कार्य से पृथक प्रशिक्षण विधियाँ - off-the-job training methods

कार्य से पृथक प्रशिक्षण विधियाँ - off-the-job training methods


कार्य से पृथक प्रशिक्षण विधियों को कार्य/ नौकरी के वातावरण से अलग संचालित किया जाता है, अध्ययन सामग्री प्रदान की जाती है, निष्पादन के बजाय सीखने पर पूर्ण एकाग्रता होती है, और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होती है। इसके अंतर्गत महत्वपूर्ण विधियाँ निम्नलिखित हैं:


1. व्याख्यान और सम्मेलन:


व्याख्यान और सम्मेलन शिक्षा की पारंपरिक और सीधी पद्धति है। प्रत्येक प्रशिक्षण कार्यक्रम, व्याख्यान और सम्मेलन के साथ शुरू होता है। यह अधिक दर्शकों के लिए मौखिक प्रस्तुति है। हालांकि, व्याख्यानों को अभिप्रेरित करने वाला तथा प्रशिक्षुओं के बीच रुचि पैदा करने वाला होना चाहिए।

वक्ता को विषय का अच्छा ज्ञान होना चाहिए। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में, प्रशिक्षण के लिए व्याख्यान और सेमिनार सबसे आम तरीके हैं।


2. वेस्टिब्यूल प्रशिक्षण:


वेस्टिब्यूल प्रशिक्षण, नौकरी के निकट प्रशिक्षण के लिए एक शब्द है, क्योंकि यह कुछ नए (शिक्षा) तक पहुंच प्रदान करता है। वेस्टइबुल प्रशिक्षण में, कार्यकर्ताओं को कारखाने के एक विशेष भाग में विशिष्ट नौकरियों पर एक प्रतिकृत वातावरण में प्रशिक्षित किया जाता है।


वास्तविक कार्यस्थल की परिस्थितियों के समान कार्य करने की अथवा प्रशिक्षण की परिस्थितियों को बनाने के लिए एक प्रयास किया जाता है।

ऐसी परिस्थितियों में श्रमिकों को प्रशिक्षित करने के बाद, वास्तविक कार्यशाला में प्रशिक्षित श्रमिकों को समान नौकरियों पर रखा जा सकता है।


इससे श्रमिकों को काम करने और प्रारंभिक भय से छुटकारा पाने के लिए, सर्वोत्तम तरीकों में प्रशिक्षण हासिल करने में मदद मिल सकती है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, इस पद्धति का उपयोग कम समय में श्रमिकों की अधिक संख्या को प्रशिक्षित करने के लिए किया गया था। इसे कार्य पर प्रशिक्षण के लिए प्रारंभिक तकनीक के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। अवधि कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ़्ते तक होती है। यह प्रशिक्षुओं को वास्तविक मशीनों पर महंगी गलतियों को करने से बचाव करता है।


3. सिमुलेशन व्यायामः


सिमुलेशन वास्तविक स्थिति के समान बिल्कुल कृत्रिम वातावरण होता है। प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए चार बुनियादी सिमुलेशन तकनीकों का उपयोग किया जाता है: प्रबंधन खेल, केस स्टडी, भूमिका निर्वहन, और इन बास्केट प्रशिक्षण।


(क) प्रबंधन खेल:


सावधानीपूर्वक एवं उपयुक्त रूप से डिजाइन किए गए खेल, कर्मचारियों में चिंतन आदतों, विश्लेषणात्मक क्षमताओं, तर्क क्षमताओं, समूह कार्य का महत्व, समय प्रबंधन आदि विकसित करते हैं, जिससे पूर्ण जानकारी, संचार और नेतृत्व क्षमताओं के अभाव में निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

प्रबंधन खेल का प्रयोग तनाव के साथ मुकाबला करने के लिए नवीन एवं अभिनव तंत्र को प्रोत्साहित कर सकता है।


प्रबंधन खेल, विषय के व्यावहारिक प्रयोज्यता वाले एक उम्मीदवार को उन्मुख करते हैं। यह खेल व्यावहारिक तरीके से प्रबंधन अवधारणाओं की सराहना करने में सहायता करते हैं। विभिन्न खेलों का उपयोग सामान्य प्रबंधकों और मध्य प्रबंधन और क्रियात्मक प्रमुखों के लिए किया जाता है, जैसे- कार्यकारी खेल और क्रियात्मक प्रमुख।


(ख) मामला अध्ययन/ केस स्टडी:


मामला अध्ययन/ केस स्टडी जटिल उदाहरण हैं, जो समस्या के संदर्भ में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं साथ ही साथ मुख्य बिंदु को परिलक्षित करते हैं। मामला अध्ययन,

प्रशिक्षु केन्द्रित गतिविधियों हैं जो उन विषयों पर आधारित है, जो एक प्रयुक्त वातावरण में सैद्धांतिक अवधारणाओं को प्रदर्शित करती हैं। एक मामला अध्ययन सैद्धांतिक अवधारणाओं के प्रयोग को प्रदर्शित करने का प्रयास करता है तथा इस प्रकार सिद्धांत और व्यवहार के बीच की खाई को पाटने, सक्रिय अधिगम को प्रोत्साहित करने, संचार, समूह कार्य और समस्या सुलझाने जैसे प्रमुख कौशल के विकास के लिए अवसर प्रदान करता है, और प्रशिक्षुओं के लिए विषय को आनंददायक बनता है जिससे उनकी सीखने की इच्छा में भी वृद्धि होती है।


(ग) भूमिका निर्वहन


प्रत्येक प्रशिक्षु, किसी मुद्दे से प्रभावित व्यक्ति की भूमिका का निर्वहन करता है

तथा मानव जीवन पर उन मुद्दों का प्रभाव और/ या हमारे आसपास की दुनिया पर मानव गतिविधियों के प्रभावों का अध्ययन करता है।


यह विज्ञान के "वास्तविक विश्व" पक्ष पर जोर देता है और विद्यार्थियों को बिना किसी एकल "सही" उत्तर के जटिल समस्याओं से निपटने के लिए तथा एक विशिष्ट शोध परियोजना में प्रयुक्त कौशलों से परे, विभिन्न कौशलों के उपयोग पर बल देता है।


विशेष रूप से, भूमिका निर्वहन के द्वारा विद्यार्थियों को न सिर्फ पाठ्यक्रम सामग्री सीखने का मौका मिलता है, बल्कि इस सम्बन्ध में अन्य पक्षों एवं दृष्टिकोण को भी समझने का अवसर मिलता है। भूमिका निर्वहन में सम्मिलित चरणों में, उद्देश्यों को परिभाषित करना, संदर्भ और भूमिकाएं चुनना,

अभ्यास शुरू करना, प्रशिक्षु को तैयार करना / अनुसंधान, भूमिका निर्वहन, समापन चर्चा, और मूल्यांकन सम्मिलित हैं। भूमिका निर्वहन के कई प्रकार हो सकते हैं, जैसे- एकल भूमिका निर्वहन, विविध भूमिका निर्वहन, भूमिका चक्रानुक्रम, एवं सहज भूमिका निर्वहन।


(घ) इन- बास्केट प्रशिक्षण:


इन- बास्केट अभ्यास, जिसे इन ट्रे प्रशिक्षण भी कहा जाता है. में व्यापारिक पत्रों का एक समूह शामिल होता है, जिसमें ई-मेल, एसएमएस, रिपोर्ट, मेमो, और अन्य आइटम शामिल हो सकते हैं।

अब प्रशिक्षक को तत्काल यह प्राथमिकता निर्धारित करनी होती है कि उपरोक्त में से किस पर तत्काल में निर्णय लेने की आवश्यकता है तथा किसमें थोडा विलम्ब किया जा सकता है।


4. संवेदनशीलता प्रशिक्षण:


संवेदनशीलता प्रशिक्षण को प्रयोगशाला या टी समूह प्रशिक्षण के रूप में भी जाना जाता है। यह प्रशिक्षण लोगों को तार्किकतापूर्वक अपने बारे में तथा दूसरे लोगों के बारे में समझने से सम्बंधित है, जो उनमें सामाजिक संवेदनशीलता और व्यवहारिक लचीलापन विकसित करके किया जाता है। अतः यह प्रशिक्षण अंतर्वैयक्तिक कौशलों के विकास से सम्बंधित है। यह एक व्यक्ति की समझने की क्षमता है

कि दूसरे को क्या महसूस होता है तथा उनके अपने दृष्टिकोण से वह क्या सोचते हैं।


यह व्यक्ति के अपने व्यक्तिगत गुणों, चिंताओं, भावनात्मक मुद्दों और उन तथ्यों के बारे में जानकारी देता है जो उनके और समूह के अन्य सदस्यों में समान हैं। यह समझ के आधार पर उपयुक्त ढंग से व्यवहार करने की क्षमता है। एक समूह का प्रशिक्षक, समूह के नेता या व्याख्याता के रूप में कार्य करने से बचता है, बल्कि वह सामान्य बिंदुओं को स्पष्ट करने या प्रतिक्रिया देने के लिए, उदाहरणों के रूप में घटनाओं के माध्यम से समूह प्रक्रियाओं को स्पष्ट करने का प्रयास करता है। सामूहिक क्रिया, कुल मिलाकर, लक्ष्य भी है और प्रक्रिया भी ।