विज्ञापन अनुसंधान की इस विधि के प्रमुख दोष - Major drawbacks of this method of advertising research
विज्ञापन अनुसंधान की इस विधि के प्रमुख दोष - Major drawbacks of this method of advertising research
• यह मान्यता, कि उत्तरदाता एक विज्ञापन को तो पसंद करता ही है, सही नहीं है
• अकन गैर- महत्वपूर्ण तथ्या एवं विवरणों पर आधारित हो सकता है।
• केवल चेतन अंकन प्राप्त किये जा सकते हैं।
(iii) यांत्रिक युक्ति इन युक्तियों से यह ज्ञात किया जाता है कि दर्शक या श्रोता की आखों तथा भावनाओं में विज्ञापन के प्रति कैसी प्रतिक्रिया होती है। अन्य शब्दों में इस विधि द्वारा विज्ञापन के प्रति अनुकूल एवं प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं का पता लगाया जाता है। इसमें निम्न विधिया प्रयुक्त की जाती है-
1234(अ) इलेक्ट्रानिक स्केल इसमें दर्शक या ओता अपनी इच्छा या अनिच्छा के अनुसार यत्र के दाये या बायें घुमाता है जिससे उसकी प्रतिक्रिया नोट हो जाती है।
(ब) परसेप्टोस्कोप
इस यंत्र की सहायता से यह ज्ञात किया जाता है कि विज्ञापन का क्षेत्र अथवा पोस्टर कितना मनोरंजक है। यंत्र आंख की पुतली होने वाले परिवर्तनों को नापता रहता है तो पुतली का आकार बढ़ जाता है, परन्तु जब चित्र ऐसा नहीं होता तो आकार कम हो जाता है।
(स) साइको गैल्वेनोमीटर इस यंत्र की सहायता से उत्तरदाता श्रोता के रक्त दबाव में होने वाले परिवर्तनों को नोट किया जाता है
ताकि विज्ञापन के प्रति उसकी इच्छा या अनिच्छा का पता लगाया जा सके अन्य शब्दों में इस यंत्र की सहायता से विज्ञापन के कारण किसी व्यक्ति की भावनाओं में होने वाले परिवर्तन ज्ञात किये जाते है इसकी सहायता से हथेली में पसीने की मात्रा को मापा जाता है। यदि विज्ञापन देखते या सुनते समय पसीने की मात्रा 1 बढ़ जाती है तो विज्ञापन में भावुक्ता का तत्व अधिक होता है।
(द) टैक्टिस्टास्कोप यह यंत्र विज्ञापन की विभिन्न विशेषताओं पर समय एवं मात्रा के संदर्भ में प्रकाश डालता है अन्य शब्दों में इस यंत्र की सहायता से यह ज्ञात किया जाता है कि किसी विज्ञापन की विषय सामग्री को याद करने में कितना समय लगता है, जैसे उस माल को पहचानने में जिसका विज्ञापन किया गया था, माल के लक्षण बताने में विज्ञापन का शीर्षक दोहराने में आदि।
(य) आई मूवमेंट कैमरा यह कैमरा विज्ञापन से संबंधित पृष्ठ या चित्रों के प्रति आंखों की गति को अंकित करके यह बताता है कि विज्ञापन वाले पृष्ठ या चित्र का कौनसा भाग सबसे पहले देखा गया तथा विज्ञापन को कितने समय तक देखा गया। यात्रिक विधियों का उपयोग उन क्षेत्रों में विशेष उपयोगी होता है जहां दर्शक या श्रोता विज्ञापन के विषय पर बातचीत करने में संकोच करता है या ऐसा करने के लिए वह अनिच्छुक होता है, जैसे महिलाओं के स्वास्थ्य से संबंधित वस्तुओं, शरीर की गंध सुरक्षा आदि के विषय ।
(iv) बाजार परीक्षण - इस विधि के अंतर्गत एक या अधिक परीक्षण बाजारों में विज्ञापन करके टेलीफोन या साक्षात्कार से यह ज्ञात किया जाता है कि कितने व्यक्तियों ने विज्ञापन देखा या सुना था उन्होंने ऐसा कहा किस समय तथा कितनी बार किया तथा विज्ञापित उत्पाद या सेवा को क्रय करने के प्रति ये किस सीमा तक प्रेरित हुए।
बाजार परीक्षण विधि उपभोक्ता समिति पद्धति से भिन्न है, क्योंकि समिति के अंतर्गत सदस्यों को विज्ञापन प्रयोगशाला जैसी स्थिति में बताया जाता है जबकि बाजार परीक्षण वास्तविक स्थिति में किया गया है।
(ख) विज्ञापन करने के समय विज्ञापन अनुसंधान यह विधिया मुख्यत रेडियो या टेलीविजन द्वारा किये गये विज्ञापन के लिये उपयुक्त है।
(i) समकालीन टेलीफोन इसके अंतर्गत विज्ञापन होते समय कुछ चुने हुए व्यक्तियों से टेलीफोन पर यह ज्ञात किया जाता है कि वे कार्यक्रम का कौनसा विज्ञापन देख या सुन रहे है कितने व्यक्ति उनके साथ हैं उन व्यक्तियों की आयु कितनी है. विज्ञापित उत्पाद या सेवा का व्यापार चिन्ह क्या है. आदि।
(ii) स्वयंचालित लिपिबद्ध यंत्र चूँकि अधिकांश व्यक्ति रेडियो या टेलिवीजन पर आने वाले कार्यक्रम की अवधि में टेलिफोन द्वारा बाधा उपस्थित होना पसंद नहीं करते हैं, अतः यह विधि अधिक व्यवहारिक है। इस यंत्र को टेलिवीजन सा रेडियो के साथ जोड़ने पर उन पर देखे या सुने जाने वाले कार्यक्रम का प्रति मिनट ब्यौरा अंकित होता रहता है।
(iii) विद्युत यंत्र इसके अंतर्गत एक ट्रक या हवाई जहाज में इस यंत्र को लगा दिया जाता है। जब यह ट्रक या हवाई जहाज किसी क्षेत्र में से होकर निकलता है तो वहां के मकानों में रेडियो या टेलीवीजन पर विभिन्न छानी तरंगों पर होने वाले विज्ञापन कार्यक्रमों की सूचना प्राप्त कर ली जाती है।
(iv) टेलीविजन को काम में लाने का पता लगाना वाला यंत्र जब यह यंत्र किसी मकान की ओर इंगित किया जाता है तो यह ज्ञात किया जाता है कि उसमें टेलविजन पर विज्ञापन कार्यक्रम देखा जा रहा है या नहीं।
(v) डायरी इसके अंतर्गत दर्शक या श्रोता को डायरी दे दी जाती है जिसमे उनके द्वारा घर में या अन्यत्र रेडियो तथा टेलीविजन पर देखा या सुने जाना वाला विज्ञापन के कार्यक्रम का ब्यौरा लिख दिया जाता है। यह डायरी समय-समय पर अनुसंधानकर्ता को लौटा दी जाती है।
(vi) साक्षात्कार इसके अंतर्गत रेडियों या टेलियीजन पर होने वाले कार्यक्रम के समय ही अनुसंधानकर्ता घर-घर जाकर या ओताओं का साक्षात्कार करके विज्ञापन कार्यक्रम के संबंध में सूचना प्राप्त करता है।
सामान्यत यह सूचना, जो व्यक्ति अनुसंधानकर्ता को घर के दरवाजे पर मिलता है, उससे प्राप्त कर ली जाती है।
(ग) विज्ञापन के पश्चात अनुसंधान तकनीक जाती है एक निश्चित अवधि तक विज्ञापन करने के पश्चात उसका प्रभाव जानने के लिए निम्न विधियां अपनायी
(i) जांच इसके अंतर्गत पत्रिका और समाचार पत्र के पाठको को विज्ञापन में यह प्रार्थना की जाती है कि वे विज्ञापन के साथ लगे कूपन पर या अन्य - कागज पर लिखकर विज्ञापिता उत्पाद या सेवा के संबंध में जांच-पड़ताल करें इस विधि की मान्यता यह है कि ऐसी जांच इस बात का द्योतक है कि लोगों के मन में उत्पाद या सेवा के प्रति रुचि पैदा हुई है या नहीं, जो भविष्य में विक्रय की संभावना व्यक्त करती है।
इस विधि में एक ही विज्ञापन के विभिन्न माध्यम या एक ही माध्यम में एक विज्ञापन कार्यक्रम के भिन्न-भिन्न प्रस्ताव, जैसे एक ही पत्रिका में भिन्न-भिन्न विज्ञापनों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है।
(ii) स्प्लिट रन टैस्ट इसके अंतर्गत एक निश्चित बाजार को विभिन्न खंडों में विभाजित करके प्रत्येक खंड में एक ही विज्ञापन को भिन्न-भिन्न प्रकार से प्रस्तुत किया जाता है जैसे एक खंड में विज्ञापन विभिन्न रंग में किया जाये जबकि दूसरे खंड साधारण सफेद और काले रंग में किया जाये या एक खंड में एक उत्पाद का ही विज्ञापन किया जाये जबकि दूसरे खंड में एक ही विज्ञापन एक से अधिक उत्पाद से संबंधित हो या एक खड़ में विज्ञापन सप्ताह में केवल एक बार ही किया जाये जबकि दूसरे खंड में दो या अधिक बार किया जाये ।
(iii) पहचान परीक्षण इस परीक्षण को स्मृति परीक्षण भी कहा जाता है।
इसमें स्मृति अर्थात याददाश्त को महत्व दिया जाता है इस युक्ति से यह ज्ञात किया जाता है कि किस प्रकार के विज्ञापन या किस प्रकार के अभियान अधिकतम श्रोताओं एवं दर्शकों, पाठको को आकर्षित करते हैं। इसमें उपभोक्ताओं को विज्ञापन प्रति दिखाने के बाद या विज्ञापन प्रसारित करने के बाद यह पूछा जाता है कि क्या वह विज्ञापन उन्होंने पहले कहीं देखा है? अगर उत्तर 'हाँ' में होता है तो इसका अर्थ यह होगा कि हमारा विज्ञापन प्रभावशाली है।
(iv) पुनः स्मरण परीक्षण इस परीक्षण को भी स्मृति परीक्षण कहा जाता है। इस विधि में विज्ञापन को ग्राहकों के समक्ष नहीं रखा जाता है। उनसे केवल यह पूछा जाता है कि हाल ही में आपने कौन से उत्पाद व बाण्ड विज्ञापन देखा है, पढ़ा या सुना है या क्या आपको अबुजा सिमेट विज्ञापन स्मरण है।
यदि उत्तर हो है तो इसका आशय यह होगा कि विज्ञापन प्रभावशाली है इस परीक्षण में उपभोक्ता को विज्ञापन के संदर्भ में अन्य प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं, जैसे अंबुजा सिमेंट में क्या टैग लाइन अथवा नारा दिया गया था, उसके मॉडल कौन से थे?
(अ) रेडियो एवं टेलीवीजन पुनः स्मरण परीक्षण जिन विज्ञापनों को रेडियो या टेलीवीजन पर सुनाया या दिखाया जाता है, उसके लिए टेलीफोन सर्वेक्षण का सहारा लिया जाता है। इसके अंतर्गत रेडियो प्रसारण या टेलीफोन प्रदर्शन के अगले दिन टेलीफोन से निदर्शक के आधार पर संभावित ग्राहकों से पूछताछ की जाती है कि क्या उन्होंने कॉम्प्लान का विज्ञापन देखा या सुना है अगर अधिकाश उत्तर हा में आते है तो यह माना जाता है कि विज्ञापन प्रभावशाली है।
(ब) गैल्प एव राबिन्सन परीक्षण इस तकनीक में उपभोक्ताओं को वह पत्रिका दिखाई जाती है जिसमें अमुक विज्ञापन छपा है। उनसे पूछा जाता है कि - क्या आपने यह पत्रिका पढ़ी है?"
अगर उनका उत्तर हां में होता है तो उनके सामने कई बाण्ड के नाम लिखे कार्ड फैला दिये जाते हैं और पूछा जाता है कि उन्होंने इस पत्रिका में कौन सा ब्राण्ड के विज्ञापन को उन्हे याद करके उसकी विशेषताओं को बताने का आग्रह किया जाता है। कुछ प्रश्न ऐसे भी पूछे जा सकते हैं, जैसे क्या यह विज्ञापन देखकर उन्होंने उत्पाद या बांड को प्रयोग करने के इच्छा हुई है या नहीं। उनके उत्तरों को रिकार्ड कर लिया जाता है। बाद में उसी पत्रिका को खोलकर वही विज्ञापन उसे दिखा कर यह पूछा जाता है कि क्या यह वही विज्ञापन है जिसकी बात आप कर रहे हैं? यदि उसका उत्तर हा है तो इसका आशय होगा कि विज्ञापन प्रभावशाली रहा है।
(स) चेतना परीक्षण यह पता लगाने के लिए कि नये उत्पाद की घोषणा और उसके नाम एवं बांड या ट्रेडमार्क का ज्ञान जनता को है या नहीं, चेतना परीक्षण को अपनाया जाता है। विज्ञापन अभियान द्वारा प्राप्त ज्ञान का पता केवल हा या नहीं' प्रश्नों के उत्तर से ही लग जाता है।
डाक या टेलीफोन सर्वेक्षण इसके लिए उचित विधिया होती है। उदाहरण के लिए, क्या आपने टीवीएस कम्प्यूटर का नाम सुना है? या क्या आपने क्लोज-अप टूथपेस्ट का नाम सुना है?" यदि उत्तर 'हा' है तो क्या उस बाण्ड की कुछ विशेषताएं आपको याद है? इस प्रकार के प्रश्नों को चेतना परीक्षण में सम्मिलित किया जाता है।
(v) विक्रेता विश्लेषण किसी भी विज्ञापन की वास्तविक सफलता की कसौटी यह है कि विक्रय करने से खर्च की तुलना में माल कितने लाभ पर विक्रय किया जाता है विज्ञापन करने से पूर्व तथा कराने के पश्चात की अवधि विक्रय के आंकड़ों की तुलना की जाती है। इस परीक्षण की अवधि अनेक घटकों पर निर्भर करती है,
जैसे उत्पाद की प्रकृति उपभोक्ता द्वारा क्रय करने का समय उत्पाद के उपयोग का समय, पुनः क्रय की आवश्यकता आदि । इस परीक्षण से यथार्थ निष्कर्ष निकालने के लिए नियन्त्रित बाजार (जिसमें विज्ञापन किया गया है) के विक्रय आकड़ों की तुलना खुले बाजार के विक्रय आंकड़ों से भी की जाती है। इसके साथ ही उपभोक्ताओं से सबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएं (जैसे आयु, लिंग, शिक्षा, आय, व्यापार चिंह की जानकारी, क्रय करने की इच्छा उत्पाद की सही जानकारी, आदि) भी संकलित की जा सकती हैं।
विज्ञापन अनुसंधान की कार्य प्रणाली के नियोजन का उद्देश्य उत्पाद या सेवा के लक्षण समय, स्थान साधन बाजार परिस्थिति विज्ञापन के पाठक, दर्शक या ओताओं से संबंधित सहयोग की मात्रा पूर्व अनुनय आदि घटकों को ध्यान में रखते हुए उपर्युक्त वर्णित किसी एक तकनीक या एक से अधिक के संयोग के आधार पर किया जाता है।
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