विज्ञापन प्रभावशीलता का माप - measurement of advertising effectiveness
विज्ञापन प्रभावशीलता का माप - measurement of advertising effectiveness
आर. एस. डावर के अनुसार, विज्ञापन प्रभावोत्पादकता को इसके लक्ष्यों के संदर्भ में ही मापा जाना चाहिए। चूंकि विज्ञापन का उद्देश्य कंपनी जागरुकता का सृजन, अनुकूल की छवि निर्माण तथा विक्रय में वृद्धि करना होता है। अतः इन्ही सदनों में विज्ञापन प्रभावोत्पादकता का मूल्यांकन या माप करने हेतु
निम्न विधियों का प्रयोग किया जा सकता है।
(क) जागरुकता सर्वेक्षण - प्राय इस प्रकार के परीक्षण का प्रयोग नये उत्पाद की घोषणा तथा उसके बाड ट्रेडमार्क क्रय आदि के संदर्भ में किया जाता है। व्यक्तियों का विज्ञापन के प्रति ज्ञान कैसा है, इसको सामानयतः 'हा या नहीं प्रश्न के द्वारा मापा जा सकता है। उदाहरण के लिए क्या आपने इस साबुन का विज्ञापन देखा है
इस विधि में डाक द्वारा प्रश्नावली या टेलीफोन सर्वेक्षण विधि का प्रयोग करके विज्ञापन की प्रभावोत्पादकता के संदर्भ में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। विज्ञापन प्रभावोत्पादकता माप की इस विधि के प्रमुख लाभ निम्नलिखित है
(i) न्यूनतम लागत लगती है
(ii) शीघ्रता से जानकारी प्राप्त की जा सकती है
(iii) हा या नहीं में जानकारी मिलने के कारण उन्हें सफलता से समझा जा सकता है
इस विधि का सबसे प्रमुख दोष यह है कि इसमें जो भी सूचनाएं प्राप्त होती है उनको अन्य विक्रय संवर्द्धन विधियों से पृथक करना कठिन होता है। अतः वास्तविक अर्थ में यह ज्ञात नहीं होता है कि विज्ञापन कितना प्रभावशाली रहा है।
(ख) पुनः स्मरण परीक्षण - अधिकांश विज्ञापनों का प्रमुख उद्देश्य कंपनी उत्पादों के लिए प्राथमिकता को सृजित करना होता है जोकि बाद में उस समय प्रयोग की जाती है जब उपभोक्ता उत्पाद खरीदने को तैयार होता है। अन्य शब्दों में यह विज्ञापन के बाद उसकी प्रभावोत्पादकता मापने की एक तकनीक है जिसमें उत्तरदाता या प्रार्थी को विज्ञापन नहीं दिखाया जाता अपितु उससे कुछ प्रश्न किये जाते हैं। उदाहरण के लिए
(i) शेविंग क्रीम के संबंध में इन दिनों आपने कौनसा विज्ञापन देखा या सुना है?
(ii) क्या आपको आमूल माचो के विज्ञापन का स्मरण है?
(iii) क्या आपने इन दिनों गोदरेज हेयर केयर का विज्ञापन देखा या सुना है?
यदि अधिकांश उपभोक्ताओं के उत्तर हा में प्राप्त होते हैं तो सामान्यत विज्ञापन को प्रभावी माना जा सकता है। वर्तमान में अनेक बड़ी व्यावसायिक संस्थाए इस संबंध में इलेक्ट्रानिक यंत्रों एवं उपकरणों का प्रयोग करती है।
(ग) दृष्टिकोण एवं मनोवैज्ञानिक सर्वेक्षण - दृष्टिकोण तथा मनोवैज्ञानिक सर्वेक्षण का प्रयोग उत्पाद, ब्राण्ड, विज्ञापन आदि के प्रति अनुकूल या प्रतिकूल
राय का मूल्यांकन के लिए किया जाता है। दृष्टिकोण सर्वेक्षण का प्रमुख उदेश्य प्रश्नों के उत्तर द्वारा विज्ञापन ब्राण्ड आदि के संबंध में व्यक्तिगत राय जानने से है
(i) क्या आप एल. जी. वाशिंग मशीन पसन्द करती हैं?
(ii) आप सोनी बांड का किस प्रकार वर्णन करेंगे? यहां पर सकारात्मक या धनात्मक दृष्टिकोण के द्वारा जो सूचनाएं प्राप्त होती है. ये स्मरण परीक्षण या जागरुकता परीक्षण से कही ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।
(घ) ऑर्डर आफ मैरिट - इस संबंध में महत्वपूर्ण तकनीक है जिसमें उपभोक्ताओं को विज्ञापन की अनेक प्रतिलिपिया दी जाती है और प्राथमिकता देते हुए प्रतिक्रिया व्यक्त करने का आग्रह किया जाता है।
(ड) विक्रय विश्लेषण - विक्रय विश्लेषण के द्वारा भी विज्ञापन प्रभावोत्पादकता को मापा जा सकता है। विक्रय विश्लेषण के संबंध में निम्न तीन दृष्टिकोण है
(अ) विक्रय परिणाम तथा मिश्रण परिवर्तन
(ब) स्थानीय बाजार भाग परिवर्तन
(ग) ब्राण्ड बाजार भाग परिवर्तन
स्थानीय बाजार माग परिवर्तन सामान्यत इस बात के द्वारा ज्ञात किया जा सकता है कि सम्मति सूची में सामान्यतः स्थिति में कितना परिवर्तन हुआ है या विज्ञापन ने इस संबंध में कितना योगदान दिया है।
(त) ब्राण्ड गणना - कूपन की गणना तथा उनको छांटना अधिकांश प्रकार के विज्ञापनों तथा माध्यमो को मापने की एक महत्वपूर्ण विधि है। इसके लिए पत्रिका या मैगजीन में दिये गये कूपन का कितने उत्तरदाताओं ने प्रयोग किया है या रखा है, के आधार पर विज्ञापन प्रभावोत्पादकता को जाना जा सकता है। यदि इस विधि का नियमित रूप से प्रयोग किया जाता है तो इसके द्वारा महत्वपूर्ण बातों जैसे विक्रय प्रवृत्ति, विज्ञापन प्रभावशीलता आदि को ज्ञात किया जा सकता है।
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