह गया है।


(x) सकल घरेलू उत्पाद में उद्योगों का अंशदान भारत की जी.डी.पी. में उद्योगों का प्रतिशत अंशदान बढ़ा है। यह 1951-52 में 17 प्रतिशत से बढ़कर 2014-15 में 26 प्रतिशत हो गया। 


(xi) सुदृढ़ औद्योगिक ढांचा नियोजन काल में औद्योगिक ढांचा काफी सुदृढ़ हो गया है। आधारभूत और पूजीगत उद्योगों के उत्पादन में तेजी से वृद्धि हुई। उदाहरण के लिए तैयार इस्पात के उत्पादन में 31 गुना वृद्धि हुई है। भारत मे केवल औद्योगिक उत्पादन में ही वृद्धि नहीं हुई है, अपितु इसका आधार भी विस्तृत हुआ है। औद्योगिक उत्पादन में विविधता आई है। भारत के आधुनिक उद्योग अब विविध वस्तुओं के उत्पादन करने लगे है, जैसे- पेट्रोलियम, उर्वरक, मशीनें, इलेक्ट्रॉनिक्स, परिवहन उपकरण आदि।