उत्पाद वर्गीकरण - Product Classification
उत्पाद वर्गीकरण - Product Classification
उत्पादों का वर्गीकरण टिकाऊपन, भौतिकता, तथा प्रयोग के आधार पर किया जा सकता है
(क) प्रयोग के आधार पर वर्गीकरण प्रयोग के आधार पर उत्पाद दो प्रकार के हो सकते है-उपभोक्ता उत्पाद तथा औद्योगिक उत्पाद (i) उपभोक्ता उत्पादः उपभोक्ता वस्तुओं को अंतिम उपभोक्ताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से उपभोग में प्रयोग किया जाता है। उपभोक्ता उत्पाद, सुविधाजनक उत्पाद सौदे की वस्तु या विशिष्ट वस्तु हो सकते है। सुविधाजनक उत्पाद प्रत्येक दिन की जरूरतों से संबंधित होते है, जैसे टूथपेस्ट, साबुन, वाशिंग पाउडर, चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक खाने का सामान इत्यादि सौदे की वस्तुओं में विकय कर्मचारियों की सलाह एवं विचार-विमर्श की जरूरत होती है। ये वस्तुए सुविधाजनक उत्पादों की तुलना में कम खरीदी जाती है जैसे कपड़े, जूते, हैण्ड बैग आदि। इन्हें कय करते समय उपभोक्ता विभिन्न विकय स्थान स्टोर शो-रूम आदि में जाकर उत्पाद की तुलना करता है
व विभिन्न बांडों के उत्पादों को देखता है। विशिष्ट वस्तुओं में टेलीविजन, स्कूटर कार, कंप्यूटर ए.सी. मोबाइल फोन, फर्नीचर आदि को शामिल किया जाता है। इन उत्पादों को लंबे अंतराल के बाद खरीदा जाता है। ये उत्पाद महंगे तथा तकनीकी होते है।
(ii) औद्योगिक उत्पाद ये उत्पाद उपभोक्ता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से उपभोग नहीं किए जाते, बल्कि इन्हें उत्पादन प्रक्रिया में प्रयोग किया जाता है: जैसे- प्लॉट मशीनरी, अल्ट्रासाउंड मशीन एक्स-रे मशीन आदि ये उत्पाद महंगे व तकनीकी होते हैं। औद्योगिक उत्पाद व्यावसायिक इकाइयों द्वारा प्रयोग 1 किए जाते हैं। इनके विभिन्न प्रकार इस तरह हैं कच्चा माल, कलपुर्जे, पूजी उत्पाद, उत्पादन आपूर्तिया / परिचालन आपूर्तिया ।
(1) कच्चा माल उन उत्पादों को कहते है, जिनकी और प्रोसेसिंग करनी पड़ती है। इनका प्रयोग अन्य उत्पादों को बनाने में किया जाता है।
(2) कल पुर्जे व पूजी उत्पादों का कच्चे माल की प्रोसेसिंग के लिए तथा कच्चे माल को अंतिम उत्पाद में परिवर्तित करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसमें प्लाट मशीनरी, सहायक पुर्जे, छोटे यत्र शामिल है ये अंतिम उत्पाद का हिस्सा नहीं बनते।
(3) उत्पादन आपूर्तिया निर्माण की जाने वाली वस्तु का हिस्सा नहीं बनती, लेकिन निर्माण कियाओं में प्रयोग की जाती है, जैसे- चिकनाई वाले पदार्थ, डीजल, कोयता, विद्युत, स्टेशनरी आदि ये प्रयोग करने पर समाप्त हो जाते हैं।
(ख) टिकाऊपन के आधार पर वर्गीकरण टिकाऊपन के आधार पर उत्पाद टिकाऊ व गैर टिकाऊ हो सकते हैं।
(1) टिकाऊ उत्पादों का जीवनकाल सया होता है। इन्हें लंबे समय तक बार-बार प्रयोग किया जाता है जैसे प्लाट मशीनरी, टेलीविजन, एयर कंडीशनर आदि ।
(2) गैर-टिकाऊ उत्पाद प्रायः एक प्रयोग के बाद या कुछ प्रयोगों के बाद समाप्त हो जाते है ये उपभोग व नाशवान प्रकृति के होते हैं, जैसे- स्टेशनरी, खाने का सामान, कपड़े, जूते, आदि इन्हें बार-बार खरीदा जाता है। इनकी माग नियमित बनी रहती है।
(ग) भौतिक अस्तित्व के आधार पर वर्गीकरण भौतिक अस्तित्व के आधार पर उत्पाद मूर्त या अमूर्त हो सकते हैं। मूर्त उत्पादों का भौतिक अस्तित्व होता है, उन्हें देखा व छुआ जा सकता है।
अमूर्त उत्पादों में सेवाएं शामिल हैं। इन्हें देखा व छुआ नहीं जा सकता, परंतु इनसे उपयोगिता प्राप्त होती है। जैसे बैंको व बीमा कंपनियों की सेवाएँ प्रबंध सलाहकारी सेवाएं सूचना तकनीकी सेवाएं आदि।
(घ) लाभों के आधार पर वर्गीकरण लाभों के आधार पर वर्गीकरण निम्न प्रकार से किया जा सकता है -
(i) आधारभूत / मुख्य उत्पाद इसमें उत्पाद की मूलभूत विशेषताएं शामिल की जाती है। आधारभूत उत्पाद उपभोक्ता की उत्पाद संबंधी मुख्य आवश्यकता को संतुष्ट करते हैं। उत्पाद में मूलभूत आवश्यकता को पूरा करने की विशेषता अवश्य होनी चाहिए। मुख्य उत्पाद कुल उत्पाद का आधार होता है।
(ii) अपेक्षित उत्पाद: यह आधारभूत उत्पाद से अगले स्तर पर होता है।
इसमें ये सभी विशेषताएं शामिल की जाती है जो उत्पाद कय करते समय उपभोक्ता उम्मीद करता है, जैसे- जब कोई उपभोक्ता वाशिंग मशीन खरीदने जाता है तो यह उम्मीद करता है कि वाशिंग मशीन न केवल कपड़े ही धोए बल्कि कपड़ों से पानी भी निकाले, निचोड़े भी तथा सुखाए भी इसके अलावा यह उम्मीद करता है कि वाशिंग मशीन कपड़े धोते हुए अधिक शोर न करे।
(iii) सर्वर्द्धित उत्पाद इसमें उत्पाद की अतिरिक्त सेवाएं तथा लाभ शामिल होते हैं। यह उत्पाद की विस्तृत धारणा है। इसमें उत्पाद की ये विशेषताएं लाभ व सेवाए भी शामिल है जो उपभोक्ता की उम्मीदों से भी अधिक है। व्यावसायिक इकाइयां निस्तर अनुसंधान व विकास कियाओं में सलग्न रहती है, जिससे उत्पाद की विशेषताओं में वृद्धि की जा सके। कुछ समय पश्चात् सवर्द्धित उत्पाद अपेक्षित उत्पाद का स्थान से होता है। अतः वैश्विक इकाइया प्रतियोगी इकाइयों से आगे निकलने के लिए उत्पाद में नयी विशेषताएं जोड़ती रहती है ताकि उपभोक्ता यह अनुभव करे कि कय किया गया उत्पाद उसकी उम्मीद से भी ऊपर है।
(iv) संभावित उत्पाद इसमें वे सभी परिवर्तन व सुधार शामिल है जो भविष्य में उस उत्पाद में कभी संभव हो सकते हैं।
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