विदेशी भुगतान के तरीके - overseas payment methods
विदेशी भुगतान के तरीके - overseas payment methods
(क) स्वर्ण
जनसाधारण की यह धारणा है कि विदेशी भुगतान के लिए स्वर्ण एक महत्त्वपूर्ण साधन है, परंतु यह विचार सही नहीं है यह ठीक है कि विदेशों में भुगतान करने के लिए स्वर्ण का प्रयोग किया जा सकता है। परंतु साथ में यह भी स्वीकार करना पड़ता है कि स्वर्ण का आयात निर्यात अत्यन्त खर्चीला और जोखिम का कार्य है। यह अत्यन्त असुविधाजनक भी है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनगिनत सौदे होते रहते है और प्रत्येक सौदे के लिए स्वर्ण का आयात निर्यात करना बहुत ही असुविधाजनक होता है। इसमें लोच का भी अभाव रहता है क्योंकि जिस देश में पर्याप्त मात्रा में स्वर्ण कोप नहीं होते यह दूसरे देशों से माल का आयात नहीं कर सकता।
इन दोपों तथा कठिनाइयों के कारण स्वर्णमान के अन्तर्गत भी विदेशी भुगतान के लिए स्वर्ण का सीमित मात्रा में ही प्रयोग किया जाता है। साधारणतया साख-पत्रों के माध्यम भुगतान होता था केवल बैंक ही अपने आधिक्य कोपों के स्थानान्तरण के लिए स्वर्ण का प्रयोग करते थे। आज के युग में विदेशी भुगतान स्वर्ण के माध्यम से नहीं किये जाते अब तक स्वर्ण के बाजार मूल्य में इतनी अधिक अस्थिरता आ गयी है कि इसे विदेशी भुगतानों के लिए विनिमय- माध्यम तथा मूल्यमापक के रूप में प्रयोग करना व्यावहारिक रूप में बहुत कठिन हो गया है।
(ख) आयात के बदले निर्यात
विदेशी भुगतान का एक अन्य तरीका आयात के बदले निर्यात करना है।
वैसे तो प्रत्येक देश की यह नीति होती है कि उसके आयातो का भुगतान नियत करके ही चुकाया जाये, परन्तु प्रत्येक देश के साथ आयात और निर्यात को सन्तुलित करना न केवल अत्यन्त कठिन होता है बल्कि दोपपूर्ण भी इस प्रकार व्यापार में वस्तु विनिमय प्रणाली की सभी कठिनाइयां उत्पन्न हो जाती है और व्यापार का क्षेत्र सीमित हो जाता है। यह समय हो सकता है कि दूसरा देश अपने माल के बदले में वह माल न लेना चाहे जिसे आयातकर्ता देना चाहता है और इस कारण उन देशों के बीच व्यापार हो ही न पाये। विदेशी मुद्राओं की कमी के कारण गत वर्षों में कुछ देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते हुए हैं जिनके अन्तर्गत एक देश में माल का भुगतान दूसरे देश के माल द्वारा ही किया जाता है रूस तथा अन्य समाजवादी देशों के साथ भारत ने इसी प्रकार के समझौते किये हैं, परन्तु इस प्रणाली का प्रयोग केवल कुछ वस्तुओं तथा कुछ काल के लिए केवल कुछ देशों तक ही सीमित है सामान्य रूप से सम्पूर्ण विश्व में मौदिक विनिमय ही प्रचलित है।
(ग) बैंकों द्वारा
वास्तव में विदेशी भुगतान प्रायः बैंकों के माध्यम से विदेशी मुद्राओं का कय-विक्रय करके किये जाते हैं
और इसके लिए कुछ विशेष प्रकार के साख पत्रों का प्रयोग किया जाता है। बैंकों के पास इस प्रकार के साख-पत्रों की उपलब्ध मात्रा, विदेशी मुद्रा की पूर्ति तथा इनके कय की मात्रा विदेशी भुगतानों के लिए विदेशी मुद्रा की मांग कही जा सकती है।
विदेशों में भुगतान करने के लिए ग्राहक अपनी बैंक के पास रकम जमा कर देता है और आदेश देता है कि यह रकम अमुक स्थान के अमुक व्यक्ति को दी जाये। रकम तथा आदेश प्राप्त होते ही यह बैंक अपनी विदेश स्थित शाखा अथवा प्रतिनिधि बैंक को संचार साधनों द्वारा निश्चित व्यक्ति को रकम चुकाने का आदेश देता है। भुगतान की इस रीति को टेलीग्राफिक ट्रान्सफर कहते हैं। इसी प्रकार साधारण डाक द्वारा भी रकम का स्थानान्तरण किया जा सकता है जिसे मेल ट्रान्सफर कहते है इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों तथा सूचना प्रौद्योगिकी के विकास के कारण अब रकम का स्थानान्तरण बिना किसी विलम्ब के आसानी से किया जा सकता है।
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