अन्य निवेश , लागत उत्पादन सम्बन्ध - Other investments, cost production relations

अन्य निवेश , लागत उत्पादन सम्बन्ध - Other investments, cost production relations

कुछ अध्ययनों में कच्चे माल तथा ईंधन के प्रयोग में भी कुशलता मापने पर जोर दिया जाएगा। किन्तु ये निवेश सापेक्षिकतया गणना करने में आसान होते हैं। एक वर्ष में इसकी कय राशि सामान्यत: इन समर्पित निवेशों की श्रृंखला को प्रतिबिम्बित करती है तथा उनके लिए एक दिये हुए विश्वसनीय मूल्य सूचकांक की सहायता से उन्हें कच्चे माल की स्थिर मूल्य श्रृंखलाओं के अन्तर्गत परिवर्तित किया जा सकता है तथा इसी के अनुसार ईंधन के लिए भी किया जा सकता है। विगत पृष्ठों में अनेक कठिनाइयों से निपटने का प्रयास किया गया है। उत्पादकता तथा लागत फलन गणनाओं के लिए पूर्व के ऑकड़े उपयुक्त हैं तथा तुलनीय रूप में व्यक्त भी किये जा सकते हैं।


लागत उत्पादन सम्बन्ध (Cost Output Relation )


लागत उत्पादन सम्बन्ध का गहन अध्ययन प्रबन्धकीय अर्थशास्त्री के लिये आवश्यक है। समय के अनुसार लागतों को दो भागों में बाँटा जा सकता है, अल्पकालीन लागत तथा दीर्घकालीन लागत । प्रस्तुत अध्याय में हम अल्पकाल में लागत उत्पादन सम्बन्धक का अध्ययन करेंगे। अल्पकाल वह समयावधि है, जिसमें वस्तु की पूर्ति उत्पादन के वर्तमान पैमाने के अधिकतम प्रयोग तक बढ़ायी जा सकती है। अल्पकाल में एक उत्पादक के पास इतना समय होता है कि माँग बढ़ने पर वह वस्तु की पूर्ति उत्पादन के पैमाने के गहन प्रयोग तक बढ़ा सकता है तथा माँग में कमी आने पर वर्तमान उत्पादन के पैमाने का कम प्रयोग करके पूर्ति को कम कर सकता है। इस समयावधि में फर्म के पास इतना समय नहीं होता है कि वह वस्तु की माँग बढ़ने पर अपने उत्पत्ति के पैमाने को बदल सके। इस अवधि में संस्था परिवर्तनशील साधनों की मात्रा मे आवश्यकतानुसार परिवर्तन कर सकती हैं लेकिन स्थिर उत्पादन के साधनों में परिवर्तन सम्भव नहीं है।


अल्पकाल में उद्योग में नई फर्म प्रवेश नहीं कर सकती है तथा न ही उद्योग में लगी फर्मे बहिर्गमन कर सकती हैं। इस अवधिक में मूल्य निर्धारण करते समय स्थिर लागतों पर विचार नहीं किया जाता है, क्योंकि यदि मूल्य स्थिर लागतों को पूरा नहीं करता है तब भी फर्म इस अवधि में उत्पादन जारी रखती है, बशर्ते फर्म को औसत परिवर्तनशील लागतों से अधिक मूल्य प्राप्त होता हो। सैवेज एवं स्माल के शब्दों में, अल्पकाल वह अवधि है जिसमें उत्पादन के कम से कम एक साधन की पूर्ति स्थिर होती है, अतः फर्म की उस साधन की उपलब्ध पूर्ति में परिवर्तन सम्भव नहीं होता है।" अल्पकाल में उत्पादन के साधनों को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है स्थिर तथा परिवर्तनशील साधना स्थिर उत्पादन के साधन उन्हें कहते हैं जिन्हें अल्पकाल में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है, इसके विपरीत परिवर्तनशील उत्पादन के साधनों की मात्रा में अल्पकाल में कमी या वृद्धि सम्भव है। अतः अल्पकाल में लागतों का उत्पादन से जो सम्बन्ध है, उसका अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण एवं उपयोगी है। अल्पकाल में औसत स्थिर लागते, औसत परिवर्तनशील लागते, औसत कुल लागत तथा सीमान्त लागत का अध्ययन किया जाता है। इन लागतों का विस्तृत वर्णन निम्न है;


(1) कुल लागत (Total Cost )- किसी वस्तू के उत्पादन में जो कुल व्यव या खर्चा आता है उसे ही कुल लागत कहते हैं। दूसरे शब्दों में कुल स्थाई तथा कुल परिवर्तनशील लागत का जोड़ ही कुल लागत कहा जाता है। अल्पकाल में कुल लागत में परिवर्तन केवल परिवर्तनशील लागतों के कारण ही होती है क्योंकि स्थाई लागतों में तो कोई परिवर्तन होता नहीं है। अब हम कुल लागत के इन दोनों महत्वपूर्ण भागों का अलग से अध्ययन करेंगे.


1. कुल स्थिर लागत (Total Fixed Cost )- वे लागतें जो फर्म के शून्य उत्पादन की स्थिति से लेकर अधिकतम सम्भव उत्पादन तक स्थिति तक स्थिर रहती हैं, कुल स्थाई लागत कहलाती हैं। ये वे लागतें होती हैं जो होगी ही अर्थात् जिनका होना अवश्यम्भावी है। दूसरे शब्दों में ये वे लागतें हैं जिनको टाला नहीं जा सकता है,

जो होगी ही चाहे उत्पादन हो या नहीं हो, अथवा उत्पादन कम हो या ज्यादा हो। इन लागतों को अल्पकाल में कुछ समय के लिये उत्पादन बन्द करने पर भी चुकाना पड़ता है।


2 कुल परिवर्तनशील लागतें (Total Vafiable Cost) - ऐसी लागतों का योग जो अल्पकाल में उत्पादन मात्रा बढ़ने घटने के साथ परिवर्तित होती रहती है, कुल परिवर्तनशील लागतों के नाम से जानी जाती है। कुल परिवर्तनशील लागतों के उदाहरण हैं सामग्री, श्रम, ईंधन आदि यदि फर्म कोई उत्पादन नहीं करे तो कुल परिवर्तनशील लागतें घटती दर से बढ़ेंगी। यदि फर्म के यहाँ उत्पादन स्थिरता नियम क्रियाशील है तो कुल परिवर्तनशील लागतें समान दर से बढ़ेगी तथा इसके विपरीत यदि फर्म के यहाँ उत्पादन ह्रास नियम क्रियाशील है तो कुल परिवर्तनशील लागत अधिक दर से बढ़ेंगी।