वित का प्रबंध , व्यवसाय का चुनाव - Management of finance, choice of business
वित का प्रबंध , व्यवसाय का चुनाव - Management of finance, choice of business
उद्यमी को विश्लेषण कर यह ज्ञात करना होगा कि व्यवसाय में कितन पैसे की आवश्यकता होगी और कितने समय के लिए होगी। मशीन, भवन, कच्चा माल, आदि खरीदने तथा श्रमिकों की मजदूरी आदि चुकाने के लिए उसे धन की आवश्यकता पड़ती है। मशीनरी, भवन, उपकरण आदि कय करने के लिए खर्च किया धन स्थायी पूंजी कहलाती है। दूसरी ओर, कच्चा माल क्रय करने तथा मजदूरी तथा वेतन, किराया टेलीफोन और बिजली के बिल का भुगतान करने के लिए खर्च किया धन, कार्यशील पजी कहलाती है। एक उद्यमी को दोनों ही प्रकार की पूंजी जुटानी होती है। यह धन अपने घर से पूरा किया जा सकता है अथवा बैंक तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेकर। मित्रों तथा संबंधियों से भी धन उधार लिया जा सकता है।
व्यवसाय का चुनाव
व्यवसाय करने की प्रक्रिया तब से प्रारंभ हो जाती है जब उद्यमी सोचना शुरू कर देता है कि वह किस चीज का व्यवसाय करें। वह बाजार की मांग को देखते हुए व्यवसायिक अवसरों पर सोच सकता है। वह विद्यमान वस्तु अथवा उत्पाद के लिए निर्णय ले सकता है अथवा किसी नये उत्पाद पर विचार कर सकता है। किंतु कोई भी कदम उठाने से पहले उसे व्यवसाय का लाभ, शक्ति अथवा लाभप्रदता और पूजी निवेश पर गंभीरता से विचार करना होगा। लाभप्रदता तथा जोखिम की स्थिति पर विचार कर लेने के पश्चात् ही व्यवसाय की कौन सी दिशा ठीक रहेगी इसके बारे में उद्यमी को निर्णय लेना चाहिए।
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