मुद्रा कोष के वर्जित या प्रतिबंधित कार्य , अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सफलताएं - Prohibited or restricted functions of the Monetary Fund, Successes of the International Monetary Fund
मुद्रा कोष के वर्जित या प्रतिबंधित कार्य , अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सफलताएं - Prohibited or restricted functions of the Monetary Fund, Successes of the International Monetary Fund
मुद्रा कोष के कार्यों के संबंध में निम्नलिखित प्रतिबंध है-
(i) मुद्रा कोष केवल अल्पकालीन ऋण ही दे सकता है।
(ii) भुगतान शेष में सुधार के लिए किसी देश की आंतरिक अर्थव्यवस्था में मुद्रा कोष किसी प्रकार का कोई भी हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
(iii) मुद्रा कोष केवल अधिकृत मौद्रिक संस्थाओं एवं केंद्रीय बैंक के माध्यम से ही कार्य कर सकता है अथवा व्यक्तियों व निजी संस्थाओं के साथ कार्य नहीं करता।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सफलताएं
मुद्रा कोष से मुद्राओं का क्रय संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन तथा बाद में फ्रांस जैसे विकसित देश करते रहे हैं। परंतु विकासशील देशों की सहायता के लिए विशेष योजनाएं अपनाकर इन देशों को कोष द्वारा सहायता पहुंचाई गई है।
अनेक कठिनाइयों एवं समस्याओं के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष अपने कार्यकाल के 63 वर्षों में विश्व मौद्रिक संतुलन स्थापित करने में पर्याप्त सीमा तक सफल रहा है। इसकी मुख्य सफलताएं निम्नलिखित रही है-
(i) अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग:-अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष अपने आंतरिक संगठन एवं बाहरी प्रभाव के कारण अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग को स्थापित करने में सफल रहा है।
(ii) यूरोपियन देशों का पुनर्निर्माण :- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा अपने प्रभाव के आधार पर अमेरिका जैसे विकसित राष्ट्रों को यूरोपियन देशों की पुनर्निर्माण संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित किया गया है।
(iii) विदेशी भुगतान की बहुमुखी व्यवस्था:- मुद्रा कोष ने विदेशी व्यापार पर लगाए गए प्रतिबंधों, विनिमय नियंत्रणों को कम करने तथा विदेशी भुगतान की बहुमुखी व्यवस्था की स्थापना करने में सफलता प्राप्त की है। मुद्रा कोष की सहायता से ही अब 35 देशों की मुद्राएं स्वतंत्र रूप से अन्य मुद्राओं में परिवर्तित की जा सकती है।
(iv) अंतरराष्ट्रीय तरलता में वृद्धि कोष ने सदस्य राष्ट्रों के भुगतान शेष के अस्थायी असंतुलनों को सुधारने में पर्याप्त सहायता की है। विशेष प्राप्ति अधिकार के रूप में नई तरल संपति का निर्माण करके अंतरराष्ट्रीय तरलता की समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
(v) बहुचलन करंसी प्रणाली की समाप्ति:- मुद्रा कोष ने राष्ट्रों की बहुचलन करसी प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है, क्योंकि यह प्रणाली काफी हानिकारक थी।
(vi) अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि - मुद्रा कोष ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार का विस्तार करने तथा इसे बाधा मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुद्रा कोष ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी भुगतान को सरल बनाया है असंतुलित व्यापार वाले देशों की मदद करके उनके व्यापार को बढ़ाने में सहायता की है।
(vii) विकासशील देशों की विशेष सहायता - मुद्रा कोष ने विकासशील देशों की सहायता की है।
यह कोष इन देशों के भुगतान शेष को संतुलन में बनाए रखने को संतुलन में बनाए रखने एवं मौद्रिक स्थिरता बनाए रखने के लिए सहायता देता है। कोष ने विकासशील देशों के अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की है। सहायता के लिए ट्रस्ट फंड भी बनाया है। इन देशों को तकनीकी सहायता भी दी गई है।
(viii) सकट में सहायता मुद्रा कोष ने सभी सदस्य देशों की आर्थिक सकट के समय काफी मदद की है। पेट्रोल की कीमतें बढ़ जाने के कारण विश्व के कई देशों में विदेशी विनिमय सकट महसूस होने लगा था। फंड ने इस समस्या के समाधान के लिए पेट्रोल सुविधा कोष की स्थापना की।
(ix) स्वर्णमान के दोषों से मुक्ति-मुद्रा कोष के कार्यों से स्वर्णमान के लाभ तो प्राप्त नहीं हुए हैं किंतु उसके दोषों से स्वतंत्रता प्राप्त हो गई है।
वार्तालाप में शामिल हों