विदेशी विनिमय का अर्थ - meaning of foreign exchange
विदेशी विनिमय का अर्थ - meaning of foreign exchange
विदेशी विनिमय का अभिप्राय उस समूची रीति से होता है जिसके द्वारा दो देश अपने दायित्वों का भुगतान करते है। चैपमैन के शब्दों में विदेशी विनिमय से अभिप्राय उस यन्त्र से है जिसके द्वारा विदेशी वाणिज्य में भुगतान कार्य होता है। इस प्रकार विदेशी विनिमय वह पद्धति है जिसके द्वारा दो क्षेत्रों के बीच, जिनमें विभिन्न प्रकार की मुद्राए चलन में है भुगतान होता है।
वास्तव में विदेशी विनिमय वह रीति अथवा विधि है जिसके द्वारा दो भिन्न मुद्राओं वाले क्षेत्र अथवा देश अपने पारस्परिक दायित्वों का भुगतान करते हैं। इस प्रकार विदेशी विनिमय के अंतर्गत ये सभी यंत्र साधन, रीतियों एवं उपाय सम्मिलित हैं जो दो राष्ट्रों के बीच दायित्वों के भुगतान में सहायक होते हैं।
प्रत्येक देश की मुदा केवल उस देश की सीमाओं के भीतर विधिग्राहा होती है। यदि भारत के व्यापारी अमेरिका से माल आयात करते हैं तो उसका भुगतान डालरी में करना होगा, क्योंकि भारतीय रुपया अमेरिका में विधिग्राहा नहीं है।
इस प्रकार विदेशी विनिमय एक देश की मुद्रा का दूसरे देश की मुद्रा में परिवर्तन करने की समस्या उत्पन्न करता है, और जिस अनुपात में इन मुद्राओं का कय-विक्रय होता है, वह विदेशी विनिमय दर कहलाती है। स्वर्णमान के माध्यम से विदेशी भुगतान सरलतापूर्वक किये जा सकते है परंतु जिस प्रकार आन्तरिक चलन में स्वर्ण की बचत के लिए पत्र मुद्रा तथा साख मुद्रा का प्रयोग किया जाता है उसी प्रकार विदेशी भुगतानों में स्वर्ण की बचत के लिए भी अनेक उपाय अथवा रीतियाँ अपनानी पड़ती हैं। यथासम्भव प्रयास यही किया जाता है कि विदेशी भुगतानों के लिए विदेशी मुद्राएं प्राप्त की जाये।
यह बात भली भांति समझ लेनी चाहिए कि किसी समय में आन्तरिक मुद्रा की मात्रा अधिक होना इस बात का प्रतीक नहीं होता कि उस देश के पास विदेशी विनिमय के भी पर्याप्त साधन मौजूद हैं।
आन्तरिक तरलता तथा चाहा तरलता की सीमाएं एक-दूसरे से भिन्न होती है। विदेशी विनिमय की व्यवस्था करना बाहा तरलता की समस्या है।
विदेशों को भुगतान करने के अनेक कारण हो सकते हैं, जैसे
(1) विदेशों से आयात की गयी वस्तुओं के लिए,
(ii) विदेश से प्राप्त हुई सेवाओं के लिए.
(iii) दूतावासों पर व्यय, मुद्रा, चन्दा, दान, मुआवजा
(iv) जनसंख्या का प्रयास
(v) पूंजी का गमन यही कारण जब विपरीत दिशा में कियाशील होते हैं तो विदेशों से भुगतान प्राप्त होता है।
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