मानव संसाधन संगठन का अर्थ एवं उद्देश्य - Meaning and Objectives of Human Resource Organization
मानव संसाधन संगठन का अर्थ एवं उद्देश्य - Meaning and Objectives of Human Resource Organization
व्यवसाय का आकार - लघु उद्योगों अथवा संगठनों में जहां कर्मचारियों की संख्या लगभग 100 के आसपास होती है, मानव संसाधन गतिविधियां बहुत ही बुनियादी एवं मौलिक होती हैं। प्रमुख कार्यों में भर्ती एवं चयन, वेतन प्रशासन, अवकाश प्रबंधन, वैधानिक अभिलेखों का रख-रखाव, सामूहिक सैर / यात्रा का आयोजन तथा अन्य प्रशासनिक एवं समन्वयन गतिविधियां आती है। इनके संचालन की भूमिका अधिकतर स्वागत डेस्क या प्रशासनिक कार्यालय की होती है। मानव संसाधन क्रियाओं की प्रकृति अधिकांशतः विनिमयात्मक होती है। जीवन आवश्यकताओं की पूर्ति की संस्कृति कर्मचारियों को संगठन से बांधे रखती है।
औसत या मध्यम आकार के संगठन जिनमें कर्मचारियों की संख्या 200 से 500 के करीब होती है, वहाँ मानव संसाधन कार्य अपेक्षाकृत अधिक व्यवस्थित रूप में होता है।
मुख्य मानव संसाधन गतिविधियाँ, जैसे- प्रशिक्षण, पारिश्रमिक / क्षतिपूर्ति, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा आदि का दायित्व स्पष्ट एवं निर्धारित होता है। किसको क्या करना चाहिए तथा वह कार्य कैसे होना चाहिए, के निर्धारण के लिए स्पष्ट नीतियों, प्रक्रियाओं का निर्माण तथा निरूपण होता है। व्यावसायिक उददेश्यों को लेकर समझौते की कोई गुंजाइश न रहे, इसलिए मानव संसाधन विभाग के कार्यों से संबंधित सेवा स्तरीय अनुबंधों को परिभाषित किया जाता है। कौशल तथा मेधा को आकर्षित करना एवं उसका प्रतिधारण करना, कर्मचारी असंतुष्टि का समुचित प्रबंधन करना, लागतों तथा संबंधित व्ययों पर नियंत्रण रखना आदि कुछ प्रमुख मानव संसाधन कार्य है।
बड़े संगठन जहां कर्मचारियों की संख्या 1000 से ऊपर होती है, वहां मानव संसाधन कार्य अत्यंत परिपक्व एवं सुव्यवस्थित रूप में होता है। मानव संसाधन प्रक्रियाओं को परिभाषित करना,
उनका क्रियान्वयन तथा अभिलेखन करना, आदि कार्य बहुत ही सफलता पूर्वक संपादित किये जाते हैं। परिष्कृत मानव संसाधन उपकरणों तथा प्रौद्योगिकी का उपयोग संगठनात्मक तथा सामाजिक लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु किया जाता है। मानव संसाधन संगठन की संरचना और अधिक विकसित होती है, जो कि प्रत्येक मानव संसाधन गतिविधि के लिए उत्कृष्टता के केन्द्रों को स्थापित एवं परिभाषित करती है।
बहुराष्ट्रीय संगठनों में मानव संसाधन संगठन, व्यावसायिक रणनीतियों एवं प्राथमिकताओं के साथ अपने कार्यों को पंक्तिबद्ध करते हुए सर्वाधिक परिपक्व रूप में होता है। मानव संसाधन कार्य व्यूह-रचनात्मक रूप में स्थानीय तथा वैश्विक प्राथमिकताओं को कार्य-जीवन संतुलन कार्यक्रमों कार्य स्थल विविधता प्रबंधन, कर्मचारी सहभागिता गतिविधियों के संस्थापन, संस्कृति निर्माण क्रियाओं,
आदि से संबंधित होते हैं। मानव संसाधन विभाग का एक विशिष्ट एवं महत्वपूर्ण स्थान होता है तथा यह प्रत्येक व्यावसायिक रणनीति एवं निर्णय से संबंधित होता है।
व्यवसाय की प्रकृति- मानव संसाधन विभाग की संरचना का निर्धारण, बहुत हद तक व्यवसाय की प्रकृति पर निर्भर करता है। ज्ञान एवं सूचना आधारित संगठनों में अति परिपक्व मानव संसाधन संरचना को देखा जा सकता है। कर्मचारियों के ज्ञान पर अत्यधिक निर्भरता इस परिपक्व संरचना में वृद्धि करती है। ज्ञान आधारित संगठनों के मानव संसाधन अधिकारी, व्यावसायिक प्राथमिकताओं को कर्मचारी सहभागिता की सुनिश्चितता से संबद्ध करने के लिए प्रयासरत रहते हैं। मानव संसाधन भूमिकाओं का स्पष्ट विभाजन, संचालनात्मक मानव संसाधन, जिसके अंर्तगत विनियमात्मक गतिविधियां अब भी विद्यमान हैं, तथा उत्कृष्टता के केन्द्र जो कि मूल्य वर्धित मानव संसाधन क्रियाओं से संबंधित है, के रूप में किया गया है। मानव संसाधन सूचना प्रणाली / तंत्र का उपयोग,
संपूर्ण मानव संसाधन जीवन चक्र के स्वचालन को सुनिश्चित करने हेतु होता है। गहन विश्लेषण के साथ विस्तृत मानव संसाधन प्रतिवेदनों का संसाधन संबंधित निर्णयन के लिए नियमित निर्माण एवं पुनरावलोकन होता है।
सेवा क्षेत्र के संगठनों में मानव संसाधन विभाग को साधारण रखा जाता है तथा मुख्य ध्यान कर्मचारियों से संबंधित, औपचारिक एवं विनियात्मक प्रकृति की गितविधियों पर होता है। मानव संसाधन संगठन की संरचना सामान्य एवं सरल होती है। समय पर भर्ती एवं चयन, अनुरक्षण, लाभ एवं वेतन प्रशासन आदि प्रक्रियाएं मानव संसाधन विभाग से मुख्य अपेक्षाएं होती हैं।
वरिष्ठ / शीर्ष प्रबंधन का दर्शन : संगठन के संस्थापक सदस्य तथा वरिष्ठ प्रबंधक भी मानव संसाधन क्रियाओं के क्षेत्र एवं प्रकृति का निर्धारण करते हैं।
मानव संसाधन प्रमुख प्रधान की महत्ता, मानव संसाधन अधिकारियों का संगठन में सापेक्षिक स्थान तथा उनकी कथित संगठनात्मक संबंद्धता, सभी वरिष्ठ एवं उच्च पदासीन अधिकारियों की अभिवृत्ति/ दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।
वैश्विक उपस्थिति :- वैश्विक उपस्थिति वाले संगठनों में मानव संसाधन संगठन की संरचना अत्यधिक सुदृढ एवं उन्न्त होती है। संगठन के मुख्यालय में एक संयुक्त संगठित मानव संसाधन विभाग होता है तथा संगठन की प्रत्येक अनुषंगी / सहायक इकाई का अपना एक अलग मानव संसाधन दल / समूह होता है। मुख्यालय स्थित मानव संसाधन विभाग पूरे संगठन के लिए मानव संसाधन नीतियों तथा प्रक्रियाओं का निरूपण एवं प्रतिपादन करता है। यह नीतियां, मानव संगठन की सभी इकाइयों को एक ही संगठनात्मक संस्कृति से बांधे रखना सुनिश्चित करती है।
स्थानीय इकाइयों के मानवसं साधन विभाग, संपूर्ण संगठन हेतु बनाई गई इन नीतियों को लागू करने के साथ ही साथ स्थानीय व्यावसायिक आवश्यकताओं के लिए विशिष्ट रूप से निर्मित प्रथाओं को भी अपनाते हैं।
मानव संसाधन विभाग के संघटक :- मानव संसाधन विभाग के संघटकों के संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि यह संगठन की गतिविधियों एवं क्रिया-कलापों के स्तर पर तथा शीर्ष प्रबंधन के कर्मचारियों के प्रति दृष्टिकोण एवं मनोवृत्ति पर निर्भर करता है। फिर भी एक आदर्श मानव संसाधन विभाग के अंतर्गत, बतौर अध्यक्ष एक निदेशेक होता है, जिसके अधीन प्रबंधक कार्मिक प्रशासन, प्रबंधक मानव संसाधन विकास तथा प्रबंधक- औद्योगिक संबंध आते हैं।
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