प्रतिदर्श में अभिनति - performance in the sample

प्रतिदर्श में अभिनति - performance in the sample


प्रतिदर्श की किसी रीति द्वारा चुना गया निदर्श अभिनति से प्रभावित हो सकता है। एक अभिनति पूर्ण प्रतिदर्श समग्र का वास्तविक प्रतिनिधि नहीं हो सकता है। अभिनति वास्तव में प्रतिदर्श की उपयोगिता को समाप्त कर देती है। अत: प्रतिदर्श सर्वेक्षणों में अभिनति के स्त्रोतों को स्पष्ट रूप से पहचानना और इन्हें दूर करना विपणन अनुसंधान की परिशुद्धता के लिए परमावश्यक है। अभिनति दो प्रकार की हो सकती है। प्रथम चेतन अभिनति तथा द्वितीय- अवचेतन अभिनति


(क) चेतन अभिनति - इस प्रकार की अभिनति पूर्व आयोजित होती है और अनुसंधानकर्ता की पूर्व धाराणाओं के कारण उत्पन्न होती है। उदाहरण के लिए. महाराष्ट्र में बी. एम. डब्ल्यू द्वारा विज्ञापन की प्रभावशीलता को ज्ञात करने के लिए अन्वेषक जानबूझकर ऐसे परिवारों का चयन कर सकता है

जिनके पास बीएमडब्ल्यू गाड़ी है, जो बहुत शिक्षित है तथा शहरों में रहते हैं। ऐसे अभिनित प्रतिदर्श से यह यह सिद्धकर सकता है कि महाराष्ट्र में सभी परिवार (ग्रामीण तथा शहरी) टेलीवीजन द्वारा विज्ञापन को सुनते है तथा उन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसके विपरीत, एक अन्वेषक जानबूझकर ऐसे परिवारों का चयन कर सकता है, जिनसे वह स्वयं परिचित है या जो उसके रिश्तेदार मित्र तथा संबधी है ताकि वह अपनी पूर्ण धारणा के अनुसार निष्कर्ष निकाल सके कि महाराष्ट्र में सभी परिवार पर टेलीवीजन द्वारा विज्ञापन का गहरा प्रभाव पडता है। इस प्रकार अपनी मानसिक प्रवृत्ति और पूर्वाग्रहों के अनुसार अभिनित अन्वेषक प्रतिदर्श को विकृत कर देता है।


(ख) अवचेतन अभिनति कभी-कभी अन्वेषक द्वारा पूर्ण रूप से निप्पक्ष दृष्टिकोण अपनाये जाने पर भी प्रतिदर्श चयन की क्रिया में अनजाने में अभिनति का समावेश हो जाता है, जिसे अवचेतन अभिनति कहते हैं। इस प्रकार की अभिनति के उतने गंभीर परिणाम नहीं होते हैं जितने कि चेतन अभिनति के होते हैं। उक्त अभिनति की रोकथाम का प्रमुख उपाय यह है कि चयन प्रक्रिया में मानव अंश को हटाकर यंत्रों की सहायता ली जा सकती है।