गरीबी निवारण के सुझाव या गरीबी को दूर करने के उपाय - Poverty Alleviation Tips or Measures to Remove Poverty
गरीबी निवारण के सुझाव या गरीबी को दूर करने के उपाय - Poverty Alleviation Tips or Measures to Remove Poverty
भारत की गरीबी को दूर करने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं-
(क) जनसंख्या पर नियंत्रण-गरीबी को दूर करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण अति आवश्यक है। जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन एक महत्वपूर्ण उपाय है। यह अति आवश्यक है कि लोगों को परिवार नियोजन उपायों के बारे में शिक्षित करके जनसंख्या पर नियंत्रण किया जाए।
(ख) उत्पादन में वृद्धि - गरीबी की समस्या का वास्तविक हल यह है कि सभी प्रकार की वस्तुओं के उत्पादन को बढ़ाया जाए। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए भूमि सुधार किए जाएं, उन्नत बीज, रासायनिक खाद, उन्नत कृषि यंत्रों का प्रयोग और सिंचाई के साधनों की सुविधाओं की व्यवस्था करनी चाहिए। इसी प्रकार औद्योगिक उत्पादन को बढ़ाने के लिए उत्पादन की आधुनिक विधियों को अपनाना चाहिए तथा देश में कुटीर एवं लघु उद्योगों को विकास करना चाहिए,
ताकि शीघ्र उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ रोजगार के अवसर निकल सकें।
(ग) आय का समान वितरण गरीबी निवारण के लिए देश में आय और संपत्तित का समान वितरण होना चाहिए। आय की असमानताओं का प्रमुख कारण लोगों को कार्य करने के समान अवसरों का न मिलना है। अतः आय के समान वितरण के लिए गरीब व्यक्तियों को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए। सरकार को अधिकतम आय की सीमा निर्धारित कर देनी चाहिए तथा न्यूनतम मजदूरी निश्चित कर देनी चाहिए। सरकार प्रगतिशील कर प्रणाली तथा सार्वजनिक व्यय नीति में अनुकूल परिवर्तन करके आय तथा धन की असमानताओं को कम करती है।
(घ) पूंजी निर्माण विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी मात्रा में पूंजी की आवश्यकता होती है। पूंजी निर्माण की दर को बढ़ाने के लिए देश में बचत और निवेश की दरों को बढ़ाना आवश्यक है।
इसके लिए आवश्यक है कि लोगों में फिजूलखर्ची की आदत को रोका जाए तथा निवेश के अधिक अवसर प्रदान किए जाए। पूजी निर्माण की दर बढ़ाने से आर्थिक विकास की दर तीव्र होगी, राष्ट्रीय आय तथा प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी और देश की गरीबी दूर होगी।
(ङ) शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन: देश में शिक्षा का प्रसार करना चाहिए। शिक्षा का प्रसार करके जन जागृति लाई जा सकती है। शिक्षा व्यक्ति को केवल विवकेशील ही नहीं बनाती, बल्कि व्यक्ति के दृष्टिकोण को भी व्यापक बनाती हैं। शिक्षित व्यक्तियों को आसानी से रोजगार मिल सकता है। वे अपनी आय के स्तर को बढ़ा सकते हैं तथा अन्त में उच्च रहन सहन का स्तर प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए शिक्षा प्रणाली में मौलिक परिवर्तनों की आवश्यकता है। शिक्षा रोजगार प्रेरक होनी चाहिए तथा उच्च शिक्षा केवल मेधावी छात्रों के लिए सुरक्षित होनी चाहिए।
(च) उपयुक्त वातावरण देश में से गरीबी दूर करने के लिए यह अति आवश्यक है कि सामाजिक वातावरण को आर्थिक विकास के अनुकूल बनाया जाए। इसके लिए आवश्यक है कि लोगों को शिक्षित किया जाए। उनका दृष्टिकोण प्रगतिशील तथा वैज्ञानिक हो, जाति प्रथा के दोष, सामाजिक कुरीतिया अधविश्वास एवं रूढिवादिता दूर हो। यह भी आवश्यक है कि राजनीतिक, प्रशासनिक एवं वैज्ञानिक व्यवस्थाएं आर्थिक विकास के अनुकूल हो ।
(छ) कीमत वृद्धि पर रोक- यदि कीमत वृद्धि का वर्तमान सिलसिला चलता रहा तो देश प्रतिदिन गरीब होता चला गया जाएगा। इसलिए बढ़ रही कीमतों पर तुरंत रोक लगाने की आवश्यकता है। इसके लिए काले धन पर रोक, कृषि तथा उपभोगता पदार्थों में वृद्धि, सार्वजनिक वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, जमाखोरी और चोर बाजारी पर नियंत्रण किया जाना चाहिए।
(ज) रोज़गार में वृद्धि - गरीबी का मुख्य कारण बेरोजगारी है। ग्रामीण क्षेत्र में मौसमी बेरोजगारी को कम करने के लिए कुटीर तथा लघु उद्योगों में बेरोजगारी को कम करने के किए बहुफसलीय खेती को अपनाना चाहिए। शहरी क्षेत्रों में उद्योगों में बेरोज़गारी कम करने के लिए नए उद्योगों की स्थापना करने की आवश्यकता है। इसके लिए सस्ती साख सुविधाए प्रदान करनी चाहिए। शिक्षित बेरोजगारी कम करने के लिए व्यावसायिक शिक्षा पर अधिक बल देना चाहिए। वास्तव में, शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन करके उसे व्यवसाय के साथ जोड़ने की आवश्यकता है। इस प्रकार ग्रामीण तथा शहरी दोनो प्रकार की बेरोज़गारी को कम करके गरीबी को कम किया जा सकता है
(झ) अधिक निवेश:- भारत मे कुछ राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, इत्यादि में अधिक-से-अधिक निवेश करने की आवश्यकता है।
इन राज्यों में विशेष सुविधाएं प्रदान करके प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को भी आकर्षित किया जा सकता है। इससे न केवल इन राज्यों में गरीबी का अनुपात कम होगा, अपितु देश का असंतुलन विकास भी होगा।
(ञ) उचित तकनीक का प्रयोग भारत में श्रम - प्रधान के स्थान पर पूजी प्रधान तकनीक का अधिक प्रयोग हो रहा है। इससे बेरोजगारी बढ़ने के साथ गरीबी भी बढ़ रही है। वास्तव में, भारत मे मध्यवर्ती तकनीक को अपनाना चाहिए। इससे अधिक श्रमिकों को रोजगार मिलेगा और गरीबी कम होगी तथा दूसरी ओर अधिक विकास भी होगा।
(ट) कार्यक्रमों को प्रभावपूर्ण ढंग से लागू करना भारत सरकार द्वारा समय-समय पर गरीबी उन्मूलन के विभिन्न कार्यक्रम बनाए जाते है
परंतु इन कार्यक्रमों को प्रभावपूर्ण ढंग से लागू नहीं किया जाता। परिणामस्वरूप यह कार्यक्रम गरीब वर्ग तक नहीं पहुच पाते अर्थात गरीब वर्ग को विशेष लाभ नहीं होता। इसलिए गरीबी उन्मूलन के लिए सभी कार्यक्रमों को प्रभावपूर्ण ढंग से लागू करने की आवश्यकता है।
(ठ) तीव्र आर्थिक विकास भारत में आर्थिक विकास की दर निम्न है। नौवीं योजना में आर्थिक विकास की दर 54% रही। इस धीमी आर्थिक विकास दर के कारण ही गरीबी में वृद्धि हो रही है।
उपरोक्त वर्णन से प्रतीत होता है कि गरीबी उन्मूलन के अनेक उपाय है। इन सभी उपायों को एक साथ अपनाकर ही गरीबी को दूर किया जा सकता है।
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