प्रतिदर्श का अर्थ - meaning of sample

 प्रतिदर्श का अर्थ - meaning of sample


समग्र में से कुछ इकाइयों का चुनाव करके व उनके अध्ययन के आधार पर समय के बारे में अनुमान लगाने के विधि को निदर्शन या प्रतिदर्श सिद्धान्त कहते हैं। प्रश्न यह है कि कुछ चुनी हुई इकाइयों के विश्लेषण द्वारा समग्र की सभी इकाइयों के बारे में विश्वसनीय जानकारी कैसे प्राप्त कर सकते हैं? अर्थात निदर्शन के आधार पर संपूर्ण क्षेत्र के संबंध में अनुमान कहां तक विश्वसनीय है यही मूल प्रश्न निदर्शन या प्रतिदर्श का सिद्धान्त का आधार है। वस्तुत: प्रतिदर्श सिद्धान्त एक समग्र और उससे चुने गये निदर्शनों के मध्य पाये जाने वाले संबंधों का वैज्ञानिक अध्ययन है।


वर्तमान युग में अधिकतर अनुसंधान सिद्धान्त कुछ चुनी हुई इकाइयों के आधार पर समग्र के अध्ययन करने की एक विधि है। समग्र हुई इकाइयों के समूह को प्रतिदर्श या सैम्पल कहते हैं। निदर्शन के रूप में से चुनी गयी इकाइया निदर्शन इकाइया कहलाती है।


प्रतिदर्श समग्र की प्रत्येक इकाई प्रतिदर्श इकाई कहलाती है, क्योंकि इन इकाइयों में से ही प्रतिदर्श चुना जाता है। वास्तव में प्रतिदर्श इकाइयों का यह अंश है जो पूर्ण समय के अध्ययन हेतु चुना जाता है।


लऊ चाऊ के अनुसार प्रतिदर्श, प्रतिदर्श इकाइयों पर समष्टि के बारे में निष्कर्ष निकाले जाते हैं। जैसे किसी विज्ञापन प्रति की प्रभावशीलता को जानने के लिए एक क्षेत्र विशेष के 4000 लोगों में से 400 लोग छाट लिए जाते है तो ये 400 व्यक्ति प्रतिदर्श इकाइयां तथा 4000 व्यक्ति समग्र या प्रतिचयन इकाइया कहलायेंगी।


पी.वी. यंग के अनुसार, एक सांख्यिकीय प्रतिदर्श उस समग्र समूह या योग का अति लघु चित्र है

जिसमे से निदर्शन लिया गया है। स्नेडेकोर के अनुसार, एक सांख्यिकीय प्रतिदर्श कुछ इकाइयों का निरीक्षण करके वृहद मात्राओं के बारे में जाना जाता है।" सार रूप में, निदर्शन समग्र या अति वृहद समूह का रूप है जिसके आधार पर समग्र के बारे में निष्कर्ष ज्ञात किये जाते हैं। निदर्शन सिद्धान्त के संदर्भ में निम्न शब्दों का अर्थ जानना आवश्यक है


(क) जनसंख्या - इसको समग्र के नाम से भी जाना जाता है। समग्र से आशय किसी क्षेत्र की सभी इकाइयों के समुदाय से हैं, जिनमें कुछ सामान्यतः विशेषताएं हो। अन्य शब्दों में विचाराधीन विषय वस्तुओं के सपूर्ण समूह को ही जनसंख्या समग्र कहते है। उदाहरण के लिए यदि किसी जिले के 50000 व्यक्तियों की खास निदर्शन प्रकृति के संबंध में अनुसंधान करना हो तो सभी व्यक्तियों का समूह जनसंख्या या समग्र कहलायेगा। सम्रग निम्न चार निदर्शन प्रकार का हो सकता है-


1. परिमित समग्र


2. अपरिमित समग्र


3. वास्तविक समग्र


4. काल्पनिक समग्र 


ऐसा समग्र जिसमे इकाइयों की संख्या निश्चित हो, उसे सीमित समग्र कहा जाता है। उदाहरण के लिए भारत में आयकर दाताओं की सूची या राशन कार्ड धारकों की संख्या परिमित समय के उदाहरण है।

ऐसा समग्र जिसमें इकाइयों की संख्या असीमित हो, उसे अपरिमित समग्र की सज्ञा दी जाती है। उदाहरण के लिए, आकाश में तारों की संख्या अपरिमित समय का उदाहरण है। वास्तविक समय की इकाइयों अस्तित्व में होती हैं, जबकि काल्पनिक समग्र की स्थिति में इकाइयों का वास्तविक अस्तित्व नहीं होता। समग्र अत्याधिक बड़ा भी हो सकता है और छोटा भी लक, टेलर वाल्स तथा रुबिन का मत है कि समग्र में खास विशेषताएं परिचय या परिभाषा से संबंधित हो सकती है, या एक विशिष्ट अध्ययन की रुचि की स्वीकृति या पुष्टि के संबंध में हो सकती है।


(ख) प्राचल समग्र की सभी इकाइयों के लक्षण या विशेषताओं के माप प्राचल कहलाते है। -


लक, टेलर, तथा रुबिन के अनुसार, "यह एक मूल्य या विवरण है

जो पूरे समूह की सत्य विशेषताओं का वर्णन करता है।" गणितीय रूप से इसे औसत, विस्तार या सांख्यिकीय माप के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। उदाहरण के लिए 5000 व्यक्तियों का खाद्य प्रवृत्ति का समानान्तर माध्य, प्रमाप विचलन, प्रयोग मात्रा, आयु एवं उपयोग का सह संबंध निदर्शन प्राचल कहलायेगा। यह वह मूल्य है जो दिये हुए नाप में संपूर्ण जनसंख्या के आवरण या ढकने पर प्राप्त किया जा सकता है।


(ग) प्रतिदर्शज प्रतिदर्शज वह मूल्य है जो कि जनसंख्या या समग्र के निदर्शनों से प्राप्त किया जाता है। यह एक अनुमान बताता है कि समग्र प्राचल का क्या हो सकता है। उदाहरण के लिए, 50000 व्यक्तियों के समय में से यादृच्छित आधार पर 2000 व्यक्तियों का प्रतिदर्श निकाला जाये और उन निदर्शन इकाइयों के उपयोग के समानान्तर माध्य प्रमाण विचलन या उन 2000 व्यक्तियों की आयु एवं उपयोग मात्रा के सह-संबंध गुणांक ज्ञात किये जाये,

तो ये निदर्शन माप प्रतिदर्थना कड़े जायेंगे।


(घ) सूक्ष्मता यह भूल का प्रतिकूल है इसका निम्न शब्दों में वर्णन किया जा सकता है. हम निदर्शन से परिणाम कितनी निकटता से उत्पन्न कर सकते है जो कि प्राप्त किये जा सकते थे, यदि हम माप में उसी पद्धति का प्रयोग करते हुए समग्र गणना करते है।"


मुख्यत इसमें निम्न दो बातें सम्मिलित होती हैं (1) इसका प्रतिनिधित्वता (2) स्थिरता


(ड) विश्वास्यता एक निदर्शन से प्रतिदर्शज निकालने में कुछ मात्रा तक निदर्शन त्रुटि की प्रत्याशा की जाती है।

प्राचल से वही उद्देश्य पूरे करती है जो में सामान्य बटन में प्रमाप द्वारा सम्पादित किये जाते है, अर्थात प्रमाण त्रुटि से विश्वसनीय सीमा निर्धारित करती है जिनके बीच प्राचल या अन्य संबंधित प्रतिदर्शन के पाये जाने की सुनिश्चित प्रायकिता होती है। उदाहरण के लिए, एक शहर विशेष में घरो के सर्वेक्षण से यह ज्ञात हुआ कि उनमें से 808 प्रतिशत के पास हीरो होण्डा मोटरसाइकिल है। इस निदर्शन प्रतिदर्शन को पूरे शहर में लगाने पर विश्लेषक यह बताता है कि एक व्यक्ति यह आशा कर सकता है कि 95 प्रतिशत सभावना के साथ शहर के लिए प्राचल + 0.6 प्रतिशत के भीतर है अतः उसने निष्कर्ष यह निकला कि शहर में 8.2 से 94 प्रतिशत घरों में हीरो होण्डा मोटर साइकिल है. इस विश्वास के साथ कि अवसर 20 में से 19 है जो कि समग्र प्राचल के उस विस्तार में सम्मिलित है।