प्रशिक्षण एवं विकास की आवश्यकता - need for training and development
प्रशिक्षण एवं विकास की आवश्यकता - need for training and development
प्रत्येक संगठन को अपने सभी कर्मचारियों को उनकी योग्यता, कौशल, नौकरी की उपयुक्तता आदि की परवाह किए बिना, प्रशिक्षण प्रदान करना चाहिए, चाहे वह संगठन बड़ा या छोटा, उत्पादक या गैर-उत्पादक, आर्थिक या सामाजिक, पुरानी या नव स्थापित कैसा भी हो। इस प्रकार, कोई संगठन यह तय नहीं कर सकता है कि उसे कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना है अथवा नहीं। प्रशिक्षण एक बार होने वाली प्रक्रिया नहीं है, यह किसी भी सुस्थापित संगठन में निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। इसके अतिरिक्त तकनीकी एवं प्रौद्योगिकीय परिवर्तन, स्वचालन आदि में कौशलों के अद्यतनीकरण की आवश्यकता होती है।
विशेष रूप से, निम्नलिखित कारणों से प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है:
1) कार्य आवश्यकताओं तथा संगठनात्मक आवश्यकताएं के साथ कर्मचारी विनिर्देशों के मिलान के लिए:
किसी कर्मचारी के पिछले अनुभव, योग्यता, कौशल, ज्ञान आदि के बावजूद पद तथा संगठनात्मक आवश्यकताओं के अनुरूप, कर्मचारी विनिर्देश उपयोक्त नहीं हो सकता है। इस प्रकार, हर प्रबंधन में कर्मचारी की वर्तमान विशिष्टताओं और नौकरी तथा संगठनात्मक आवश्यकताओं में विचलन मिलता है। इस अंतर को भरने के लिए प्रशिक्षण के माध्यम से पद एवं संगठनात्मक आवश्यकताओं के अनुरूप, कर्मचारी के कौशल ज्ञान, अभिवृत्ति, व्यवहार इत्यादि में परिवर्तन तथा विकास किया जाता है।
(ii) संगठनात्मक व्यवहार्यता और परिवर्तन प्रक्रिया
अधिकांश संगठनों का प्राथमिक लक्ष्य उनकी व्यवहार्यता को निरंतर पर्यावरणीय दबाव के कारण प्रभावित होने से बचाना है।
यदि संगठन खुद को इनके प्रति समायोजित नहीं करता है तो वह अपना बाजार खो देगा। यदि संगठन इन परिवर्तनों को अनुकूलित करने की इच्छा करता है, तो सबसे पहले उसे विशिष्ट कौशल प्रदान करने के लिए अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना होगा जिससे की वह परिवर्तनशील वातावरण के प्रति संगठन को समायोजित करने में सहायक होंगे तथा संगठनात्मक उत्पादकता में वृद्धि करेंगे। इससे संगठनात्मक प्रक्रिया एवं विकास में निरंतरता आती है। संगठनात्मक उत्पादकता को उत्पादन प्रक्रिया की दक्षता में विकास के माध्यम से सुधार जा सकता है, जो कि कर्मचारियों के वर्तमान ज्ञान एवं कौशल में वृद्धि के द्वारा संभव है। इन सभी लक्ष्यों की पूर्ति संगठन के मानव संसाधनों की प्रभावशीलता पर निर्भर है। मानव संसाधनों की प्रभावशीलता प्रशिक्षण के माध्यम से संभव है।
(iii) तकनीकी विकास
अपना अस्तित्व बनाए रखने और प्रभावशाली बने रहने के लिए हर संगठन को नवीनतम तकनीक अपनाना चाहिए,
अर्थात् मशीनीकरण, कम्प्यूटरीकरण और स्वचालन | नवीनतम तकनीकी साधनों और विधियों को अपनाना, तब तक पूरा नहीं होगा जब तक संगठन उन्हें संचालित करने के लिए कौशल रखने वाले कर्मचारियों से लैस नहीं होते हैं। इसलिए, संगठन को समय-समय पर तकनीकी कौशल और ज्ञान के परिवर्तन क्षेत्र में समृद्ध करने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना चाहिए।
(iv) संगठनात्मक जटिलता
बढ़ते हुए मशीनीकरण और स्वचालन के उद्भव के साथ, कई उत्पादों और उप-उत्पादों का निर्माण या विविध क्षेत्रों की सेवाओं में काम करना, देश के विभिन्न क्षेत्रों में या विदेशी देशों में संचालन का विस्तार,
ज्यादातर संगठनों की संरचना एवं स्वरुप जटिल हो गया है। इससे संगठनात्मक पदानुक्रम में संख्या और प्रकार के कर्मचारियों और उनके स्टारों में वृद्धि हुई है। इससे विस्तार और विविधता लाने वाली परिस्थितियों के अनुकूल और अनुकूलनीय गतिविधियों के समन्वयन और एकीकरण की जटिल समस्याएं पैदा होती हैं। इस स्थिति में विकास की आवश्यकताओं, विविधीकरण की समन्वय, एकीकरण और अनुकूलन क्षमता के कौशल में प्रशिक्षण की आवश्यकता है। संगठन निरंतर संगठनात्मक प्रभावशीलता को बेहतर बनाने के अवसरों की खोज करते हैं। किसी संगठन में नियोजित परिवर्तन और प्रभावशीलता निश्चित रूप से प्रशिक्षण पर निर्भर है क्योंकि यह लोगों को परिवर्तन एजेंट होने और प्रभावशीलता कार्यक्रमों को लागू करने के लिए तैयार करता है। इस प्रकार, प्रशिक्षण संगठनात्मक जटिलता की समस्याओं का हल करता है।
(V) मानवीय संबंध:
कर्मियों के प्रबंधन के प्रति दृष्टिकोण में चलन, वस्तु से लेकर साझेदारी दृष्टिकोण से होते हुए मानव संबंध दृष्टिकोण को पार करने तक बहुत हद तक परिवर्तित हुआ है। इसलिए आज, अधिकांश संगठनों के प्रबंधन को सुदृढ़ औद्योगिक संबंधों को बनाए रखने के अतिरिक्त मानवीय संबंध बनाए रखना आवश्यक है, जबकि अब तक प्रबंधक का दृष्टिकोण कर्मचारियों के प्रति पूरी तरह बदल नहीं पाया है और इस प्रकार के संबंधों के लिए वह आदी नहीं हैं। इसलिए मानव संबंधों में मानव समस्याओं (अलगाव, पारस्परिक और अंतर-समूह संघर्षों सहित ) से निपटने के लिए और मानव संबंधों को बनाए रखने के लिए प्रशिक्षण आवश्यक है।।
(Vi) कार्य नियुक्ति / आवंटन में परिवर्तनः
संगठन में वर्तमान कर्मचारियों को संगठन में उच्च स्टार के पद पर प्रोन्नत करने के लिए अथवा नए पद के लिए या स्थानान्तरण के कारण भी प्रशिक्षण आवश्यक होता है। पुराने कर्मचारियों को उन्नत विषयों, तकनीकों या प्रौद्योगिकी लैस करने के लिए भी प्रशिक्षण आवश्यक है। प्रशिक्षण की आवश्यकता यहाँ पर भी होती है: -
• उत्पादकता में वृद्धि
• उत्पाद/ सेवा की गुणवत्ता में सुधार
• किसी संगठन की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में
• संगठनात्मक पर्यावरण में सुधार
• स्वास्थ्य और सुरक्षा में सुधार
• अप्रचलन / स्थिरता / जड़ता से बचाव
• निजी विकास को प्रोत्साहित करना
• परिवर्तन के लिए प्रतिरोध को कम करना
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