व्यापार रूट के निवेश रूट की तुलना में गुण - Merits of the business route as compared to the investment route

व्यापार रूट के निवेश रूट की तुलना में गुण - Merits of the business route as compared to the investment route


निम्न दशाओं में व्यापार रूट के तुलना में प्राथमिकता दी जाती है- 


(क) बड़े पैमाने की बचते


व्यापार रूट में उत्पादन कियाएं मूल देश में केंद्रित रहती है। वहां से अतिरिक्त उत्पादन को अन्य देशों में निर्यात किया जाता है। अतः मूल देश में उत्पादन बहुत ही बड़े स्तर पर किया जाता है। इससे बड़े पैमाने की बचतं प्राप्त होती है उत्पादन लागत में कमी आती है. श्रम विभाजन व विशिष्टिकरण के लाभ प्राप्त होते है। कई बार ये लाभ इतने अधिक होते हैं कि टैरिफ व गैर-टैरिफ बाधाओं के अतिरिक्त बोझ व परिवहन लागत के अतिरिक्त व्यय को भी पीछे छोड़ देते हैं।

अतः यदि बड़े पैमाने की बचत व्यापार रूट की रुकावटों (टैरिफ व गैर-टैरिफ बाधाओं व परिवहन लागत से अधिक है तो व्यापार रूट अधिक बेहतर होगा। 


(ख) कम संसाधनों की आवश्यकता


व्यापार रूट में निवेश रूट की तुलना में कम संसाधनों विशेषकर कम पूंजी की आवश्यकता होती है। उत्पादन कियाएं केवल मूल देश में ही केंद्रित होती हैं अंत कम पूंजी निवेश, कम प्रबंध कौशल की आवश्यकता होती है, समन्वय स्थापित करने में अधिक मुश्किल नहीं आती। अतः यदि वैश्विक इकाई के पास संसाधन कम मात्रा में उपलब्ध है तो व्यापार रूट निवेश रूट से अधिक बेहतर है।


(ग) सर्वव्यापी उत्पादों के लिए उपयुक्त


कुछ उत्पाद सर्वव्यापी होते हैं, अर्थात् सपूर्ण वैश्विक बाजार में लगभग एक जैसा उत्पाद बेचा जाता है; जैसे केलकुलेटर घड़िया, प्रिन्टर आदि ऐसे सर्वव्यापी उत्पादों को एक ही उत्पादन केंद्र पर निर्मित किया जा सकता है अर्थात् एथनोसेंट्रिक उत्पादन दृष्टिकोण अपना कर एक ही उत्पादन केंद्र पर उत्पाद बनाकर इन्हें अन्य देशों में निर्यात किया जा सकता है। इसके अलावा जब उत्पाद बहुत भारी नहीं है, तब भी उत्पादन कियाओं को केंद्रित किया जा सकता है क्योकि कम भारी उत्पादों में परिवहन लागत अधिक नहीं होती। औद्योगिक उत्पादों व अन्य उत्पादों, जिनकी मांग कम होती है, जैसे-एयरक्राफ्ट हैलीकॉप्टर, समुद्री जहाज महंगे सुरक्षा उपकरण आदि की दशा में भी उत्पादन कियाओं को केंद्रित किया जाता है। यहां व्यापार रूट अपना कर इन उत्पादों को एक ही उत्पादन केंद्र से निर्यात किया जाता है। ऐसे उत्पादों की दशा में विभिन्न देशों में निवेश रूट लाभप्रद नहीं होगा,

क्योंकि इन उत्पादों की मांग कम होने के कारण विभिन्न स्थानों पर उत्पादन केंद्र स्थापित करना व्यावहारिक नहीं होगा। 


(घ) मेजबान देश में अनिश्चित व्यावसायिक वातावरण:


यदि मेजबान देश का व्यावसायिक वातावरण विभिन्न कारणों, जैसे-राजनीतिक अस्थिरता कानूनी व्यवस्था का कमजोर होना, सांप्रदायिक दंगे अस्थिर सरकारी नीतियों आदि के परिणामस्वरूप अनिश्चित है तथा इसका पूर्वानुमान लगाना बहुत कठिन है, तो ऐसी स्थिति में निवेश रूट का अपनाना उपयुक्त नहीं है। इसके अलावा यदि वैश्विक कंपनी मेजबान देश के सांस्कृतिक वातावरण से भली- भाति परिचित नहीं है, तो निवेश रूट अपनाना अनुपयुक्त होगा।


(ङ) अल्पकाल हेतु प्रवेश


यदि वैश्विक इकाई मेजबान देश मे अल्पकाल के लिए ही प्रवेश करना चाहती है, तो व्यापार रूट को अपनाया जाता है; जैसे-यदि मूल देश की अर्थव्यवस्था में आर्थिक मंदी का वातावरण है। अत अल्पकाल के लिए घरेलू देश के अतिरिक्त उत्पादन को अन्य देशों में बेचा जाना है तो व्यापार रूट बेहतर होगा।


(च) बंद करने में सरलता:


व्यापार रूट को बंद करना बहुत सरल है क्योंकि इसमें मेजबान देश में कोई उत्पादन इकाई स्थापित नहीं की जाती जब भी वैश्विक कंपनी मेजबान देश से व्यावसायिक संबंध समाप्त करना चाहती है

तो इसमे कोई कठिनाई नहीं आती। जबकि निवेश प्रारूप में मेजबान देश से व्यावसायिक संबंध समाप्त करने के लिए यहां स्थापित सहायक कंपनी का समापन करना पड़ता है, जो बहुत ही जटिल प्रक्रिया है।


(छ) टेक्नोलॉजी पर नियंत्रण


व्यापार रूट में टेक्नोलॉजी संबंधी रहस्य गुप्त रहते हैं। मेजबान देश में इनका दुरूपयोग समय नहीं होता, क्योंकि उत्पादन कियाएं मूल देश में ही केंद्रित होती है मूल कंपनी का नवाचारी टेक्नोलॉजी पर नियंत्रण बेहतर होता है, परंतु निवेश प्रारूप में उत्पादन कियाए मेजबान देश में स्थापित सहायक कंपनी में की जाती है जिससे टेक्नोलॉजी संबंधी रहस्य गुप्त नहीं रहते इनका मेजबान देश में दुरुपयोग होना संभव होता है।


(ज) रोजगार सृजन


व्यापार रूट में उत्पादन कियाए मूल देश में केंद्रित होती है। इससे मूल देश में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है। जबकि निवेश रूट में उत्पादन कियाए मेजबान देश में की जाती है। इससे रोजगार सृजन भी मेजबान देश मे ही होता है। अतः मूल देश में बेरोजगारी की समस्या है. तो व्यापार रूट मूल देश के लिए बेहतर होगा।


उपरोक्त चर्चा से स्पष्ट है कि व्यापार रूट व निवेश रूट दोनों के ही सापेक्षिक गुण व दोष है अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय में दोनों प्रारूप ही प्रचलित हैं। वर्तमान स्थिति में वैश्वीकरण व उदारीकरण की विचारधारा बहुत प्रचलित हो रही है, जिस कारण टैरिफ व गैर-टैरिफ बाधाए बहुत कम होती जा रही है। अतः ऐसी स्थिति में व्यापार रूट का भी बहुत महत्व है।

इसके साथ-साथ उदारीकरण व वैश्वीकरण की बढ़ती प्रवृत्तियों को ध्यान में रखते हुए अधिकतर देशों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर लगे प्रतिबंधा को समाप्त किया जा रहा है। विदेशी निवेश के अंतप्रवाह को बढ़ावा देने के लिए उन्ह मेजबान देशों में बहुत से प्रोत्साहन दिए जा रहे है अत बहुत सी बहुराष्ट्रीय कंपनिया अन्य देशों में उपलब्ध उच्च क्वालिटी के कच्चे माल व सस्ती श्रम लागत से लाभान्वित होने के लिए यहां निवेश रूट अपना कर सहायक कंपनियां स्थापित कर रही है. जैसे विकसित देशों की कंपनियां चीन व भारत में उपलब्ध सस्ते श्रम से आकर्षित होकर निवेश रूट अपना कर यहां सहायक कंपनिया स्थापित कर रही है।


व्यापार रूट व निवेश रूट के अलावा विदेशी व्यवसाय में प्रवेश के अन्य प्रारूप केवल उद्देश्य के लिए ही किए जाते है जैसे- तकनीकी सहयोग केवल उसी दशा में किया जाता है जब एक देश की व्यावसायिक इकाई केवल टेक्नोलॉजी का ही अन्य देश में निवेश करना चाहती है। इस दशा में मूल कंपनी अपनी नवाचारी टेक्नोलॉजी अन्य देश में उपलब्ध करवा कर फीस, रॉयल्टी कमाती है प्यूहरचनात्मक गठबंधन भी एक विशेष उद्देश्य के लिए ही होता है। इस तरह अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय में प्रवेश के सर्वाधिक प्रचलित प्रारूप दो ही हैं और वह है निवेश प्रारूप व व्यापार प्रारूप।