अनुकूलतम अंतरराष्ट्रीय संवर्द्धन सम्मिश्र - Optimum International Enhancement Composite

अनुकूलतम अंतरराष्ट्रीय संवर्द्धन सम्मिश्र - Optimum International Enhancement Composite


संवर्द्धन सम्मिश्र से हमारा अभिप्राय विभिन्न संवर्द्धन तरीकों के संयोग से है जिन्हें एक फर्म द्वारा अपने उत्पाद या सेवाएं बेचने के लिए अपनाया जाता है। सकर्द्धन सम्मिश्र के छ तत्व-वैयक्तिक विकय विज्ञापन विकय-संवर्धन प्रचार व जनसंपर्क प्रत्यक्ष विपणन व इंटरनेट विपणन है। सवर्द्धन - मिश्रण के प्रत्येक तत्व के अपने कुछ गुण व कमिया है आजकल प्रतिस्पर्धा में वृद्धि के कारण कोई भी व्यावसायिक इकाई किसी एक ही संवर्द्धन तरीके पर निर्भर नहीं रह सकती। विभिन्न सवर्द्धन तरीकों का संयोजन करके ही प्रभावकारी संवर्द्धन समय हैं। विभिन्न संवर्द्धन तरीकों का प्रयोग विभिन्न मात्राओं में किया जा सकता है। विभिन्न संवर्द्धन तरीको का संयोजन अनेक घटकों पर निर्भर करता है। संवर्द्धन सम्मिश्र को अनुकूलतम तब माना जाता है, जब संचार या संवर्द्धन उद्देश्यों को न्यूनतम लागत पर प्राप्त किया जा सके वर्तमान संवर्द्धन सम्मिश्र को उस समय अनुकूलतम कहा जायेगा,

जब उसमें किया गया कोई भी परिवर्तन, संगठन के विकय व लाभ को न बढ़ा सके। विभिन्न व्यावसायिक इकाइयों का अनुकूनतम संवर्द्धन मिश्रण अलग-अलग हो सकता है यह उत्पाद की प्रकृति, व्यावसायिक इकाई के आकार, बाजार के आकार, वित्त की उपलब्धता, संचार के उद्देश्यों आदि पर निर्भर करता है।


फिलिप कोटलर के अनुसार संवर्द्धन मिश्रण को उस दशा में अनुकूलतम कहा जाता उसमें किया गया कोई भी समायोजन संगठन के विकय या लाभ को न बढ़ा सके।"


अनुकूलतम संवर्द्धन - मिश्रण में किसी बदलाव की आवश्यकता नहीं होती।

यह विभिन्न संवर्द्धन तरीकों का सर्वोत्तम सयोग होता है। उदाहरण के लिये यदि किसी व्यापारिक उपक्रम का उद्देश्य विकय वृद्धि है और यह अपने संवर्द्धन मिश्रण में कोई भी परिवर्तन करके विकय को वर्तमान स्तर से नहीं बढ़ा पा रहा, तब वर्तमान संवर्द्धन मिश्रण को उस व्यावसायिक इकाई का अनुकूलतम सवर्द्धन मिश्रण कहा जायेगा। अनुकूलतम संवर्धन-मिश्रण को चुनते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए:


(क) विज्ञापन विज्ञापन निम्न दशाओं में प्रभावकारी है


(i) तुरंत विपणन संचार के लिये


(ii) सामूहिक संचार के लिये


(iii) जब पर्याप्त धन की उपलब्धता हो


(iv) जब लक्षित श्रोता विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में फैले हुए हो।


(v) जब भेजे जाने वाले संदेश सरल हो


(vi) उपभोक्ता वस्तुओं के विपणन संचार के लिये।


(vii) जब उत्पाद ब्रांडेड हो।


(ख) वैयक्तिक विकय: वैयक्तिक विकय निम्न दशाओं में प्रभावकारी है


(i) औद्योगिक उत्पादों व तकनीकी उत्पादों के विपणन के लिये।


(ii) बहुत महंगे उत्पादों के विपणन के लिये।


(iii) जब श्रोता को भेजा जाने वाला संदेश बहुत जटिल हो ।


(iv) जब शीघ्र प्रतिक्रिया की आवश्यकता हो।


(v) जब उत्पाद बिना ब्रांड के बेचा जाना हो। बाड़ के अभाव में विज्ञापन तो संभव ही नहीं है। यहाँ भावी ग्राहकों से प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित करके उन्हें उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।


(vi) जब लक्षित श्रोताओं की संख्या बहुत अधिक नहीं हो


(vii) जब भावी केता केंद्रित हो अर्थात बहुत दूर के क्षेत्रों में फैले हुए नहीं हो


(viii) सेवा विपणन की दशा में जैसे- बीमा, बैंकिंग सेवाओं के विपणन के लिए प्रशिक्षण सेल्समैन नियुक्त किए जाते है. जो लक्षित श्रोताओं को इन सेवाओं के लाभ व विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी देते हैं व उन्हें सेवा खरीदने के लिए राजी करते हैं।


(ग) विकय-संवर्द्धन विकय संवर्द्धननिम्न दशाओं में प्रभावकारी होता है


(i) जब मध्यस्थ, उत्पादक की तुलना में अधिक प्रसिद्ध हो तब मध्यस्थों के लिए संवर्द्धन योजनाए बहुत उचित होती है। 


(ii) मौसमी उत्पादों की दशा में, उत्पादों को गैर-मौसम में बेचने के लिये विकय सकर्द्धन योजनायें बहुत प्रभावकारी है।


(iii) बिना ब्रांड वाले उत्पादों की दशा में, जहां विज्ञापन तो समय ही नहीं है। इस दशा में फुटकर विक्रेताओं को अधिक कमीशन देकर उन्हें उत्पाद को शो रूम में रखने व भावी ग्राहक को बेचने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। 


(iv) यदि पुराना इका हुआ माल बेचना है। जहां स्टॉक क्लीयरेन्स सेल के लिये विशेष छूट या कोई अन्य विकय-संवर्द्धन योजना बहुत प्रभावकारी हो।


(v) यदि बिकी में तुरंत वृद्धि करनी हो।


(घ) प्रत्यक्ष विपणन - यहां विपणन संचार टेलीफोन, प्रत्यक्ष डाक द्वारा किया जाता है। यह निम्न दशाओं में प्रभावकारी है


(1) जब भावी केताओ के रिहायशी पते व टेलीफोन नम्बरी का पता आसानी से लगाया जा सके।


(ii) जब समावित ग्राहकों की संख्या बहुत अधिक न हो।


(iii) सम्भावित ग्राहक शिक्षित हो।


(iv) सेवा विपणन की दशा ने जैसे बैंकिंग, बीना, दूरसंचार, शिक्षण संस्थान आदि की दशा में। 


(ङ) इंटरनेट विपणन - इंटरनेट विपणन निम्न दशाओं में प्रभावकारी होता है,


(1) जब लक्षित ग्राहक पढ़े-लिखे हो।


(ii) जब लक्षित ग्राहकों में पास कम्प्यूटर व इंटरनेट कनेक्शन हो


(iii) जब कंपनियों ने अपनी वेबसाइट विकसित कर रखी हो। अतः अनुकूलतम संवर्द्धन सम्मिश्र का चयन उत्पादक या विपणनकर्ता द्वारा विभिन्न संवर्द्धन तरीकों की ऊपर दी गई उपयुक्तता के आधार पर किया जाना चाहिए।