जनसंख्या - बोझ या मानव पूंजी - Population - Burden or Human Capital

जनसंख्या - बोझ या मानव पूंजी - Population - Burden or Human Capital


किसी देश की जनसंख्या उस देश के लिए बोझ है या तरक्की का मार्ग? भारत और चीन जैसे देशों में अधिक जनसंख्या होने से हानि है या लाभ? इन प्रश्नों के उत्तर में ज्यादातर लोग अधिक जनसंख्या को बोझ ही बताएंगे, किंतु यदि यह जनसंख्या शिक्षित हो, प्रशिक्षित हो एवं शारीरिक स्तर पर स्वस्थ हो तो वह उस देश के लिए अत्यंत बहुमूल्य सिद्ध हो सकती है। अधिक जनसंख्या से अधिक उत्पादकता हो सकती है, किंतु प्रभावकारी उत्पादकता के घटक हैं- शिक्षा, प्रशिक्षण एवं स्वस्थ शरीर।


मानव पूजी


जिस प्रकार एक देश भौतिक संसाधनों को भौतिक पूंजी में परिवर्तित कर सकता है ठीक उसी प्रकार वह अपने मानव संसाधनों मानव पूंजी में परिवर्तित कर सकता है। ऐसा करने के लिए सही शिक्षा प्रणाली व प्रशिक्षण का होना आवश्यक है। समाज तथा देश के विकास के लिए मानव पूंजी की आवश्यकता है इस लक्ष्य को पाने के लिए जो ऐसे योग्य व्यक्ति चाहिए जो पहले स्वयं प्रशिक्षित हो तथा नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने में सक्षम हो तथा उस रूप में कार्य करने योग्य हाँ देश को अन्य मानव पूंजी जैसे डॉक्टर, इंजीनियर आदि को तैयार करने के बेहतर प्रशिक्षक तथा प्रोफेसरों की आवश्यकता होती है। अतः मानव संसाधनों को मानव पूंजी के रूप में परिवर्तित करने के लिए मानव पूजी में निवेश करने की आवश्यकता है।