प्रस्ताव एवं स्वीकृति - offer and acceptance

प्रस्ताव एवं स्वीकृति - offer and acceptance


वैध अनुबंध के लिए दो पक्षकारों का होना अनिवार्य होता है तथा उनमें से एक के द्वारा प्रस्ताव दिया जाता है। तथा दुसरे के द्वारा उस प्रस्ताव को स्वीकृति दी जाती है। प्रत्येक अनुबंध की उत्पत्ति प्रस्ताव तथा स्वीकृति से होती है, किन्तु प्रस्ताव तथा स्वीकृति तभी प्रभावी होती है जब उसका संवहन हो जाता है।


प्रस्ताव


भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 2(a) के अनुसार, "जब एक व्यक्ति किसी दुसरे व्यक्ति से किसी कार्य को करने अथवा उससे विरत रहने के संबंध में अपनी इच्छा इस उद्देश्य से प्रकट करता है

कि उस व्यक्ति की सहमति उस कार्य को करने अथवा उससे विरत रहने के संबंध में प्राप्त हो, तो कहेंगे कि पहले व्यक्ति ने दूसरे व्यक्ति के सम्मुख प्रस्ताव रखा।"


एक ठहराव करने के लिए कम से कम दो तत्वों का होना आवश्यक है एक प्रस्ताव और दूसरा स्वीकृति अतः प्रस्ताव किसी भी ठहराव कस आधार है। जो व्यक्ति प्रस्ताव रखता है उसे प्रस्ताविक या वचनदाता कहते हैं तथा जिस व्यक्ति को प्रस्ताव दिया जाता है उसे प्रस्तावकी ता वचनगृहीता कहते हैं।