वैश्वीकरण का राजनीतिक प्रभाव - Political Impact of Globalization
वैश्वीकरण का राजनीतिक प्रभाव - Political Impact of Globalization
वैश्वीकरण के बहुपक्षीय प्रभाव होते हैं यह आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक व सांस्कृतिक पहलुओं को प्रभावित करता है। वैश्वीकरण के मुख्य राजनीतिक प्रभाव निम्नलिखित है-
(क) अन्य देशों से संबंधों में सुधार
वैश्वीकरण से विभिन्न देशों की परस्पर निर्भरता बढ़ गई है। अब सारा विश्व एक साझा बाजार बन गया है। विभिन्न देश एक-दूसरे के बहुत नजदीक आ गए है। इससे इन देशों के परस्पर संबंधों में बहुत सुधार हुआ है।
(ख) अफसरशाही की बदलती भूमिका
पहले अफसरशाही विकास के रास्ते में एक बहुत बड़ी प्रशासनिक बाधा थी परंतु उदारीकरण व वैश्वीकरण के बाद अफसरशाही की विकास में भूमिका बदल गई है। अब आर्थिक कियाओं में सरकार की अनावश्यक दखलंदाजी बहुत कम हो गई है अब यह प्रशासनिक बाधा न होकर विकास की गति को तीव्र करने में सहायक के रूप में कार्य करती है।
(ग) पूंजीवाद का विकास:
वैश्वीकरण से पूरे विश्व में पूजीवाद को बहुत बढ़ावा मिला है। अब चीन, रूस, जैसे देश भी जो पहले समाजवाद के प्रवर्तक थे, अब पूजीवाद को अपना चुके है।
(घ) सरकार की बदलती भूमिका:
वैश्वीकरण से पहले सरकार को आर्थिक,
राजनीतिक व सामाजिक कियाओं में सक्रिय भाग लेना पड़ता था परंतु वैश्वीकरण के बाद सरकार ने आर्थिक कियाओं में भागीदारी को बहुत कम कर दिया है। अब घरेलू निजी क्षेत्र व बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ आर्थिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अब सरकार विभिन्न क्षेत्रों, जैसे- स्वास्थ्य, शिक्षा, शुद्ध पेय जल, वातावरण संरक्षण, अधोसंरचना सुरक्षा आदि पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकती है।
(ङ) सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों की कुशलता में वृद्धि
वैश्वीकरण, निजीकरण, उदारीकरण से सार्वजनिक क्षेत्र की कुशलता में वृद्धि हुई है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा तथा निजीकरण के भय के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों अब अपने व्यर्थ खर्चों को कम करने का प्रयास करती है तथा कार्यकुशला व उत्पादकता को बढ़ती के उपाय करती है।
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