नियुक्ति के सिद्धांत - principles of appointment

नियुक्ति के सिद्धांत - principles of appointment


किसी कर्मचारी को कार्य पर नियुक्त करने से पहले कुछ बुनियादी सिद्धांतों का पालन करना पड़ता है। जिन्हें निम्न वर्गों में विभाजित किया गया है। 


1. आवश्यकता अनुसार व्यक्ति का कार्य आवश्यकताओं के अनुसार होना चाहिए। कार्य के हि साथ को व्यक्ति की योग्यता एवं आवश्यकतानुसार तय नहीं करना चाहिए। कार्य पहले, व्यक्ति बाद में का सिद्धांत नियुक्ति में होना चाहिए।


2. व्यक्ति की योग्यता : व्यक्ति की योग्यता के अनुसार उसे कार्य प्रस्ताव देना चाहिए नियुक्ति उसकी योग्यताओं से ऊपर अथवा नीचे नहीं चाहिए।


3. संपूर्ण जानकारी कर्मचारी को उद्योग की कार्य परिस्थिति तथा कार्य से संबधित संपूर्ण जानकारी होना चाहिए। यदि वह कोई गलती करता है तो उसे उस गलती के दंड के बारे में जानकारी होना चाहिए।


4. सहयोग भावना कर्मचारी को कार्य से अवगत कराते समय नए कर्मचारी में निष्ठता सहयोग की भावना पैदा करना चाहिए, ताकि उसे संगठन के प्रति भरोसा हो और वह अपनी जिम्मेदारी को बहुत अच्छे से समझे ।


5. पूर्व के कार्य नए उम्मीदवार की कार्य उपस्थिति के पूर्व उसको क्या कार्य करना है स्पष्ट होना चाहिए।


6. स्थानातरण प्रक्रिया : जब किसी कर्मचारी की नियुक्ति होती है। तो वह अस्थायी पद पर नियुक्त होता है। लेकिन कुछ समय सीमा बीतने के बाद वह स्थायी हो जाता है। वह वातावरण से परिचित हो जाता है तब उसका स्थानांतरण दूसरे कार्य में हो सकता है जहाँ वह अपने पद से बेहतर न्याय कर सके।


उचित नियुक्ति कर्मचारियों की कार्य क्षमता बढ़ाने और उनके मनोबल विकास के लिए सहायक होती है। कर्मचारी की योग्यता का पूरा उपयोग किया जाए इस लिए नियुक्ति की जाती है। कर्मचारी को उस पद पर नियुक्त किया जाता है जिस पद के लिए वह उपयुक्त है तो उसकी कार्य क्षमता पर प्रभाव पडेगा और नियुक्ति श्रम व्यय, दुर्घटनाओं में कमी, अनुपस्थिति आदि की समस्याएं भी दूर हो सकती हैं और अगर कर्मचारी कार्य में सामजस्य स्थापित कर लेता है तो नियुक्ति को उचित कह सकते है।