प्रतिदर्श में सूक्ष्मता - precision in the sample
प्रतिदर्श में सूक्ष्मता - precision in the sample
प्रतिदर्श का आधारभूत उद्देश्य कुछ चुनी हुई निदर्शन इकाइयों के अध्ययन से संपूर्ण समग्र के अभिलक्षणा के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करना है। प्रश्न यह है कि कुछ चुनी हुई इकाइयों के विश्लेषण द्वारा समग्र की सभी इकाइयों के बारे में विश्वसनीय जानकारी कैसे प्राप्त की जा सकती है? अर्थात निदर्शन के आधार पर संपूर्ण क्षेत्र के संबंध में अनुमान कहाँ तक विश्वसनीय है? यही मूल प्रश्न प्रतिदर्श सिद्धान्त का आधार है। निदर्शन में विश्वसनीयता का सूक्ष्मता मुख्यतः तीन बातो पर आधारित है-
(i) प्रतिदर्श रीति प्रतिदर्श अनुसंधानों की विश्वसनीयता प्रतिदर्श इकाइया चुनने की रीति पर निर्भर होती है। सामान्यत यादृच्छिक निदर्शन रीति द्वारा निकाले गये प्रतिदर्श समग्र के अभिनत प्रतिनिधि माने जाते हैं।
(ii) आकलन विधि- प्रतिदर्श अनुसंधान की विश्वसनीयता इस बात पर भी आधारित होती है कि प्रतिदर्श से पूरे समग्र के संबंध में अनुमान किस प्रकार लगाये जाते हैं अधिकतर अन्तराल आकलनों का ही प्रयोग किया जाता है जिसमें अनुमान विभिन्न सीमाओं के अंतर्गत प्रस्तुत किये जाते है और ये विश्वसस्यता सीमाएं संभावित पर आधारित होती है।
(vi) प्रतिदर्श का आकार निदर्श का आकार भी विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण निर्धारक तत्व है। सामानयतः यदि निदर्श बड़े आकार का होता है, तो सूक्ष्मता का विश्वसनीयता का स्तर भी अधिक होगा। इसके विपरीत, निदर्श का आकार छोटा होने पर निदर्श अध्ययन पर अधिक विश्वास नही किया जा सकता। आकार के साथ चयन विधि और समग्र इकाइयों की प्रकृति का भी विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
वार्तालाप में शामिल हों