जनसंख्या और आर्थिक संवृद्धि - population and economic growth

जनसंख्या और आर्थिक संवृद्धि - population and economic growth


एक शिक्षत व्यक्ति का श्रम कौशल एक अशिक्षित व्यक्ति से अधिक होता है। इसी कारण वह अपेक्षाकृत अधिक आय अर्जित करता है इससे देश के विकास में सहयोग मिलता है तथा राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है। यही कारण है कि एक डाक्टर का राष्ट्रीय आय में योगदान एक मजदूर से कहीं अधिक होगा यह स्वभाविक ही है कि किसी शिक्षित व्यक्ति का देश के विकास में योगदान अशिक्षित व्यक्ति से अधिक होता है। इसी प्रकार एक स्वस्थ व्यक्ति भी एक बीमार व्यक्ति की तुलना में अधिक समय तक बिना किसी रुकावट श्रम की पूर्ति कर सकता है। यह वजह है कि स्वस्थ भी आर्थिक संवृद्धि का एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। अतः शिक्षित एवं स्वस्थ्य जनसंख्या उपार्जन क्षमता का संवर्धन करती है।

मानव की सवर्धित उत्पादकता या मानव पूंजी न केवल श्रम की उत्पादकता को बढ़ाती है, बल्कि यह साथ ही साथ परिवर्तन को प्रोत्साहित कर नवीन प्रौद्योगिकी का भी विकास करती है। शिक्षा समाज में परिवर्तनों और वैज्ञानिक प्रगति को समझने में सहायक है। इसलिए शिक्षित श्रम शक्ति की उपलब्धता नवीन प्रौद्योगिकी को अपनाने में सहायक होती है। मानव पूंजी की वृद्धि के कारण आर्थिक वृद्धि होती है।


इसे सिद्ध करने के लिए कोई व्यावहारिक साक्ष्य अभी स्पष्ट नहीं है। इसका कारण मापन की समस्याये हो सकती है। उदाहरण के लिए एक व्यक्ति कितने वर्ष स्कूल गया, राजकीय विद्यालयों में शिक्षक - शिक्षार्थी अनुपात और देश में स्कूल की नामांकन दर आदि के आधार पर शिक्षा का मापन उसकी गुणवता को आर्थिक रूप से व्यक्त नहीं कर पाता।

इसी प्रकार स्वास्थ्य सेवाओं पर मौद्रिक व्यय, जीवन प्रत्याशा तथा मृत्यु दर आदि से देश की जनसंख्या के वास्तविक स्वास्थ्य स्तर का सही ज्ञान नहीं होता। यदि इन सूचकों का प्रयोग कर विकसित तथा विकासशील देशों में शिक्षा व स्वास्थ्य स्तरों प्रति व्यक्ति आय में सुधारों की तुलना करें तो हमें मानव पूजी के परिवर्तनों में साहचर्य दिखायी पडता है किंतु प्रतिव्यक्ति वास्तविक आय में ऐसी कोई प्रवृति स्पष्ट नहीं होती। दूसरे शब्दों में विकासशील देशों में मानव पूंजी में बहुत तेजी वृद्धि से हो रही है, परंतु उनकी प्रतिव्यक्ति आय में उतनी तेजी से नहीं हो रही हैं। मानव पूंजी तथा आर्थिक संवृद्धि परस्पर एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। अर्थात एक ओर जहां प्रवाहित उच्च आय उच्च स्तर पर मानव पूंजी के सृजन का कारण बन सकती है तो दूसरी ओर उच्च स्तर पर मानव पूजी निर्माण से आय की संवृद्धि में सहायता मिल सकती है।