अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय का अर्थ व परिभाषाएं - Meaning and definitions of international business
अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय का अर्थ व परिभाषाएं - Meaning and definitions of international business
अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय से वैश्वीकरण को बढ़ावा मिला है। ऐसा करने से घरेलू अर्थव्यवस्था को विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रवेश के लिए खोल दिया जाता है, यातायात पर लगे प्रतिबंधों को कम किया जाता है तथा बहुराष्ट्रीय कंपनिया उन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी निवेश कर सकती है जो पहले विदेशी कंपनियों के लिए वर्जित या प्रतिबंधित थे। वैश्वीकरण की नीति के अनुसार घरेलू अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ा जाना चाहिए। इससे विश्व की उच्चस्तरीय तकनीक विशिष्ट ज्ञान उत्पादों व सेवाओं आदि का घरेलू अर्थव्यवस्था में अतप्रवाह बढ़ गा विकसित देशों की पूजी व टेक्नोलॉजी विश्व के विकासशील देशों जैसे- चीन, भारत, ब्राजील आदि में निवेश की जाएगी। वैश्वीकरण की प्रक्रिया में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।
अब बहुत-सी बहुराष्ट्रीय कंपनियां कई देशों में अपने उत्पाद सेवाएं, टेक्नोलॉजी आदि सेवाएं बेचती है। संचार व परिवहन की सुविधाओं के विकास से एक देश के लोगों के अन्य देशों में आवागमन में बहुत वृद्धि हुई है लोग उच्च शिक्षा ग्रहण करने, पर्यटन, चिकित्सा, नौकरी आदि के लिए अन्य देशों में पहले से अधिक जाने लगे है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ जैसे विश्व व्यापार संगठन, युकटाड, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक आदि अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय को बढ़ावा दे रही है। विश्व व्यापार संगठन मंच पर समस्त देश उत्पादों व सेवाओं के प्रवाह पर लगी टैरिफ व गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने के लिए सहमत होते है। विदेशी निवेश के अंतप्रवाह व बाहरी प्रवाह पर लगी प्रशासनिक बाधाओं को कम करने के लिए भी सदस्य देश सहमत होते है
इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार व निवेश को बढ़ावा मिला है और साथ ही इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विकास में वृद्धि हुई है।
अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय केवल घरेलू व्यवसाय का विदेशों में विस्तार ही नहीं है। अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय में कुछ विशेष समस्याओं का सामना भी करना पड़ता
अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय की परिभाषाएँ
हैं, जो घरेलू व्यवसाय में नहीं आती है। अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय की मुख्य समस्याएँ इस प्रकार है सांस्कृतिक अंतर भाषा संबंधी समस्याएँ विनिमय दर में उतार-चढ़ाव, टैरिफ व गैर टैरिफ बाधाएँ, देश संबंधी जोखिम, तथा राजनीतिक जोखिन।
(i) रोजर वैनेट के अनुसार, "अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय का तात्पर्य उत्पादों पूजी सेवाओं कर्मचारियो टेक्नोलॉजी के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवाह आयात-निर्यात, बौद्धिक संपदाओं (पेटेन्ट ट्रेड मार्क, तकनीकी ज्ञान, कॉपीराईट आदि) से सबंधी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवाह से है। यह व्यवसाय लाइसेंसिंग, फेन्चाइजिंग, विदेशों में भौतिक व वित्तिय संपत्तियों में निवेश, उत्पादों के संग्रहण द्वारा स्थानीय विक्रय या अन्य देशों में निर्यात, विदेशों में क्रय-विक्रय, विदेशों में वेयरहाउसिंग मण्डारण व वितरण व्यवस्था स्थापित करना, विदेशों से आयात करके घरेलू अर्थव्यवस्था में विक्रय आदि के रूप में हो सकता है।"
(ii) जॉन डा. डैनियल व एच. ली. के अनुसार, "अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय में दो या दो से अधिक देशों के मध्य किए गए सभी वित्तीय व्यवहार शामिल हैं: जैसे विक्रय, निवेश, आदि।"
(iii) एस. डार्ट के अनुसार, "अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय में दो या दो से अधिक देशों के मध्य ऐसी सभी व्यावसायिक क्रियाएं शामिल है, जिनमें उत्पादों, सेवाओ संसाधनों से संबंधित व्यवहार होते है। संसाधनो के व्यवहारों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पादों व सेवाओं के उत्पादन हेतु पूजी व मानवीय संसाधनों से संबंधित व्यवहार भी शामिल है।"
संक्षेप में अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय में निम्न विशेषताएँ शामिल है -
घरेलू अर्थव्यवस्था का वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण-
• अर्थव्यवस्था को विदेशी पूंजी, विदेशी टेक्नोलॉजी व विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोलना।
• स्वतंत्र विदेशी व्यापार एवं निर्यातों व आयातों के प्रति उदारवादी दृष्टिकोण टैरिफ व कोटा समाप्ति
• बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार
वार्तालाप में शामिल हों