कार्य पर प्रशिक्षण विधियाँ - on-the-job training methods
कार्य पर प्रशिक्षण विधियाँ - on-the-job training methods
इन विधियों के अंतर्गत नए अथवा अनुभवहीन कर्मचारी नौकरी करने वाले साथियों या प्रबंधकों को देखकर उनके व्यवहार का अनुसरण करने का प्रयास करते हैं। यह विधियां अधिक लागत वाली नहीं हैं और कम व्यवधानात्मक एवं विघटनकारी हैं क्योंकि कर्मचारी अधिकतर कार्य पर ही होते हैं, प्रशिक्षण समान मशीन पर दिया जाता है और अनुभव पहले से ही स्वीकृत मानकों के आधार पर होता है, तथा सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण यह है कि प्रशिक्षण में कमाई करने के साथ ही सीखना होता है। इस विधि के अंतर्गत उपयोग में लाइ जाने वाली कुछ तकनीकें इस प्रकार हैं:
1. कोचिंग:
कोचिंग एकैक प्रशिक्षण है अर्थात एक प्रशिक्षु पर एक प्रशिक्षक यह कमजोर क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करता है और उन पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करता है।
यह अभ्यास करने के लिए सीखे सिद्धांत के हस्तांतरण का लाभ भी प्रदान करता है। इस तकनीक के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह वर्तमान प्रथाओं और शैलियों का समर्थन एवं प्रयोग करती है। भारत में अधिकाँश स्कूटर मेकेनिक केवल इस तकनीक के माध्यम से प्रशिक्षित होते हैं।
2. परामर्श / सलाह:
इस प्रकार के प्रशिक्षण में ध्यान का केंद्र अभिवृत्ति का विकास होता है। यह प्रबंधकीय कर्मचारियों के लिए उपयोग किया जाता है परामर्श हमेशा एक वरिष्ठ अंदरूनी व्यक्ति द्वारा दिया जाता है। यहाँ पर भी कोचिंग जैसे एकैक वार्तालाप होती है।
3. कार्य चक्रानुक्रमः
यह संबंधित नौकरियों की एक श्रृंखला पर कार्यानुभव के माध्यम से कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया है। चक्रानुक्रम न केवल अलग-अलग नौकरियों के साथ व्यक्ति को अच्छी तरह से परिचित करता है, बल्कि यह बोरियत को भी कम करता है और कई लोगों के साथ तालमेल विकसित करने का अवसर देता है। चक्रानुक्रम तार्किक होना चाहिए।
4. कार्य निर्देशात्मक तकनीक:
यह कार्य पर प्रशिक्षण पद्धति की एक चरणबद्ध तकनीक (संरचित) है जिसमें एक उपयुक्त प्रशिक्षक (ए) किसी प्रशिक्षु को कार्य/ नौकरी के सिंहावलोकन, उसका उद्देश्य, और वांछित परिणामों के साथ तैयार करता है, (बी) प्रशिक्षको कार्य या कौशल का प्रदर्शन करता है,
(सी) प्रशिक्ष को स्वयं से प्रदर्शन करने का अवसर देता है, और (डी) प्रतिक्रिया और सहायता प्रदान करने का कार्य करता है। प्रशिक्षुओं को अधिगम सामग्री लिखित में, अथवा मशीनों द्वारा प्रस्तुत 'फ्रेम्स' नामक श्रृंखला के माध्यम से सीखने के लिए दी जाती हैं। यह पद्ध
सभी शिक्षकों (शिक्षकों और प्रशिक्षकों) के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है। यह सहायता करती है:
क) चरण-दर-चरण निर्देश देने के लिए
ख) जानने के लिए की कब अधिगमकर्ता ने सीख लिया है ग) पहले से मेहनत करने के लिए तैयार रहने के लिए (कई कार्यस्थल के वातावरण में)
5. प्रशिक्षुता:
प्रशिक्षुता एक नई पीढ़ी के अभ्यासकर्ताओं को कौशलों के सन्दर्भ में प्रशिक्षित करने की एक प्रणाली है। प्रशिक्षण की यह पद्धति उन व्यवसायों, शिल्प और तकनीकी क्षेत्रों में प्रचलित है जिनमें प्रवीणता प्राप्त करने के लिए एक लंबी अवधि की आवश्यकता है। प्रशिक्षुओं को लंबे समय के लिए विशेषज्ञों के सहायक के रूप में सेवा करना होता है। उन्हें अपने स्वामी के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में, के साथ सीधे सहयोग में भी काम करना होता है।
इस तरह के प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रशिक्षुओं को सर्वांगीण कारीगर बनाना है। यह प्रशिक्षण का एक महंगा तरीका है। इसके अतिरिक्त,
इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद प्रशिक्षित कार्यकर्ता उसी संगठन में काम करना जारी रखेगा। प्रशिक्षु समझौते के अनुसार प्रशिक्षुओं को पारिश्रमिक भुगतान किया जाता है।
6. अंडरस्टडी:
इस पद्धति में एक वरिष्ठ अधिकारी, एक अधीनस्थ को प्रशिक्षण प्रदान करता है, जैसे कि एक निर्देशक ( फिल्म का ) अपने सहायक को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन देता है। अधीनस्थ अनुभव और निरीक्षण के माध्यम से दैनिक समस्याओं के समाधान में सहभागिता करने के द्वारा सीखता है। मूल उद्देश्य पूर्ण जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को संभालने के लिए अधीनस्थ तैयार करना होता है।
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