दृष्टिकोण व मनोवृत्ति का अर्थ - Meaning of attitude and attitude
दृष्टिकोण व मनोवृत्ति का अर्थ - Meaning of attitude and attitude
सामान्य अर्थ में किसी उत्पाद, वस्तु विज्ञापन, बाण्ड, उत्पाद, रंग के आदि के संदर्भ में व्यक्ति की अनुकूल या प्रतिकूल धारणा के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। व्यापक अर्थ में दृष्टिकोण से आशय उत्पाद या वस्तु विज्ञापन पैकेजिंग, ब्राण्ड आदि के प्रति उस चेतना का मानसिक प्रतिक्रिया से है जो एक व्यक्ति को विशेष ढंग से सोचने, विचारने तथा व्यवहार करने को प्रेरित करती है। इस प्रकार दृष्टिकोण का सम्बन्ध व्यक्ति के मनोविज्ञान से है जब एक व्यक्ति अपने चारों ओर की मूर्त तथा दृश्यगत वस्तुओं को देखता है तो वह अपने अन्तरंग में कुछ विशिष्ट विचारों या संवेगों को अनुभव करता है और उसी के अनुसार एक विशेष प्रकार की क्रिया या प्रतिक्रिया करने को प्रेरित होता है। व्यक्ति के उन अमूर्त तथ्यों भावनाओं, प्रेरणाओं या विचारों को ही दृष्टिकोण कहा जाता है।
मनोवृत्ति को एक प्रत्युत्तर में झुकाव या पूर्वधारणा के रूप में परिभाषित किया जा सकता है विपणन के संदर्भ में मनोवृत्ति से आशय एक उत्पाद या सेवा के प्रति उपभोक्ता की पूर्वधारणा या झुकाव से है। यदि यह झुकाव अनुकूल है तो यह माना जा सकता है कि उपभोक्ताओं के द्वारा उस उत्पाद को खरीदे जाने की काफी संभावना है। व्यापक रूप में निम्न तीन बातें सम्मिलित है। विश्वास, भावना तथा एक गुण या वस्तु के खरीदने के प्रति व्यक्ति के प्रत्युत्तर की व्यवहारात्मक तैयारी विपणन में इन तीनों तत्वों को एक साथ लाने का प्रयास किया जाता है जिसे छवि कहा जाता है। इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं 1 कि मनोवृत्ति एक जटिल अवधारणा है जिसे पूर्णरूप से नहीं समझा जा सकता है। सुदृढ मनोवृत्ति को अपेक्षाकृत बेहतर दबाव के साथ बदला जा सकता है। विपणन में मनोवृत्ति माप एक उत्पाद के गुणों के प्रति विश्वास एवं भावनात्मक लगाव के मापन से सम्बन्धित है
पैमाना मनोवृत्तियों को मापने की प्रक्रिया से सम्बन्धित है। केच एवं कचफील्ड के अनुसार, मनोवृत्ति को व्यक्ति की दुनिया के किसी पक्ष से सम्बन्धित प्रेरणात्मक संवेगात्मक, प्रत्याक्षात्मक और शानात्मक प्रक्रियाओं के एक सुस्थिर संगठन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इस प्रकार मनोवृत्ति की सामान्यतः तीन घटकों में समझा जा सकता है -
(i) शानात्मक तत्व अर्थात उद्देश्य के बारे में व्यक्ति का विश्वास या सूचनाएं।
(ii) सवेगात्मक तत्व उद्देश्य के सम्बन्ध में व्यक्ति की पसंदगी या नापसंदगी की भावना
(iii) व्यवहारात्मक तत्व - उद्देश्य के प्रति प्रवृत्ति या पूर्वानुकूलता।
उदाहरण के लिए, मैगी नूडल्स के बारे में मनोवृत्ति में निम्न अंशों को सम्मिलित किया जाएगा-
(i) इस कंपनी या फर्म के बारे में आप क्या जानते या विश्वास करते हैं।
(ii) उत्पादन पुनः स्मरण पर सरकारी नीति के साथ-साथ मैगी नूडल्ज़ के बारे में आप क्या महसूस करते हैं (संवेगात्मक तत्व) क्या मैगी को पसन्द करते हैं और विश्वास करते हैं कि नस्ले एक अच्छी कम्पनी है ?
(iii) आप इस स्थिति में कैसे पूर्वानुकूलता हेतु बाध्य हुए? (व्यवहारात्मक तत्व) क्या आप नेस्ले या क्या आप अपने मित्र या वितरक से शिकायते करेंगे, या क्या मैगी नहीं खरीदेंगे।
इस प्रकार मनोवृत्ति को तीन घटकों (ज्ञान, संवेग एवं व्यवहार) के रूप में समझा जाता है एलपोर्ट ने मनोवृत्ति को निम्न तीन प्रकार से परिभाषित किया है। मनोवृत्ति मानसिक एवं स्नायुविक तत्परता की एक स्थिति है जो अनुभव द्वारा निर्धारित होती है और उन समस्त वस्तुओं तथा परिस्थितियों के प्रति हमारी प्रतिक्रियाओ को प्रेरित व निर्देशित करती है जिनसे वह मनोवृत्ति सम्बन्धित है। एक लक्ष्य के प्रति व्यक्ति के समग्र मनोवृत्ति लक्ष्य के प्रत्येक गुण के प्रति उसकी मनोवृत्ति एवं निर्णय प्रक्रिया में प्रत्येक गुण की महत्ता द्वारा निर्धारित होती है। उपरोक्त विवेचन से दृष्टिकोण की निम्न विशेषताएं ज्ञात होती है-
→ दृष्टिकोण एक मनोवैज्ञानिक धारणा से सम्बन्धित है।
→यह व्यक्ति की मानसिक तथा स्नायुविक तत्परता की स्थिति है।
→ दृष्टिकोण किसी वस्तु या व्यक्ति के प्रति मानसिक छवि बताती है।
→अनुभव के आधार पर दृष्टिकोण का निर्माण होता है।
→ दृष्टिकोण उन समस्त वस्तुओं या परिस्थितिया के प्रति व्यक्ति की क्रिया एवं प्रतिक्रिया करती है जिनसे वह सम्बन्धित है।
→व्यक्ति के मानसिक विन्यास को दृष्टिकोण कहते हैं।
→ दृष्टिकोण का निर्माण परिचित परिस्थिति में नहीं।
→ दृष्टिकोणएक गत्यात्मक अवधारणा है जो अनुभव एवं ज्ञान में परिवर्तन के साथ-साथ परिवर्तित होती रहती हैं।
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