विज्ञापन अनुसंधान का संगठन - organization of advertising research

 विज्ञापन अनुसंधान का संगठन - organization of advertising research


वास्तव में विज्ञापन क्षेत्र में प्रवेश करने से पूर्व विपणन प्रबंध को जिसे स्वयं एक मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ होना चाहिए. विज्ञापन के संबंध में उचित योजना बना लेनी चाहिए। उसे इस बात का अध्ययन करना चाहिए कि क्या वस्तु का विज्ञापन करना उचित है या नहीं और अगर उचित है तो किस सीमा तक साथ ही इस विचार को भी नहीं भूलना चाहिए कि यदि विज्ञापन के परिणास्वरुप वस्तु की मांग बढ़ती है तो क्या उसकी पूर्ति कर पाना समय होगा? धन की व्यवस्था पहले से ही कर लेनी चाहिए।


इसके बाद एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठता है कि विज्ञापन का संगठन किस प्रकार का हो अर्थात विज्ञापन का कार्य किस सौंपा जाये ? विज्ञापन कार्यक्रम के संचालन की निम्नलिखित में से कोई भी व्यवस्था की जा सकती है:


(क) कम्पनी के भीतर यदि संगठन छोटा है अथवा विज्ञापन प्रवत्तन वितरण का एक महत्वपूर्ण भाग होता है, तो विज्ञापन प्रबंधन का कार्य कम्पनी के भीतर ही आवंटित किया जाता है लेकिन यदि विज्ञापन बड़ा हो एवं कंपनी के पास अत्याधिक वित्तीय साधन उपलब्ध डॉ व विज्ञापन प्रर्वतन मिश्रण का एक महत्वपूर्ण भाग हो, ऐसी अवस्था में विज्ञापन कार्य का प्रशासन प्रायः एक अलग एवं स्वतंत्र विभाग द्वारा चलाया जाता है। ऐसी दशा में इस विज्ञापन विभाग के अध्यक्ष को विज्ञापन प्रबंध के प्रति उत्तरदायी बनाया जाता है क्योंकि आधुनिक विपणन अवधारणा के अनुसार यही उचित है। विज्ञापन विभाग ही विज्ञापन कार्यक्रम के नियोजन एवं कार्यान्वयन संबंधी समस्त कार्य पूरे करता है। विज्ञापन विभाग निम्नलिखित कार्य करता है 


(i) यह विभाग कंपनी के लिए विज्ञापन योजनाएं बनाता है

तथा विज्ञापन का निर्माण करता है। इसमें संदेश का लिखना, चित्रों को चुनना आदि शामिल है।


(ii) यह विभाग इस संदेश को माध्यम के पास पहुंचाने का कार्य करता है।


(iii) विज्ञापन विभाग उत्पाद, बाजार व उपभोक्ता पर अनुसंधान का कार्य भी करता है।


(iv) यह विभाग कम्पनी और विज्ञापन एजेन्सी (यदि उसके सेवाएं ली गई हो) के बीच की कड़ी का कार्य भी करता है। विज्ञापन विभाग विज्ञापन बजट को बनाने का कार्य भी करता है तथा उसे नियन्त्रित करने का उत्तरदायित्व रखता है।


(v) यह विभाग ही एजेन्सियों की योजनाओं एवं विज्ञापनों को स्वीकृत करता है।


(vi) प्रत्यक्ष डाक विज्ञापन डीलर प्रदर्शनिया आदि कार्य (जिनका कि विज्ञापन एजेन्सी द्वारा नहीं किया जाता है) यह विभाग ही सम्पन्न करता है। 


(ख) कंपनी के बाहर यदि कंपनी के पास साधनों की कमी है एवं कंपनी छोटे पैमाने पर कार्य कर रही है तो वस्तुओं का विज्ञापन बाहरी विज्ञापन संस्थाओं द्वारा करवाया जाता है विज्ञापन एजेन्सी एक स्वतंत्र संस्था होती है जिसकी स्थापना विपणन में विशेषकर विज्ञापन में विशिष्टीकृत सेवाओं प्रदान करने वाले दलालों के रूप में काम करना होता था, लेकिन अब ये सम्पूर्ण विज्ञापन कार्यक्रमों के नियोजन एवं क्रियान्वयन का उत्तरदायित्व सम्भालती है। इनकी सेवाओं का क्षेत्र लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अब कंपनिया इन संस्थाओं से विज्ञापन संबंधी एवं विज्ञान अनुसंधान संबंधी सेवाऐं भी लेने लगी है। (यहां विज्ञापन एजेन्सी का संक्षेप में वर्णन किया जा रहा है)