नौकरी / कार्य मूल्यांकन के सिद्धांत - Principles of Job / Job Evaluation

नौकरी / कार्य मूल्यांकन के सिद्धांत - Principles of Job / Job Evaluation


नौकरी/ कार्य मूल्यांकन में कुछ सिद्धांत हैं जिनका अनुसरण मूल्यांकनकर्ताओं को मूल्यांकन करते समय करना चाहिए। ये सिद्धांत केवल उचित नौकरी मूल्यांकन के लिए मार्गदर्शन निर्देश नहीं हैं बल्कि मूल्यांकन की प्रक्रिया में स्पष्टता भी प्रदान करते हैं। क्रेस के अनुसार, ये सिद्धांत हैं:


1. नौकरी का मूल्यान्कान करें, नौकरी करने वाले का नहीं। प्रत्येक तत्व का मूल्यांकन कार्य / नौकरी की आवश्यकताओं के आधार पर होना चाहिये।


2. मूल्यांकन उद्देश्यों के लिए चयनित तत्वों का शब्दों में तथा कुछ का संख्याओं के रूप में वर्णन संभव होना चाहिए जिससे की प्रत्येक कार्य की आवश्यकताओं का बिना किसी अतिव्याप्तता के निर्धारण करना संभव हो।


3. तत्व स्पष्ट रूप से परिभाषित और उचित प्रकार से चयनित होने चाहिए।


4. किसी भी कार्य मूल्यांकन का सम्प्रेषण सम्बंधित पर्यवेक्षकों एवं कर्मचारियों से करना चाहिए क्योंकि वह उक्त कार्य की उपयोगिता को स्पष्ट करते हैं।


5. पर्यवेक्षकों को अपने स्वयं के विभागों में नौकरियों के मूल्यांकन में भाग लेना चाहिए।


6. कर्मचारियों से अधिकतम सहयोग प्राप्त किया जा सकता है, यदि उन्हें स्वयं मूल्यांकन प्रक्रिया में सहभागिता एवं कार्य / नौकरी की उपयोगिता पर चर्चा का अवसर दिया जाए।


7. बहुत अधिक रोजगारपरक मजदूरियों श्रेणियों की स्थापना नहीं करनी चाहिए व्यावसायिक मजदूरी स्थापित नहीं की जानी चाहिए। कुल अंकों के आधार पर प्रत्येक नौकरी / कार्य के लिए एक वेतन निर्धारित करना समझदारी नहीं होगी, अपितु उनका श्रेणियों के अंतर्गत विभेदन करना अधिक उचित होगा।