क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना की आवश्यकता - Need for setting up of Regional Rural Banks

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना की आवश्यकता - Need for setting up of Regional Rural Banks


क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको की स्थापना का मुख्य उद्देश्य एवं आवश्यकता यह थी कि ये बैंक उन छोटे एवं सीमांत किसानों, कृषि श्रमिकों तथा कारीगरों को साख एवं अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराएगें जिनकी साख संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति सहकारी बैंक तथा व्यापारिक बैंक जैसी वर्तमान साख संस्थाएं पर्याप्त रूप से पूरी नहीं कर सकती है।


(i) सहकारी बैंक - जहाँ तक इन बैंकों की सहकारी साख संरचना का संबंध है, इनमें प्रबंधकीय कौशल, साख देने के बाद निरीक्षण और ऋण वसूली का अभाव पाया जाता है। ये बैंक इस स्थिति में भी नहीं हैं कि वे आवश्यक संसाधनों का संग्रहण कर सकें।


(ii) व्यापारिक बैंक:- ये बैंक अधिकांश रूप से शहरों में स्थित है और ये शहर उन्मुख है, जहाँ तक कृषि साख संबंध है ये एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपनी विधियों, कार्य प्रणालियो, प्रशिक्षण एवं स्थिति विवरण को ग्रामीण वातावरण के अनुसार ढालना पडेगा। इसके अतिरिक्त ऊँचे वैतनिक ढाँचे, कर्मचारी प्रतिरूप और उच्च स्थापना व्यय के कारण इनकी प्रचालन लागत भी ऊँची है। अत इन परिस्थितियों में, व्यापारिक बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर वर्ग के लिए सस्ती दर पर साख उपलब्ध नहीं करा सकते।


(iii) नई संस्था की आवश्यकता- ग्रामीण आवश्यकताओं के अनुरूप एक ऐसी संस्था की स्थापना की आवश्यकता महसूस की गई जो ग्रामीण उन्मुख हो तथा जो ग्रामीण क्षेत्र में कमजोर वर्ग की साख आवश्यकता की पूर्ति कर सकें तथा ऊपर वाली दोनों संस्थाओं के दोषों को दूर रखकर उनके गुणों को मिला सके।

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंको की सहायता के रूप में, किसानों तथा ग्रामीण उद्योगों को न केवल दीर्घकाल में ऋण प्रदान कर सके बल्कि ग्रामीण गृहस्थों की जमाओं को भी गतिशील बना सके। भारत में ये ग्रामीण वित्तीय संरचना का अटूट अंग बन सके।


अतएव ग्रामीण बैंक को वह संस्था स्वीकार किया गया जो ग्रामीण स्पर्श और स्थानीय भावना को जोड़ता है। यह ग्रामीण समस्याओं एवं आधुनिक व्यावसायिक संगठन से घनिष्ठता बनाए रखने का गुण रखता है। इसमें वाणिज्य संबंधी अनुशासन, साधनों को गतिशील बनाने की योग्यता तथा मुद्रा बाजार तक पहुँचने की क्षमता है। ये सभी गुण एक व्यापारिक बैंक के पास अवश्य होने चाहिए। संक्षेप में ग्रामीण बैंकों की संस्था वह सस्था है, जो स्थानीय आधारिक ग्रामीण उन्मुख तथा वाणिज्यिक रूप से संगठित है।