क्षेत्रीय असंतुलन का अर्थ - Meaning of regional imbalance
क्षेत्रीय असंतुलन का अर्थ - Meaning of regional imbalance
सामान्यत एक ही देश के विभिन्न क्षेत्रों में असंतुलन विकास नही होता। परिणामस्वरूप कुछ क्षेत्र दूसरे क्षेत्रों की अपेक्षा अधिक विकसित होते हैं। इसे ही क्षेत्रीय असंतुलन कहा जाता है। भारत में संतुलित क्षेत्रीय विकास की आवश्यकता है, परंतु भारत में क्षेत्रीय विकास के स्थान पर क्षेत्रीय असंतुलन चरम सीमा पर है। उदाहरण के तौर पर आर्थिक दृष्टि से भारत में दो प्रकार के राज्य है-
भारत में क्षेत्रीय असंतुलन की विशेषताएं
(i) जनसंख्या में वृद्धि में असंतुलन 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में जनसंख्या की वृद्धि दर 1.6 प्रतिशत वार्षिक है। यह वृद्धि दर विभिन्न राज्यों में भिन्न-भिन्न है।
15 राज्यों में जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। शेष 13 राज्यों में यह कम है। मेघालय में जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि सबसे अधिक (249 प्रतिशत) है परंतु नागालैंड में सबसे कम (-0.05 प्रतिशत) है। केंद्रीय शासित प्रदेश दादर और नगर हवेली में जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि सबसे अधिक (451 प्रतिशत) है। परंतु लक्षद्वीप में सबसे कम (0.61 प्रतिशत) है। इस प्रकार भारत के विभिन्न राज्यों में जनसंख्या की वृद्धि दर में असंतुलन है।
(ii) जनसंख्या के घनत्व में असमानता- भारत में विभिन्न राज्यों में जनसंख्या के घनत्व के संबंध में असंतुलन की स्थिति है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में जनसंख्या का घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।
भारत में बिहार में जनसंख्या का घनत्व सबसे अधिक ( 1102 व्यक्ति) तथा अरूणाचल प्रदेश में सबसे कम (17 व्यक्ति) है। कुल 28 राज्यों में से 10 राज्यों का जनसंख्या का घनत्व राष्ट्रीय औसत से अधिक है। शेष 18 राज्यों में यह कम है। केंद्र शासित प्रदेशों में यह दिल्ली में सबसे अधिक (9340 व्यक्ति ) है तथा अडेमान और निकोबार में सबसे कम (46 व्यक्ति) है।
(iii) साक्षरता दर में असंतुलन:- भारत में 2011 की जनगणना के अनुसार साक्षरता दर 73 प्रतिशत है। साक्षरता की दृष्टि में भी भारत के विभिन्न राज्यों में असमानता है। भारत में केरल राज्य में साक्षरता दर सबसे अधिक (9391% ) है। सबसे कम बिहार (63.82% ) में है। भारत में 17 राज्यों में साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। शेष 12 राज्यो में यह राष्ट्रीय औसत से कम है।
केंद्र शासित प्रदेशों में केवल दादर और नगर हवेली में साक्षरता दर सबसे कम (77.65% ) है तथा लक्षद्वीप में सबसे अधिक ( 92.28%) है।
(iv) शहरी जनसंख्या में असंतुलन :- शहरी जनसंख्या की दृष्टि से भी भारत में विभिन्न राज्यों में असंतुलन है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 68.84% जनसंख्या गावो में तथा 31.16% जनसंख्या शहरों में रहती है। यह प्रतिशत भी भिन्न-भिन्न राज्यों में भिन्न है। गोवा में यह सबसे अधिक 62.17% है। कुल 10 राज्यों में शहरों में रहने वाली जनसंख्या का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से अधिक है, जैसे- तमिलनाडु (48.45%), महाराष्ट्र (45.23% ), गुजरात (12.58%), कर्नाटक ( 38.57%), पश्चिमी बंगाल (3189% )। इसके विपरीत 19 राज्यों में यह प्रतिशत राष्ट्रीय औसत के कम है, जैसे- हिमाचल प्रदेश (10.04%), मध्य प्रदेश (27.63%), छत्तीसगढ़ (2324%), उड़ीसा (16.68%) बिहार ( 1130%)। इस प्रकार शहरी जनसंख्या के कारण भी क्षेत्रीय असंतुलन हैं।
वार्तालाप में शामिल हों