उचित वैश्वीकरण की आवश्यकता - the need for proper globalization

उचित वैश्वीकरण की आवश्यकता - the need for proper globalization


वैश्वीकरण से सभी को एक समान लाभ नहीं हुआ है। मुख्यत तकनीकी शिक्षा वाले तथा सुयोग्य व्यक्ति ही वैश्वीकरण के वर्तमान प्रारूप से लाभान्वित हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले व्यक्तियों, अनपढ़, आकस्मिक, कम योग्यता वाले कर्मचारियों आदि को वैश्वीकरण के वर्तमान प्रारूप से अधिक लाभ नहीं हुआ है। आज विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे पर अत्यधिक निर्भर हो गई है। प्रत्येक देश में बहुराष्ट्रीय कंपनिया अपने उत्पाद बेच रही है। अब वैश्वीकरण एक अनिवार्यता बन चुकी है। अब प्रश्न यह उठता है कि किस प्रकार वैश्वीकरण के वर्तमान प्रारूप को सुधारा जाए ताकि समाज के सभी वर्ग वैश्वीकरण से लाभान्वित हो उचित वैश्वीकरण को विकास, रोजगार व समता के उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए।

वैश्वीकरण से सभी देशों को लाभ होना चाहिए तथा इससे विश्व के सभी लोगों के कल्याण के वृद्धि होनी चाहिए। सरकार को उचित वैश्वीकरण के लिए निम्न उपाय करने चाहिए


(क) श्रम कानून का सख्त पालन


सरकार को श्रम अधिनियमों में उचित प्रावधान बनाने चाहिए ताकि नियोक्ता, कर्मचारियों का शोषण न करें, उन्हें उचित मजदूरी दें, अच्छी कार्य दशाएँ प्रदान करे तथा कार्य की सुरक्षा उपलब्ध करवाए इन श्रम कानूनों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।


(ख) लघु उद्योगों का संरक्षण


सरकार को लघु व कुटीर उद्योगों के संरक्षण के लिए उचित टैरिफ नीति अपनानी चाहिए।

ये लघु व कुटीर औद्योगिक इकाईया बहुराष्ट्रीय कंपनियों से स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं कर सकती। अतः सरकार को इनके संरक्षण के लिए उचित कदम उठाने चाहिए अन्यथा ये बंद हो जाएगी तथा लाखों व्यक्ति बेरोजगार हो जाएंगे।


(ग) विश्व व्यापार संगठन स्तर पर अधिक रियायतों के लिए समझौते


भारत जैसे विकासशील देश की सरकार की अन्य विकासशील देशों (जो हमारे जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं) के साथ मिलकर डब्लू टी ओ के मंच पर अपनी समस्याएं रखनी चाहिए तथा विकसित देशों से विभिन्न टैरिफ व गैर-टैरिफ रियायतों की मांग करनी चाहिए। इससे हमें वैश्वीकरण के अधिक लाभ मिलेंगे टैरिफ रियायतों से अभिप्राय है आयात करों व निर्यात करो में कमी गैर-टैरिफ रियायतों का अर्थ है-

आयातो व निर्यातों से परिमाणात्मक प्रतिबंधों को कम करना या समाप्त करना अर्थात् आयात कोटा व निर्यात कोटा को समाप्त करना या कम करना ।


(घ) जन प्रचार व प्रदर्शन:


भारत जैसे विकासशील देशों के लोगों को वैश्वीकरण से उचित लाभ उठाने के लिए आगे आना होगा। उन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियों व विकसित देशों की अन्यायपूर्ण नीतियों के विरुद्ध सामूहिक आवाज उठानी चाहिए इस तरह के सामूहिक जन प्रचार व प्रदर्शन से विश्व व्यापार संगठन, विश्व बैंक आदि के नीति निर्माता प्रभावित होंगे तथा ये वैश्वीकरण से संबंधित उचित निर्णय लेंगे।