गुणवत्ता नियंत्रण चक्र या गुणवत्ता चक्र/ किस्म चक्र - Quality Control Cycle or Quality Cycle / Variety Cycle
गुणवत्ता नियंत्रण चक्र या गुणवत्ता चक्र/ किस्म चक्र - Quality Control Cycle or Quality Cycle / Variety Cycle
* गुणवत्ता चक्र किस्म चक्र हस्तपुस्तिका' (Quality Circle Handbook) के अनुसारः
“किस्म चक्र 3 से 12 लोगों का एक छोटा समूह होता है, जो सामान अथवा एक ही कार्य क्षेत्र से संबन्धित होते हैं तथा प्रत्येक सप्ताह नियमित रूप से कार्य अवधि में स्वेच्छा से अपने पर्यवेक्षक के नेतृत्व में लगभग एक घंटे की बैठक करते हैं और अपने कार्य क्षेत्र की गुणवत्ता सम्बंधित समस्याओं की पहचान, विश्लेषण तथा समाधान करने के लिए प्रशिक्षित होते हैं, प्रबंधन के समक्ष इन उपायों को प्रस्तुत करते हैं और जहाँ संभव होता है, इन समाधानों को स्वयं क्रियान्वित करते हैं।"
व्यावसायिकशब्दकोष. कॉम (businessdictionary.com) के अनुसारः
“किस्म चक्र / गुणवत्ता चक्र, संगठन की व्यापक गुणवत्ता प्रणाली के अंतर्गत एक सहभागी प्रबंधन तकनीक है जिसमें स्वयंसेवक कर्मचारियों के छोटे समूहों (6 से 12 लोग) का गठन, उनके कार्य क्षेत्र की गुणवत्ता अथवा निष्पादन संबंधित समस्याओं की पहचान, निर्धारण तथा समाधान करने के लिए किया जाता है।"
जापान (Japan) में, जहाँ इसका जन्म हुआ, गुणवत्ता चक्र व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रबंधन का एक अनिवार्य एवं अविभाज्य अंग हैं तथा वहां यह गुणवत्ता नियन्त्रण चक्र ( Quality Control Circle) के नाम से प्रचलित है। इसका निर्माण संगठनात्मक प्रदर्शन को बेहतर बनाने, कर्मचारियों को अभिप्रेरित करने तथा उनके कार्यों को समृद्ध बनाने हेतु किया जाता है। परिपक्व गुणवत्ता चक्र, प्रबंधन का विशवास प्राप्त कर स्व-प्रबंधित एवं स्व-क्रियान्वित होते हैं। गुणवत्ता चक्र कर्मचारियों या छात्रों के जीवन को समृद्ध बनाने में सक्षम हैं और सद्भाव और उच्च प्रदर्शन को संभव बनाते हैं। विशिष्ट विषयों जैसे व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य, उत्पाद डिजाइन में सुधार, कार्यस्थल सुधार और विनिर्माण प्रक्रियाओं में सुधार कर रहे हैं।
गुणवत्ता चक्र, विशेष रूप से संगठन / विभाग के प्रदर्शन में सुधार, कर्मचारियों के अभीप्रेरण और उनके कार्यों को समृद्ध बनाने के क्रम में,
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उत्पाद या सेवाओं की गुणवत्ता से संबंधित हैं। इस समूह में संगठन चौड़ा नियंत्रण गतिविधियों, सभी भाग लेने वाले सदस्यों के साथ कार्यस्थल का उपयोग गुणवत्ता नियंत्रण तकनीकों के भीतर स्वयं और आपसी विकास और नियंत्रण और सुधार के एक भाग के रूप में लगातार पर किया जाता है। आम तौर पर एक ही कार्य क्षेत्र से छह से बारह स्वयंसेवकों एक वृत्त बनाते हैं। सामान्यतः सदस्यों को समस्या समाधान, सांख्यिकीय गुणवत्ता नियंत्रण और समूह प्रक्रियाओं आदि के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। गुणवत्ता चक्र आम तौर पर गुणवत्ता और सेवाओं से सम्बंधित सुझाव प्रस्तुत करते हैं, जिनको प्रबंधन द्वारा लागू किया जा सकता है। इस प्रकार गुणवत्ता चक्र न केवल एक सुझाव प्रणाली या एक गुणवत्ता नियंत्रण समूह है, अपितु उससे अधिक है, क्योंकि इसकी गतिविधियों अत्यंत व्यापक हैं। इसके अतिरिक्त, यह कोई विशेष कार्यदल (taskforce) नहीं है क्योंकि, यह किसी संगठन या विभाग का एक स्थायी अंग हो सकता है।
गुणवत्ता चक्र के दो मुख्य कार्य हैं: समस्याओं की पहचान करना; तथा उनके समाधान के लिए सुझाव प्रस्तुत करना। एक द्वितीयक उद्देश्य बैठकों में उपस्थिति और काम से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए औपचारिक अवसर के माध्यम से समूह के मनोबल को बढ़ाना है।
बैठकों का आयोजन एक व्यवस्थित तरीके से किया जाता है। चक्रानुक्रम ( rotation) आधार पर एक अध्यक्ष की नियुक्ति की जाती है तथा एक मुद्दा विषय (agenda) तैयार किया जाता है। कार्यवृत्त भी तैयार किया जाता है जो प्रस्तावों और उनके कार्यान्वयन में एक उपयोगी साधन कार्य करता है। गुणवत्ता चक्र की सफलता के मुख्य रूप से वरिष्ठ/ शीर्ष प्रबंधन के समर्थन पर तथा चक्रों के लक्ष्यों एवं तरीकों के परिप्रिप्रेक्ष्य में प्रतिभागियों के प्रशिक्षण की मात्रा पर निर्भर करता है।
1989 में दिवंगत हुए टोक्यो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर काओरो इशिकावा का गुणवत्ता चक्रों के विकास का सर्वाधिक श्रेय जाता है। 1980 के दशक में, जब प्रत्येक जापानी तकनीक को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था, उस समय गुणवत्ता चक्रों ने गज़ब की जिज्ञासा एवं उत्साह उत्पन्न किया था। परिणामस्वरूप वेस्टिंगहाउस तथा हेवलेट पैकार्ड जैसी अनेक यूरोपीय तथा अमेरिकी संगठन ने गुणवत्ता चक्रों का गठन किया था। 1980 के दशक के दौरान एक समय ऐसा आया जब अकेले जापानी उद्योगों में करीब एक करोड़ लोग गुणवत्ता चक्रों के सहभागी थे।
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