भौतिक वितरण - physical distribution

भौतिक वितरण - physical distribution


भौतिक वितरण से तात्पर्य उत्पादों व सेवाओं के उत्पादन-स्थान से उपभोग स्थान तक प्रवाह से है। उत्पादों / सेवाओं के इस प्रवाह में जितनी भी क्रियाएं शामिल होती हैं, उन्हें सामूहिक रूप से भौतिक वितरण कहते हैं। इसमें वितरण माध्यम, परिवहन एजेन्सियों, बैंकों, बीमा कंपनियों, वेयरहाउसों आदि की सेवाएं ली जाती है। भौतिक वितरण के अंतर्गत विपणनकर्ता को अनेक प्रकार के निर्णय लेने होते हैं, जैसे-परिवहन के कुशल साधनो का चयन, उचित भंडारगृह का चयन, माल का रख-रखाव, आदेशों की मात्रा आदेशों की पूर्ति प्रक्रिया आदि।


(i) कण्डिक एवं स्टिल के अनुसार वस्तुओं के उत्पादन के बाद लेकिन उपभोग से पहले उसे वास्तविक रूप में एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना तथा संग्रह करना भौतिक वितरण के अंतर्गत आता है।"


(ii) विलियम जे स्टेटन के अनुसार, "उत्पादों के भौतिक बहाव का प्रबंध और बहाव प्रणाली की स्थापना एवं उसका संचालन भौतिक वितरण में शामिल है।


(i) वितरण माध्यम का अर्थ


उत्पादों को उत्पादन केंद्रों से उपभोक्ताओं तक जिन माध्यमों से पहुंचाया जाता है, उन्हें वितरण माध्यम कहते हैं। अंतरराष्ट्रीय विपणन में उत्पादक अपने उत्पादों को अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुचाने के लिए विशिष्ट मध्यस्थों की सहायता लेता है, जिन्हें उत्पाद वितरण का गहरा अनुभव होता है। इनकी सहायता से उत्पाद वितरण के कार्य को प्रभावशाली ढंग से संपन्न किया जा सकता है वितरण माध्यम उत्पादक व उपभोक्ताओं के मध्य कड़ी का काम करता है।

वितरण माध्यम द्वारा जैसा उत्पाद होता है वह उसी रूप में उत्पादक से अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय विपणन में अनेक एजेसियों, जैसे- बैंक, बीमा कंपनियों परिवहन एजेसियों वितरण भंडार गृह विज्ञापन एजेन्सियों आदि की सेवाएं ली जाती है परंतु यहां हम वितरण माध्यम के मुख्य भागीदार थोक विक्रेता, फुटकर विक्रेता, निर्यात विकय एजेंट आदि का ही अध्ययन करेगे यद्यपि विज्ञापन एजेसिया, बीमा व बैंक कंपनियाँ भी उत्पादों के प्रवाह में सेवाएं प्रदान करती हैं तब भी उन्हें वितरण माध्यम की परिभाषा में शामिल नहीं किया जाता क्योंकि ये उत्पादों के कय विक्रय में भाग नहीं लेती।


विपणन मध्यस्थ जो उत्पादों को उत्पादक से कय करके अंतिम उपभोक्ताओं को ये उत्पाद बेचते हैं,

उन्हें ही मुख्य तौर पर वितरण माध्यम में शामिल किया जाता है। यद्यपि सूचना तकनीकी के विकास से ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय व्यापार को काफी बढ़ावा मिला है, जिससे उत्पादक सीधे ही उत्पाद अंतिम उपभोक्ताओं को बेचते हैं, परंतु अभी ऑनलाइन विपणन अधिक प्रचलित नहीं है। अतः वितरण माध्यमों का आज भी अंतरराष्ट्रीय विपणन में बहुत महत्व है। विभिन्न विद्वानों द्वारा वितरण माध्यम के बारे में दी गई कुछ महत्वपूर्ण परिभाषाए निम्नलिखित हैं -


(i) विलियम जे स्टैटन के अनुसार, उत्पादों के अधिकार स्वामित्व को अंतिम उपभावता या औद्योगिक प्रयोगकर्ता ता पहुंचाने के लिये जो माध्यम अपनाया जाता है, वह वितरण माध्यम कहलाता है।"


(ii) कण्डिक, स्टिल एवं गोवानी के अनुसार,

विपणन माध्यम वह वितरण जाल है जिसके द्वारा उत्पादक उत्पादों को बाजार की ओर प्रवाहित करते हैं।" वितरण माध्यम की लंबाई बहुत अधिक नहीं होनी चाहिए क्योंकि प्रत्येक मध्यस्थ के कमीशन / लाभ मार्जिन से उत्पाद की कीमत बढ़ती है। अतः वितरण माध्यम को छोटा रखने का प्रयत्न किया जाना चाहिए वितरण माध्यम की लंबाई के आधार पर शून्य स्तरीय एकस्तरीय द्विस्तरीय या बहुस्तरीय हो सकता है शुन्य स्तरीय वितरण माध्यम में उत्पादक सीधे अंतिम उपभोक्ता को बेचता है इसे प्रत्यक्ष विपणन भी कहते है जैसे डेल कम्प्यूटर्स ऑनलाइन विपणन द्वारा अपना उत्पाद सीधे ही अंतिम उपभोक्ता को बेचता है। एक स्तरीय माध्यम में उत्पादक व अंतिम उपभोक्ता के मध्य केवल एक ही वितरण माध्यम होता है, जो थोक विक्रेता या फुटकर विक्रेता हो सकता है। द्विस्तरीय वितरण माध्यम में दो मध्यस्थ होते हैं थोक विक्रेता व फुटकर विक्रेता । बहुस्तरीय माध्यम में उत्पादक व उपभोक्ता के मध्य दो से ज्यादा मध्यस्थ होते हैं।


(i) वितरण माध्यम नीतिया


वितरण माध्यमों के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए वितरण माध्यम नीतियां बनायी जाती है। अंतरराष्ट्रीय विपणन प्रबंधक को अपनी वितरण माध्यम नीतियों का निरंतर अध्ययन करते रहना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्धारित वितरण माध्यम नीति वर्तमान परिस्थितिया में सर्वाधिक उचित नीति है। बाजार दशाओं में परिवर्तन नीतियों में भी परिवर्तन करने पड़ते हैं वितरण माध्यम नीतियों का चयन विभिन्न घटकों पर निर्भर करता है जैसे वितरण माध्यम के उद्देश्य, वितरित किए जाने वाले उत्पादों की प्रकृति सरकारी नीति आदि प्रायः अग्रलिखित वितरण नीतियाँ अपनायी जाती है। 


(क) गहन वितरण नीति: इस नीति में उत्पादक / विपणनकर्ता विभिन्न स्थानों पर अत्यधिक फुटकर स्टोर खोलकर बाजार में गहन प्रवेश लेता है। यह नीति सुविधाजनक उत्पादों के विकय के लिए बहुत उपयुक्त है; जैसे टूथपेस्ट, पेन, साबुन, चाय, कॉफी, सॉफ्ट ड्रिंक, वाशिंग पाउडर आदि अनेक स्थानों पर फुटकर स्टोर खोलने से उपभोक्ताओं को वे उत्पाद घर के पास ही उपलब्ध हो जाते हैं। गहन वितरण नीति उन उत्पादों के लिए उपयोगी है

जिनका इकाई मूल्य कम होता है। उपभोक्ता इन उत्पादों को थोड़ी थोड़ी मात्रा में कय करता है। ऐसे उत्पादों के उपभोक्ताओं की संख्या बहुत अधिक होती है। 


(ख) चयनात्मक वितरण नीति जब उत्पादक अपने उत्पादों का विकय कुछ चुने हुए मध्यस्थों से ही करवाता है. अर्थात वितरकों (थोक विक्रेताओं व फुटकर विक्रेताओं) की संख्या बहुत कम हैं, तो इसे चयनात्मक वितरण रणनीति कहते हैं। यह नीति सौदा उत्पादों व विशिष्ट उत्पादों के लिए अपनायी जाती हैं, जैसे- टेलीविजन, वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर कम्प्यूटर कपड़े, जूते ब्रांडेड फर्नीचर आदि सुविधाजनक उत्पादों की तुलना में इन्हें कम बार कय किया जाता है। उपभोक्ता इन्हें कय करने के लिए बाजार की अधिक छानबीन करता है। जिन उत्पादों मे विक्रय उपरात सेवाओं की आवश्यकता अधिक होती है. उन्हें भी चयनात्मक वितरण नीति द्वारा बेचा जाता है।


(ग) एकमात्र वितरण नीति जब कोई उत्पादक अपने उत्पादों का वितरण केवल एक ही मध्यस्थ विक्रेता से करवाता है, तो उसे एकमात्र वितरण नीति कहते है। इस नीति के अंतर्गत जो मध्यस्थ नियुक्त किए जाते हैं उन्हें एकमात्र विकय एजेंट कहते है यह नीति विशिष्ट उत्पादों के विक्रय के लिए अपनायी जाती है। इस नीति में एक क्षेत्र विशेष में उत्पाद बेचने का अधिकार एकमात्र विकय को ही दिया जाता है। एकमात्र विकय एजट को भी यह शर्त माननी होती है कि वह किसी अन्य उत्पादक का सामान नहीं बेचेगा। प्रायः ऑटोमोबाइल निर्माता इस नीति को अपनाते हैं।


(घ) प्रेषणी नीति / ब्रोकर द्वारा विकय इस नीति के अंतर्गत उत्पादक माल तैयार करके प्रेपणी को सुपुर्द कर देता है जो इसे निर्धारित मूल्यों पर बेचने की कोशिश करता है। उत्पाद पेपणी के पास होता है, परंतु इसका स्वामित्व तथा जोखिम विक्रय से पहले तक उत्पादक का होता है। प्रेपणी उत्पादक के विक्रय प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है। प्रेपणी विकय पर कमीशन प्राप्त करता है। प्रेपणी विकय राशि में से अपने खर्च काटकर शेष विकय राशि को उत्पादक को भेज देता है। 


(iii) अंतरराष्ट्रीय विपणन में वितरण माध्यम


अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अपने उत्पादों को विदेशी बाजारों में प्रत्यक्ष माध्यम से या अप्रत्यक्ष माध्यम से बेच सकती हैं।


(क) प्रत्यक्ष माध्यम प्रत्यक्ष माध्यम में वैश्विक निर्माता विभिन्न देशों में अपने विपणन विभाग / सहायक कंपनियाँ स्थापित करते हैं। ये सहायक कंपनियाँ विदेशों में इन मूल कंपनियों के उत्पाद बेचती है। इस व्यवस्था में उत्पादक अपने आंतरिक संगठन की सहायता से सीधे ही विदेशी फर्मों को अपना उत्पाद बेचते है। इसमें घरेलू मध्यस्थ की सहायता नहीं ली जाती प्रत्यक्ष माध्यम के एक अन्य प्रारूप में वैश्विक निर्माता विदेशी वितरकों, विदेशी थोक विक्रेताओं की नियुक्ति करता है या सीधे ही उत्पाद विदेशों में अंतिम उपभोक्ताओं का बेचता है महगी औद्योगिक मशीनरी की दशा में वैश्विक निर्माता सीधे ही इंटरनेट द्वारा अतिम ग्राहक के साथ संबंध स्थापित करता है। महंगे उत्पादों भारी उत्पादों या ऐसे उत्पादों जिन्हें बहुत कम लोग खरीदते हैं, की दशा में प्रत्यक्ष माध्यम द्वारा उत्पाद बेचे जाते हैं। प्रत्यक्ष माध्यम में उत्पादक का विदेशी बाजार पर नियंत्रण होता है वह अपनी सुविधा के अनुसार विपणन रणनीतियां अपना सकता है परंतु यह विधि अधिक महंगी है सस्ते उत्पादों व तेजी से बिकने वाले उत्पादों की दशा में यह विधि उपयुक्त नहीं है।


(ख) अप्रत्यक्ष माध्यमः इसके अंतर्गत वैश्विक उत्पादक घरेलू विपणन मध्यस्थों, जैसे-चोकर एजेंट निर्यात प्रबंध कंपनियों, निर्यात व्यापारियों आदि की सहायता से विदेशी बाजारों में उत्पाद बेचते है। विदेशों में उत्पाद मध्यस्थों की सहायता से बेचे जाते हैं। कुछ मध्यस्थ, जैसे- निर्यात व्यापारी, निर्यात प्रबंध कंपनी उत्पादों का स्वामित्व ग्रहण नहीं करते है। जबकि कुछ अन्य मध्यस्थ उत्पादों का स्वामित्व ग्रहण करते हैं। कम कीमत वाले उत्पादों, तेज गति से बिकने वाले उत्पादों की दशा में अप्रत्यक्ष माध्यम से विक्रय करना संभव नहीं होता। कई बार सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण विदेश में सहायक कपनी स्थापित करना या प्रत्यक्ष विकय करना सभव नहीं होता। इसी तरह कुछ देशों में सरकार की अपनी एजेन्सियों होती है जो कुछ विशेष उत्पाद स्वयं ही वैश्विक उत्पादकों से खरीदती है। ऐसी दशा में भी वैश्विक निर्माता विदेशी बाजार में प्रत्यक्ष विक्रय नहीं कर सकता। वह अप्रत्यक्ष माध्यम द्वारा ही विदेशी बाजार में उत्पाद बेच सकता है। इसी तरह जब कोई वैश्विक निर्माता किसी नए देश में प्रवेश लेना चाहता है, जहाँ उसने पहले कभी उत्पाद नहीं बेचा है, और न ही इसे वहाँ कोई अनुभव है, तो ऐसी स्थिति में स्वयं की सहायक कंपनी स्थापित करने के स्थान पर वैश्विक निर्माता को विदेशी बाजार के किसी मध्यस्थ की सहायता से उत्पाद बेचने चाहिए। अंतरराष्ट्रीय विपणन में मुख्य अप्रत्यक्ष वितरण माध्यम / मध्यस्थ निम्नलिखित हो सकते हैं।


(i) विदेशी वितरक : विदेशी वितरक को विदेशी बाजार में वैश्विक कंपनी का उत्पाद बेचने का एकमात्र अधिकार होता है। यह वैश्विक निर्माता के नियंत्रण में विदेशी बाजार में कार्य करता है। यह केवल उसी वैश्विक निर्माता के लिए ही कार्य करता है, जिसने इसे नियुक्त किया है। इसे विदेशी थोक विक्रेता भी कहते है।


(ii) विदेशी फुटकर विक्रेता इसे विदेशी वितरक / थोक विक्रेता द्वारा नियुक्त किया जाता है। यह विदेशी वितरक से अगला माध्यम है। यह विदेशी वितरक के नियंत्रण में कार्य करता है।


(iii) निर्यात एजेंट / ब्रोकर वैश्विक निर्माता विदेशी बाजारों में उत्पाद बेचने के लिए निर्यात एजेंटों / बॉकरों की सहायता लेते हैं इन एजेंटों / बौकरों को विदेशी बाजारों के बारे में बहुत अनुभव व जानकारी होती है

ये वैश्विक उत्पादकों से उत्पाद लेकर सीधा विदेशी ग्राहकों को भी बेचते हैं या थोक विक्रेताओं व फुटकर विक्रेताओं की सहायता से विदेशी बाजारों में उत्पाद बेचते हैं।


(iv) निर्यात प्रबंध कंपनी कई बार कुछ वैश्विक उत्पादक विदेशी बाजार में उत्पाद बेचने का संपूर्ण कार्य किसी विशिष्ट निर्यात प्रबंध कंपनी को दे देते है।


यह कंपनी अन्य निर्यातकों के लिए भी कार्य करती है, परंतु यह वर्तमान क्लाइंट के निकटतम प्रतियोगी उत्पादकों का विकय कार्य नहीं लेती।


(v) निर्यात ड्रोप शिपर: यह निर्यातक व आयातक के मध्य कड़ी स्थापित करता है।

यह निर्यातक से उसके बेचे जाने वाले उत्पादों के बारे में जानकारी प्राप्त करके, उन उत्पादों के लिए विदेशी बाजार में उपयुक्त कता ढूंढता है। उपयुक्त आयातक मिलने पर यह आयातक व निर्यातक को एक दूसरे के बारे में आवश्यक जानकारी दे देता है। फिर उसके बाद निर्यातक सीधे आयातक को ही माल भेजता है। इसे डेस्क जॉबर या केबल व्यापारी भी कहते हैं। 


(vi) निर्यात व्यापारी यह निर्यातक से स्वयं उत्पाद कय कर लेता है तथा फिर उपयुक्त केता मिलने पर स्वयं उस उत्पाद को केता को बेचता है। यह कमीशन पर नहीं बल्कि लाभ कमाने के लिए कार्य करता है यह निर्यातक के अधीन न होकर स्वतंत्र रूप से अपने नाम से ही कार्य करता है। 


(vii) सरकार द्वारा नियंत्रित व्यापारिक कंपनी कुछ देशों में कुछ विशेष उत्पादों के आयात पर सरकार का संपूर्ण नियंत्रण होता है। ऐसे उत्पादों के सारे आयात सरकार द्वारा नियंत्रित व्यापारिक कंपनी ही करती है। वैश्विक उत्पादनकर्ता इन कंपनियों से संपर्क करके उन्हें अपने उत्पाद बेचते है। फिर ये व्यापारिक कंपनियाँ अपने देश में इन आयातित उत्पादों को बेचती है।


(viii) सर्वाधिक प्रचलित वितरण नेटवर्क है उत्पादक   थोक - फुटकर विक्रेता - उपभोक्ता


इस नेटवर्क में (1) उत्पादक उत्पाद को थोक विक्रेताओं को बेचता है जो इन उत्पादों को फुटकर विक्रेताओं को बेचते हैं, फुटकर विक्रेता इन उत्पादों को अंतिम उपभोक्ताओं को बेचते है। 


(ii) बड़े फुटकर विक्रेताओं (संगठित फुटकर विक्रेता) की दशा में उत्पादक उत्पादों को सीधा ही बड़े फुटकर विक्रेता को बेचता है इसमे थोक विक्रेताओं की सेवाए नही ली जाती। 


(iii) ऑन लाइन विकय की दशा में उत्पादक ऑन लाइन पोर्टल की सहायता से उत्पादों को सीधे ही अंतिम उपभोक्ताओं को बेचता है। 


(iv) यदि वैश्विक उत्पादक को अन्य देशों के बाजार में वितरण मध्यस्थो, जैसे- थोक-विकताओं. फुटकर - विकताओं की व्यवस्था करता है। उत्पादक उत्पाद को निर्यात एजेंटों / ब्रोकरों को बेचकर उत्पाद के वितरण का कार्य उन्हीं पर छोड़ देता है। वितरण माध्यम की लंबाई बहुत से तत्वों, जैसे- उत्पाद की कीमत उत्पाद की प्रकृति, बाजार केंद्रीयकरण, व्यावसायिक इकाइयों के सुसंगठित होने आदि पर निर्भर करती है। सुसंगठित वैश्विक फुटकर स्टोर, जैसे- वालमार्ट स्टोर का वितरण माध्यम छोटा है, क्योंकि ये ग्राहकों तक बिना मध्यस्थों के पहुँचते हैं। जिन देशों में फुटकर व्यापार क्षेत्र अभी असंगठित है उनमें विपणन मध्यस्थों की आवश्यकता पड़ती है। इसी तरह महंगे व कम बिकने वाले उत्पादों का वितरण नेटवर्क छोटा होता है जबकि सस्ते व अधिक बिकने वाले उत्पादों का वितरण नेटवर्क बड़ा होता है यदि उत्पादों को ऑनलाइन बेचा जाता है, तब वितरण नेटवर्क छोटा होता है। औद्योगिक उत्पादों की दशा में वितरण नेटवर्क की लंबाई छोटी होती है, उपभोक्ता उत्पाद को वितरण नेटवर्क बड़ा होता है यदि बाजार भौगोलिक रूप से केंद्रित है तो वितरण नेटवर्क की लंबाई कम होती है, भौगोलिक रूप से फैले हुए बाजार में वितरण नेटवर्क बड़ा होता है।