गलती - Mistake
गलती - Mistake
यदि किसी बात के संबंध में पक्षकारों को भ्रमात्मक विश्वास है तो कहा जाता है कि वे गलती पर हैं। गलती निम्नलिखित तीन प्रकार की हो सकती है:
i. तथ्य संबंधी गलती
ii. नियम संबंधी गलती
iii. पक्षकार संबंधी गलती
i. तथ्य संबंधी गलती - भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 20 के अनुसार, “जब ठहराव के दोनों पक्षकार ठहराव के किसी आवश्यक तथ्य संबंधी विषय पर गलती में हों तो यह तथ्य संबंधी गलती होगी।
जब कोई गलती ठहराव के किसी महत्वपूर्ण तथ्य से संबंधित हो तथा गलती एक पक्षकार की न होकर दोनों पक्षकार की हो तो इसे तथ्य संबंधी गलती कहा जाता है। उदाहरण के लिए, सुमित, अमित को जहाज से आ रहे माल को देने का ठहराव करता है जो अमेरिका से आनेवाला है, किन्तु जहाज माल आने से पहले डूब चूका था जिसकी जानकारी दोनों पक्षकारों को नहीं थी अतः यह ठहराव दोनों पक्षकारों की गलती होने के कारण व्यर्थ है
ii. नियम संबंधी गलती - भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 21 के अनुसार, “प्रत्येक व्यक्ति से यह आशा की जाती है की उसे देश के कानूनों का ज्ञान है, अतः कानून की अज्ञानता लक्ष्य नहीं है। "
ऐसा कानून जो भारत में लागु नहीं है, की गलती होने पर अनुबंध व्यर्थ होगा। प्रत्येक व्यक्ति से यह उम्मीद की जाती है कि उसे देश के कानून का ज्ञान है। अतः कानून से संबंधित गलती के लिए किसी को भी क्षमा नहीं कियस जा सकता है। उदाहरण के लिए, अमन, चमन का मोबाइल चोरी करता है और पकड़े जाने पर वह कहता है कि उसे मालूम नहीं था कि चोरी करना दंडनीय अपराध है तो इस आधार पर उसे क्षमा नहीं किया जा सकता है।
iii. पक्षकार संबंधी गलती - पक्षकार संबंधी गलती के कारण भी अनुबंध व्यर्थ हो जाता है । उदाहरण के लिए, सुनिल, अनिल के साथ अनुबंध करना चाहता है, और गलती से अनुबंध सुरेश के साथ हो जाता है तो इस अनुबंध का कोई अस्तित्व नहीं होगा और अनुबंध व्यर्थ होगा ।
उपरोक्त विवेचना से यह स्पष्ट है कि यदि कोई सहमति उत्पीड़न, अनुचित प्रभाव, कपट, मिथ्या वर्णन व गलती के कारण प्रदान की जय तो वह स्वतंत्र सहमति नहीं होगी।
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