उपभोक्ताओं के समस्याओं का स्वरूप - nature of consumer problems
उपभोक्ताओं के समस्याओं का स्वरूप - nature of consumer problems
अनैतिक तथा बेईमान व्यापारी कई प्रकार से उपभोक्ताओं की धोखा दे सकते हैं। इनमें से कुछ अनुचित गतिविधियाँ निम्नलिखित हो सकती हैं :
i. मिलावट - व्यापारी द्वारा बेची जा रही वस्तु में उससे घटिया गुणवत्ता की चीज़ मिलकर उपभोक्ता को देना मिलावट कहलाता है। इस तरह की मिलावट अनाज, मसलों, चाय की पत्ती, खाद्य तेल इत्यादि में की जा सकती है। उदाहरण के लिए घी या मक्खन में वनस्पति तेल की मिलावट की जा सकती है।
ii. नकली चीज़ों की बिक्री- व्यापारी द्वारा असली उत्पाद के बदले उपभोक्ताओं को ऐसी चीज़ की बिक्री करना जिसकी कोई खास कीमत नहीं है। ऐसा अक्सर दवाओं और स्वास्थ्य रक्षक उत्पादों में होता है।
ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं जिनमें ग्लूकोज के पानी की बोतल में आसूत (डिस्टिल्ड) जल पाया जाता है।
iii. नाप टोल के गलत पैमाने का इस्तेमाल - नाप तोल के गलत पैमाने का इस्तेमाल व्यापारियों द्वारा अपनाया जानेवाला एक और अनुचित तरीका है। तोल का बिकने वाली चीजें जैसे सब्जी, अनाज चीनी और दालें या नाप कर बेचीं जाने वाली चीजें जैसे कपड़े या सूत पीस वगैरह कभी-कभी वास्तविक तोल या नाप से कम पाई जाती है। उदाहरण के लिए, मिठाइयाँ अक्सर डिब्बे के साथ ही तोल दिया जाता है, जो 50 से 100 ग्राम तक का होता है।
iv. जाली माल की बिक्री - व्यापारियों द्वारा ऐसी वस्तु बेचना जिस पर बेहतर क्वालिटी का निशान दिया गया है परन्तु वास्तव में वह समान उसके अनुरूप नहीं है। उदाहरण के लिए,
धुलाई का साबुन या पाउडर, ट्यूबलाइट, जैम, खाने का तेल और दवाओं पर जाने-माने ब्रांड का लेबल लगाकर बेचना ।
v. जमाखोरी व कालाबाजारी - जब कोई आवश्यक वस्तु खुले बाज़ार में उपलब्ध नहीं करायी जाती है और जानबूझकर व्यापारी इसे गायब कर देते हैं तो इसे जमाखोरी कहा जाता है। इसका उद्देश्य उस चीज़ का कृत्रिम आभाव पैदा कर उसकी कीमत में उछाल लाना होता है। इस तरह से जमा किये गए सामान को चोरी छिपे ऊँची कीमत पर बेचना कालाबाजारी कहलाता है। उदाहरण के लिए समय-समय पर प्याज तथा अरहर की दाल की जमाखोरी कर उसके कालाबाजारी की सूचना समाचार पत्रों में प्रकाशित होता रहता है।
vi. बिना कोई अतिरिक्त मूल्य लिये उपहार बिना कोई अतिरिक्त मूल्य लिये या कुछ चीज़ों की अगली खरीद पर उपहार प्राप्त करने के लिए कूपन देना आदि कुछ ऐसे तरीके हैं
जिनसे उपभोक्ताओं को उत्पाद खरीदने के लिए लुभाया जाता है। कई बार डीलर उपभोक्ताओं के बीच प्रतियोगिता या लाटरी की भी घोषणा करता है, जबकि उसकी नीयत कोई ईनाम देने की नहीं होती है।
vii. भ्रमात्मक विज्ञापन भ्रमात्मक विज्ञापनों के जरिये भी उपभोक्ताओं को छला जाता है। ऐसे विज्ञापन किसी उत्पाद या सेवा की गुणवत्ता अच्छी होने का दावा करते हैं और इस उत्पाद या सेवा की उपयोगिता का झूठा आश्वासन देते हैं। उदाहरण के लिए, एक कंपनी ने घोषणा की कि वह एक विदेशी कंपनी के तकनीकी सहयोग से 150 सी.सी. स्कूटर का निर्माण कर रही है, हालांकि वास्तव में ऐसा कोई सहयोग नहीं किया गया था।
viii. हल्के स्तर के उत्पादों की बिक्री ऐसी वस्तुएं बेचना जो गुणवत्ता के घोषित स्तर या मानक स्तर, विशेषकर सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं होती है। ऐसे उत्पादों में प्रेशर कूकर, स्टोव, बिजली के हीटर, आदि हैं।
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