माप पैमाना - measurement scale

माप पैमाना - measurement scale


मापन में अनुसंधानकर्ता रेंज में पैमाने के स्वरुप का आविष्कार करता है और फिर क्षेत्र में इस पैमाने के गुण संकेतों को चित्रित या परिवर्तित करता है। ऐसी स्थिति में अनेक प्रकार के संभावित पैमाने होते हैं। उपयुक्त चयन इस बात पर निर्भर करता है कि संगतता के नियम के बारे में अनुसंधानकर्ता क्या मानता है। प्रत्येक पैमाने की अपनी मान्यताएं होती है कि किस प्रकार वास्तविक संसार मे अवलोकन द्वारा प्रदेश संगतता को संख्यात्मक रूप प्रदान किया जाना है।


गुट एवं हाट के अनुसार सभी विज्ञानों की प्रवृत्ति अधिकाधिक यथार्थता की दिशा में अग्रसर होने की होती है। इस यथार्थता के कई रूप है किन्तु उसका एक आधारभूत रूप है क्रमबद्ध श्रेणियों का माप वैज्ञानिक प्रणाली का यह एक अत्यन्त महत्वपूर्ण चरण है

क्योंकि इसके बिना विपणन घटनाओं के मध्य पाये जाने वाले संबंधों का परीक्षण नहीं किया जा सकता है। पैमाने का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि यह अनुसंधानकर्ता को सिद्धान्तों एवं प्रस्थापनाओं के परीक्षण योग्य बनाता है। अनुसंधान निष्कपों की तुलना पैमानों के अभाव में असंभव नहीं तो कठिन अवश्य होती है। यद्यपि पैमाने के द्वारा वास्तविकता का पता लगाना आवश्यक नहीं होता है, फिर भी वैज्ञानिकों का मत है कि वास्तविकता के निकट पहुंचने के लिए यह एक सबसे अच्छा तरीका है।


सामान्य स्वीकृत पैमाना अवधारणा निम्न तीन विशेषताओं पर आधारित होती है-


(i) क्रम व्यवस्थित होता है। एक क्रम अन्य क्रमों से अधिक या कम हो सकता है। 


(ii) संख्याओं के मध्य अंतर क्रमबद्ध होता है किसी भी समूहों की संख्या का अंतर अन्य समूहों से कम या ज्यादा या बराबर हो सकता है।


(iii) नम्बर श्रृंखला शून्य से ही प्रारम्भ होती है।


कम दूरी और उत्पत्ति की विशेषताएं संयुक्त रूप से मापन पैमाने का निम्न वर्गीकरण प्रस्तुत करती है;


1. सामान्य पैमाना


2. क्रम सूचक पैमाना


3. अन्तराल पैमाना


4. अनुपात पैमाना।


1. सामान्य पैमाना - सामाजिक विज्ञान एवं व्यावसायिक अनुसंधान में (विशेषतः विपणन अनुसंधान में) अन्य पैमानों की तुलना सामान्य पैमाने का सम्मवत: सर्वाधिक उपयोग किया जाता है जब अनुसंधानकर्ता सामान्य पैमाने का प्रयोग करता है तो वह समूह को अनेक समूहों या श्रेणियों में विभक्त कर दिया जाता है जोकि पारस्परिक रूप में अपवर्जक तथा सामूहिक रूप में विस्तृत व्याख्यापूर्ण होते है।


2. क्रम सूचक पैमाना - इस पैमाने में सामान्य पैमाने की अतुलनीय विशेषताओं के साथ सकेतों का क्रम भी सम्मिलित किया जाता है। क्रमसूचक माप - उस समय संभव होता है जबकि क्रिया सम्बन्धी स्वीकृति तथ्य औचित्यपूर्ण होता है। उदाहरण के लिए, यह स्वीकृत तथ्य बताता है

कि अगर अब से बड़ा है तथा बस' से बड़ा है तो 'अ' 'स' से महान या बड़ा है। अन्य शब्दों में इसमे परिस्थितियों या तथ्यों को कुछ श्रेणिया में प्रस्तुत किया जाता है। और उन्हें एक ऐसे क्रम में रखा जाता है जिससे यह ज्ञात हो जाये कि एक की तुलना में किसी दूसरे व्यक्ति को अधिक पसंद करते है। इस प्रकार इसमें त्यों या परिस्थितियों की एक दिशा के अनुसार भिन्नता बतायी जा सकती है। उदाहरण के लिए, लैपटॉप व कम्पूटर या टैबलेट कितने समय तक प्रयोग करने पर चल सकता है तो यहां विभिन्न ब्राण्डों के अनुसार इन्हें कमानुसार व्यवस्थित किया जाता है। जैसे-


(i) सर्वाधिक समय तक चलने वाला टैबलेट 


(ii) उचित समय तक चलने वाला टैबलेट 


(iii) सबसे कम चलने वाला टैबलेट


एमौर्य के अनुसार क्रम सूचक पैमाने के नियमित उदाहरणों में मत या प्राथमिकता पैमाने को सम्मिलित किया जाता है। इसके साथ ही समूह तुलना विधि या रेक विधि का क्रमसूचक पैमाने से व्यापक रूप में प्रयोग किया जा सकता है। चूँकि ऐसे पैमानों की संख्या केवल श्रेणी को ही बताती है, अतः केन्द्रिय प्रवृत्ति का उपयुक्त माप माध्यिका होती है बिखराव या फैलाव को मापने के लिए शतमक या चतुर्थक माप का प्रयोग किया जाता है। सह-संबंध विधि का भी सीमित उपयोग किया जा सकता है।


यहा संक्षेप में माध्यिका को उदाहरण सहित स्पष्ट किया जा रहा है।


→ माध्यिका यह समक श्रेणी का वह चर है जो समूह को दो बराबर भागों में से इस प्रकार बाटता है

कि एक भाग में सारे मूल्य मध्यका से अधिक और दूसरे भाग में सारे मूल्य उससे कम होते हैं। इस प्रकार यह केन्द्रिय मूल्य है जो क्रमबद्ध समक माला की दो बराबर भागों में विभाजित करता है।


3. अन्तराल पैमाना - अन्तराल पैमाने में सामान्य तथा क्रमबद्ध पैमाने के साथ एक अन्य शक्ति या गुण होता है, और यह है कि इसमें अन्तराल की समता की अवधारणा को ही सम्मिलित किया जाता है। तापमान मापन इसका सर्वोत्तम उदाहरण है। प्राय जब प्रवृत्तियों, प्राथमिकताओं या अन्य निर्णय योग्य बातों को मापने का प्रयास किया जाता है तो संभवतः अन्तराल पैमाने का प्रयोग किया जाता है इस प्रकार के पैमाने के द्वारा विभिन्न वर्गों या व्यक्तियों के बीच पाये जाने वाले मापन अंतर का पता लगाया जाता है। उदाहरण के लिए विभिन्न प्रवृत्ति नावो के लिए स्थिति मूल्य के अनुमान हेतु व्यक्तियों की संख्या का प्रयोग करते हुए सम-अन्तराल पैमाने के विकास का प्रयास किया जा सकता है।

थर्स्टन की सम- अन्तराल पैमाना पद्धति इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।


सम- अन्तराल इस पद्धति के अन्तर्गत किसी महत्वपूर्ण विषय या प्रवृत्ति के संबंध में उपभोक्ताओं से विभिन्न प्रकार के विचार या उनके अभिनत ज्ञात किये जाते है संबधित व्यक्तियों से अत्याधिक पसंद की अवस्था से अत्याधिक नापसंद की अवस्था तक जितने भी प्रकार के विचार है. प्रश्नों के उत्तरों के रूप में ज्ञात कर लिये जाते है तत्पश्चात पुनः उन्हे अत्यधिक पसंद की स्थिति से अत्यधिक नापसंद तक की स्थिति तक के प्रश्नों को आरोही या अवरोही क्रम में लगा दिया जाता है। इस क्रम में सातत्यक की स्थापना की जाती है। विभिन्न इकाइयों के यथार्थ कम का निर्धारण विषय या समस्या से संबंधित विशेषज्ञों मतानुसार निर्धारित किया जाता है।


महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रकार के पैमाने में इकाइयों की क्रमानुसार राशिया इस प्रकार बनाई जाती है कि एक और अनुकूल तथा दूसरी और प्रतिकूल विचारों को रखा जाता है तथा प्रत्येक इकाई की दूरी की मापन यात्रा समान होती है। इसी को सम अन्तराल पैमाना कहा जाता है।


एमौर्य का मत है कि अन्तराल पैमाना, कोटि पैमाने की अपेक्षा न केवल अधिक शक्तिशाली माप उपलब्ध करता है, अपितु विषय को शीघ्र तथा


कम प्रयास के साथ समाप्त कर देता है।


अन्तराल पैमाने के साथ महत्वपूर्ण सांख्यिकीय यंत्रों का प्रयोग किया जा सकता है केन्द्रिय प्रवृत्ति के माप हेतु गणितीय माध्य उपयोगी होता है। जबकि अधिकरण या फैलाव के माप हेतु प्रमाण विचलन सर्वाधिक प्रयोग की जान वाली पद्धति है उत्पाद क्षण सह-सम्बन्ध तकनीक भी उपयुक्त है और सांख्यिकीय सार्थकता के लिए "T-Tests" और "F-Tests" को अपनाया जा सकता है।


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4. अनुपात पैमाना - इस पैमाने में उपरोक्त वर्णित सभी पैमानों के गुणों के साथ पूर्ण शून्य या उत्पत्ति की अवधारणा भी सम्मिलित होती है। अनुपात पैमाना एक चल की वास्तविक मात्रा को प्रस्तुत करता है। भौतिक आयामों के माप, जैसे भार, ऊँचाई दूरी या क्षेत्र इसके उदाहरण है। विपणन अनुसंधान में विभिन्न क्षेत्रों में अनुपात पैमाने को देखा जा सकता है।