अवयस्क के वयस्क होने के बाद की स्थिति - post-adult status
अवयस्क के वयस्क होने के बाद की स्थिति - post-adult status
एक अवयस्क साझेदार के वयस्क होने पर निम्नलिखित दो में से एक स्थिति बन सकती है:
1. यदि वह फर्ममें साझेदार बनना स्वीकार कर लेता है।
अ) अधिकार- यदि एक अवयस्क साझेदार वयस्क होने पर फर्म में साझेदार बनना स्वीकार कर लेता है तो उनके निम्नलिखित अधिकार होते है:
i. लाभों में हिस्सा - वह फर्म के लाभों में पूर्ववत् हिस्सा प्राप्त करता रहेगा।
ii. संपत्ति में हिस्सा उसका फर्म की संपत्ति में हिस्सा वहीं रहेगा जो उसकी अवयस्कता की स्थिति में था।
iii. फर्म की गोपनीय पुस्तकों तक पहुँच - वह अन्य साझेदारों की भांति फर्म की गोपनीय पुस्तकों को देखने का अधिकारी हो जायेगा।
iv. अन्य सभी अधिकार उसे वह समस्त अधिकार प्राप्त हो जायेंगे जो एक सामान्य साझेदार को प्राप्त होते हैं।
ब) दायित्व यदि अवयस्क साझेदार वयस्क होन पर फर्म में साझेदार बनना स्वीकार कर लेता है, तो उसके निम्नलिखित दायित्व होंगे:
i. समस्त पूर्व कार्यों के लिए दायित्व- यदि अवयस्क साझेदार वयस्क होनेपर साझेदार बनना स्वीकार करता है तो फर्म के समस्त कार्यों व व्यवहारों के लिए अन्य पक्षकारों के प्रति उस तिथि से उत्तरदायी माना जायेगा जिस तिथि से वह साझेदारी के लाभो में शामिल किया गया था।
ii. बाद के कार्यों के लिए दायित्व - यदि एक अवयस्क साझेदार वयस्क होने पर फर्म का साझेदार बनता है तो फर्म का साझेदार बनने के पश्चात वह सभी कार्यों के लिए सामान्य साझेदार की भांति उत्तरदायी होगा।
iii. व्यक्तिगत रूप में दायित्व - यदि वह वयस्क होने पर साझेदार बनना स्वीकार करता है तो वह फर्म के समस्त कार्यों व व्यवहारों के लिए व्यक्तिगत रूप में अन्य पक्षकारों के प्रति उस तिथि से उत्तरदायी हो जाता है जिस तिथि से वह साझेदारी के लाभों में सम्मिलित किया गया था।
iv. अन्य दायित्व - एसे साझेदार के उपरोक्त दायित्वों के अतिरिक्त सामान्य साझेदार की भाँति शेष सभी दायित्व भी होते है।
2. यदि वह फर्म में साझेदार बनना स्वीकार नहीं करता है।
यदि अवयस्क साझेदार वयस्क होने पर साझेदार बनना स्वीकार नहीं करता है तो उसके अधिकार और दायित्व निम्नलिखित होंगे।
i. उसके अधिकार और दायित्व उसकी सार्वजनिक सूचना देने की तिथि तक वे ही रहेंगे जो कि अवयस्क के होते हैं।
ii. वह फर्म के उन कार्यों के लिए उत्तरदायी नहीं होगा, जो सूचना देने के बाद किये गये हों।
iii. उसे साझेदारों पर संपत्ति तथा लाभो में अपने भाग को प्राप्त करने के लिए वाद प्रस्तुत करने का अधिकर मिल जायेगा।
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