अति लघु लघु एवं मध्यम उद्यम , परिभाषा , प्रकार - Micro Small and Medium Enterprises, Definition, Types
अति लघु लघु एवं मध्यम उद्यम , परिभाषा , प्रकार - Micro Small and Medium Enterprises, Definition, Types
भारत सरकार ने अति लघु लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम 2006 अधिनियमित किया है जिसके अनुसार अति लघु लघु एवं मध्यम उद्यमों की परिभाषा निम्नवत है किसी वस्तु के निर्माण अथवा उत्पादन, प्रसंस्करण अथवा परिक्षण करने वाले उद्यम निम्न के अनुसार -
(1) अति लघु उद्यम वह होता है, जिसमें संयंत्र एवं मशीनरी पर निवेश रू 25 लाख तक होता है ।
(2) लघु उद्यम वह है, जिसमें संयंत्र एवं मशीनरी पर निवेश रू 25 लाख से अधिक किंतु 5 करोड़ से अधिक नहीं होता है तथा
(3) मध्यम उद्यम वह है, जिसमें संयंत्र एवं मशीनरी पर व्यय 5 करोड़ से अधिक किंतु 10 करोड़ से अधिक नहीं होता।
उद्यम ही सफलता की कुंजी है। किसी भी राष्ट्र की प्रगति एवं विकास में लघु एवं कुटीर उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है ऐसे अविकसित क्षेत्रों में जहां औद्योगिकरण अब तक नहीं हो पाया है, लघु, कुटीर एवं घरेलू उद्योग स्थापित करके पूजी तथा विकास में वृद्धि की जा सकती है विकासशील देशों के लिए लघु तथा कुटीर उद्योग लाभकारी सिद्ध हुआ है, क्योंकि इनकी स्थापना कम पूंजी द्वारा की जा सकती है तथा इनके लिए उच्च प्रौद्योगिक शिल्प की आवश्यकता भी नहीं होती। हमारे देश के कुल निर्यात का एक बड़ा भाग लघु उद्योगों से ही प्राप्त होता है। ऐसे में लघु उद्योग की स्थापना करना लाभकारी सिद्ध होगा।
लघु उद्योग, स्वरोजगार व प्रबंध क्षेत्रों में मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते हैं। लघु, सुक्ष्म एवं मध्यम उद्योग वे उद्योग हैं, जिनमें काम करने वालों की संख्या एक सीमा से कम होती है
तथा उनका वार्षिक उत्पादन भी एक सीमा के अंदर रहता है। किसी भी देश के विकास में इनका महत्वपूर्ण स्थान है।
परिभाषा
एशिया एवं सुदूर पूर्व के आर्थिक आयोग द्वारा कुटीर उद्योगों को इस प्रकार परिभाषित किया गया है-
कुटीर उद्योग वे उद्योग हैं, जिनका एक ही परिवार के सदस्यों द्वारा पूर्णरूप से अथवा आंशिक रूप से संचालन किया जाता है।
भारत के द्वितीय योजना द्वारा इसी परिभाषा को मान्यता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त प्रो. काले ने कुटीर उद्योगों को परिभाषित करते हुए कहा है -
प्रकार
कुटीर उद्योगों को निम्नलिखित वर्गों में रखा जाता है-
(1) ग्रामीण कुटीर उद्योग
(2) नगरीय कुटीर उद्योग
कुटीर उद्योग वह उद्योग है, जिनका एक ही परिवार के सदस्यों द्वारा पूर्णरूप से अथवा आंशिक रूप से संचालन किया जाता है।
कुटीर व घरेलू उद्योग परियोजनाएं नए उद्यमी व संभावित को उद्योग-व्यवसाय की स्थापना व संवर्द्धन की दिशा में प्रेरित करती है, जिससे वे देश के आर्थिक विकास में अपना योगदान बढ़ा सके। इस पुस्तक का उद्देश्य प्रशासन द्वारा बनाई गई उद्योग प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी उद्यमियों तक पहुचाना है, ताकि वे उपलब्ध / सुविधाओं का अधिकाधिक लाभ प्राप्त कर सकें।
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