आर्थिक वातावरण का अर्थ , तत्व - Meaning, Elements of Economic Environment
आर्थिक वातावरण का अर्थ , तत्व - Meaning, Elements of Economic Environment
आर्थिक वातावरण का अभिप्राय उन आर्थिक तत्वों से है, जिनका व्यवसाय के कार्य संचालन पर प्रभाव पडता है, जैसे आर्थिक व्यवस्था, आर्थिक नीति, अर्थव्यवस्था की प्रकृति, व्यापार चक्र, आर्थिक संसाधन, आय-स्तर और धन का वितरण इत्यादि। आर्थिक वातावरण बहुत जटिल व गतिशील है। यह निरंतर बदलता रहता है। इसके मुख्यत तीन तत्व है। ये तत्व- आर्थिक स्थितिया, आर्थिक नीतिया व आर्थिक व्यवस्था है। ये इस प्रकार है-
आर्थिक वातावरण के तीन तत्व
(1) आर्थिक स्थितियां:- अर्थव्यवस्था की आर्थिक स्थितियां व्यवसाय को प्रभावित करती है। विभिन्न आर्थिक स्थितियां, जैसे आय स्तर, आय का वितरण, मांग की प्रवृति, व्यापार चक्र इत्यादि बाजार के आकार को प्रभावित करती है।
यदि अर्थव्यवस्था में तेजी की स्थिति पाई जाए तब इससे मांग बढ़ती है और व्यावसायिक इकाई के बाजार हिस्से में वृद्धि होती है। इसी तरह पतन की स्थिति में मांग में कमी आती है और व्यावसायिक इकाई का बाजार हिस्सा कम हो जाता है। आर्थिक स्थितियों में बाजार आकार, वर्तमान मूल्य स्तर पूंजी निर्माण की दर, औद्योगिक विकास की दर को भी शामिल किया जाता है।
(2) आर्थिक नीतिया - आर्थिक नीतिया सरकार द्वारा बनाई जाती है। इन नीतियों का व्यवसाय - पर प्रभाव पड़ता है। व्यवसाय को अपनी नीतियों का निर्माण करते समय सरकार की आर्थिक नीतियों को ध्यान में रखना पड़ता है। इन आर्थिक नीतियों में आये बदलाव का हमारे व्यवसाय पर प्रभाव पड़ता है।
व्यवसाय पर इन नीतियों का प्रभाव अनुकूल या प्रतिकूल हो सकता है। ये नीतियां विभिन्न तरह के व्यवसायों पर विभिन्न तरह का प्रभाव डालती हैं। ये आर्थिक नीतियां किसी एक व्यवसाय को अनुदान तथा आयकर व उत्पादन कर में छूट दे सकती है, जबकि किसी अन्य व्यवसाय पर अधिक कर व शुल्क लगा सकती है। अत बदलती हुई आर्थिक नीतियों के साथ व्यावसायिक इकाई को अपनी नीतियों में बदलाव लाना पड़ता है। निम्न प्रमुख आर्थिक नीतिया व्यवसाय को प्रभावित करती है
1. मौद्रिक नीति
2. राजकोषीय नीति
3. निर्यात-आयात नीति
4. विदेशी निवेश नीति
5. औद्योगिक नीति
6. औद्योगिक नीति
7. औद्योगिक लाइसेंसिंग नीति
ऊपर लिखी गई नीतियों के अलावा सरकार ने बहुत से आर्थिक कानून बनाए हैं, जो व्यवसाय पर लागू होते है और व्यवसाय को नियंत्रित करते है। इसलिये इन कानूनों में होने वाले बदलाव व्यावसायिक इकाई को प्रभावित करते हैं। इसमें निम्नलिखित शामिल है:
1. औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947
2. कारखाना अधिनियम, 1948
3. औद्योगिक विकास एवं नियमन अधिनियम, 1951
4. कंपनी अधिनियम, 1956 तथा कंपनी अधिनियम, 2013
5. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986
6. डिपोसीटरीज एक्ट, 1996
7. विदेशी विनियम प्रबंध अधिनियम, 1999:
8. सिक्योरीटीज एण्ड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया गाइडलाइन्स, 2000
9. प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002
10. सीमित दायित्व साझेदारी अधिनियम, 2008
11. बैंकिंग नियमन अधिनियम, 1949 तथा बैंकिग कानून (संशोधन) बिल, 2012
(3) आर्थिक व्यवस्था - विभिन्न देशों में अलग-अलग आर्थिक व्यवस्थाएं प्रचलित है। किसी भी - देश की आर्थिक व्यवस्था और उसमें आने वाले परिवर्तन उस देश की व्यावसायिक इकाइयों को प्रभावित करते है। इतना ही नहीं, किसी एक देश की आर्थिक व्यवस्था में बदलाव का दूसरे देशों की व्यावसायिक इकाइयों के विदेशी व्यापार पर भी प्रभाव पड़ता है। किसी देश की आर्थिक व्यवस्था में से कोई हो सकती है:
(क) पूंजीवाद - इस प्रणाली में व्यवसाय के निजी स्वामित्व पर अधिक बल दिया जाता है। इसमें आर्थिक क्रियाओं में अधिकतर भूमिका निजी क्षेत्र की ही होती है। इसे खुली अर्थव्यवस्था भी कहते है: जैसे- अमेरिका व इंग्लैंड की अर्थव्यवस्था
(ख) समाजवाद:- इस अर्थव्यवस्था में आर्थिक क्रियाएं सरकार द्वारा संचालित की जाती है। सरकार ही आर्थिक विकास में मुख्य भूमिका निभाती हैं।
(ग) मिश्रित अर्थव्यवस्था इस प्रणाली में सार्वजनिक क्षेत्र व निजी क्षेत्र दोनों का सह अस्तित्व होता है। इसमें पूजीवाद व समाजवाद दोनों का प्रभाव होता है।
(4) अन्य आर्थिक तत्व:- आर्थिक वातावरण में अद्योसंरचना सुविधाओं, जैसे- सड़कें, रेलवे, अन्य यातायात सुविधाएं, ऊर्जा, सचार आदि को भी शामिल किया जाता है। इसमें बैंकों, बीमा कंपनियों, मुद्रा बाजार पूंजी बाजार आदि को शामिल किए जाते हैं।
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